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फ़ोटो साभार: @NarsinghUvach

विवादित बयान देने वाले यति नरसिंहानंद बने जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर

मुसलिम विरोधी कट्टर बयानों के लिए विवादों में रहने वाले गाज़ियाबाद में डासना देवी मंदिर के मुख्य पुजारी यति नरसिंहानंद को जूना अखाड़ा का महामंडलेश्वर बना दिया गया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महासचिव और जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक महंत हरिगिरि ने कुछ दिनों पहले ही उन्हें संन्यास की दीक्षा दी थी। यति नरसिंहानंद सरस्वती दीक्षा के बाद यति नरसिंहानंद गिरि हो गए हैं। महंत हरिगिरि ने दो दिन पहले ही यति नरसिंहानंद गिरि को अपना शिष्य बनाकर महामंडलेश्वर पद पर अभिषेक किया है।

यति नरसिंहानंद को महामंडलेश्वर बनाए जाने का फ़ैसला इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि वह अपने बयानों को लेकर अक्सर विवादों में रहे हैं। कहा जाता है कि शिव संन्यासी संप्रदाय के 7 अखाड़ों में जूना अखाड़ा सबसे बड़ा है। इस अखाड़े में महामंडलेश्वर उन्हें बनाया गया है जिनके ख़िलाफ़ इसी साल धार्मिक भावनाएँ आहत करने के लिए मुक़दमा दर्ज किया गया था। 

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अगस्त महीने में यति नरसिंहानंद का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वह बीजेपी की महिला नेताओं के बारे में बेहद आपत्तिजनक बातें कहते दिख रहे थे। उनके उस वीडियो को लेकर कभी उनके समर्थन में रहने वाले बीजेपी नेताओं ने ही उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की थी।

भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय मंत्री तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने भी नरसिंहानंद का वीडियो ट्वीट करते हुए एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष रेखा शर्मा और यूपी पुलिस को टैग कर कार्रवाई की मांग की थी। रेखा शर्मा ने उनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करने और तुरंत गिरफ्तार करने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस के डीजीपी को पत्र लिखा था। हालाँकि इस मामले में आगे यह जानकारी सामने नहीं आई है कि उनके ख़िलाफ़ क्या कार्रवाई हुई।

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इससे पहले इसी साल अप्रैल महीने में दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कथित तौर पर पैगंबर मोहम्मद के ख़िलाफ़ टिप्पणी कर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में नरसिंहानंद के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई थी। 

इसी साल मार्च महीने में ग़ाज़ियाबाद के जिस मंदिर में पानी पीने के लिए 14 साल के मुसलिम बच्चे की बेरहमी से पिटाई करने की ख़बर आई थी उसका पुजारी यति नरसिंहानंद ही थे। उस मंदिर के बोर्ड को लेकर विवाद हुआ था। ऐसा इसलिए कि उसपर लिखा था- 'यह मंदिर हिंदुओं का पवित्र स्थल है, यहाँ मुसलमानों का प्रवेश वर्जित है। आदेशानुसार: नरसिंहानंद सरस्वती।' बता दें कि बच्चे पर नरसिंहानंद के शिष्य द्वारा हमला किया गया था और उस हमले को नरसिंहानंद ने सही ठहराया था।

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टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, नाम न बताने की शर्त पर एक साधु ने कहा कि नरसिंहानंद की तरक्की 'उत्तराखंड में अखाड़ों के मुसलिम जनसांख्यिकी के प्रति बदले हुए दृष्टिकोण' को दिखाती है। 

मंगलवार को ही महंत हरिगिरि ने यह दावा किया था कि हरिद्वार ज़िले में मुसलमानों की आबादी तेजी से बढ़ी है और यह चिंताजनक प्रवृत्ति है। दरअसल, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने हरिद्वार में मुसलमानों की आबादी बढ़ने का हवाला दिया था और उत्तराखंड को 'अगला कश्मीर' बनने से रोकने का आग्रह किया था। पत्र केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी और अन्य को भी भेजा गया था। 

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