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पाँच साल में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का सवाल ही नहीं: रंगराजन 

अर्थव्यवस्था की ख़राब स्थिति पर अब भारतीय रिज़र्व बैंक यानी आरबीआई के पूर्व गवर्नर सी रंगराजन ने खुलकर बोला है। उन्होंने कहा कि पाँच साल में पाँच ट्रिलियन (खरब) डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का सरकार का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाएगा। रंगराजन ने कहा है कि अर्थव्यवस्था खस्ता हालत में है और ऐसे में 2025 तक पाँच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का सवाल ही नहीं उठता। हाल में बेरोज़गारी काफ़ी ज़्यादा बढ़ने और अर्थव्यवस्था के हर मोर्चे पर सरकार के विफल होने पर उठ रहे सवालों के बीच ही प्रधानमंत्री मोदी ने अगले पाँच साल में अर्थव्यवस्था को पाँच ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य रखा है। फ़िलहाल भारत की अर्थव्यवस्था क़रीब 2.7 ट्रिलियन डॉलर की है। यानी इसका मतलब है कि अगले पाँच साल में इसे सीधे दोगुना करना होगा। लेकिन दिक्कत यह है कि आर्थिक मोर्चे पर हर सेक्टर नकारात्मक विकास दिखा रहा है। 

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हाल ही में नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफ़िस यानी एनएसओ के हवाले से एक रिपोर्ट आई है कि गाँवों में माँग 40 साल के न्यूनतम स्तर पर है। गाँवों में जुलाई 2017 से जून 2018 के बीच खपत में 8.8 प्रतिशत की कमी आई है। स्टेट बैंक ने अपनी ताज़ा रपट में कहा है कि चालू वित्तीय वर्ष की दूसरी छमाही में सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी की वृद्धि दर घट कर 4.2 प्रतिशत पर आ सकती है। आरबीआई ने भी सालाना जीडीपी वृद्धि दर के घिसक कर 6.1 प्रतिशत रहने की संभावना जताई है। बता दें कि 2016 में यह दर 8.2 फ़ीसदी थी जो 2019 के वित्तीय वर्ष में घटकर 6.8 फ़ीसदी पर आ गई है। औद्योगिक उत्पादन दर भी काफ़ी ज़्यादा सिकुड़ गयी है। यानी सामान की माँग कम हो गई है। बेरोज़गारी दर 45 साल में रिकॉर्ड स्तर पर है।

अर्थव्यवस्था की ऐसी पतली हालत के बीच ही सी रंगराजन ने गुरुवार को सरकार के दावों पर सवाल उठाए हैं। वह आईबीएस-आईसीएफ़एआई बिज़नेस स्कूल द्वारा आयोजित एक समारोह को संबोधित कर रहे थे। 'हिंदुस्तान टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, ‘आज हमारी अर्थव्यवस्था क़रीब 2.7 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर ही है और हम अगले 5 वर्षों में इसे दोगुना कर 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर करने की बात कर रहे हैं। उस स्तर को प्राप्त करने के लिए विकास दर 9 प्रतिशत प्रति वर्ष से अधिक होनी चाहिए। 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचने का सवाल ही नहीं है।’

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रंगराजन ने यह भी कहा कि दो साल गँवा चुके हैं, इस साल 6 प्रतिशत के नीचे ही विकास दर रहने वाली है और अगले साल यह लगभग 7 प्रतिशत तक हो सकती है। हालाँकि उन्होंने कहा कि इसके बाद, अर्थव्यवस्था ज़ोर पकड़ सकती है। सी रंगराजन ने जो अर्थव्यवस्था के तेज़ी पकड़ने की जो उम्मीद जताई है उसके अभी तक दूर-दूर तक संकेत नहीं मिल रहे हैं। एक के बाद एक देश की ही सरकारी एजेंसियों की  ऐसी रिपोर्टें आ रही हैं जिसमें विकास दर लगातार नीचे गिरती दिख रही है। मूडीज़, वर्ल्ड बैंक जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ भी भारतीय अर्थव्यवस्था के ख़राब हालत में होने के संकेत दे रही हैं।

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रंगराजन ने पाँच ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य के पूरा हो जाने के बाद की स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मान लिया जाए कि जीडीपी पाँच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन भी जाती है तो हमारी प्रति व्यक्ति आय तब भी 1,800 से बढ़कर 3,600 अमेरिकी डॉलर ही होगी। उन्होंने कहा कि इसका मतलब होगा कि तब भी हम निम्न-मध्य आय वाले देशों की श्रेणी में ही रहेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि एक विकसित देश की परिभाषा वह है जिसकी प्रति व्यक्ति आय 12,000 अमेरिकी डॉलर है। उन्होंने कहा कि हमें उस स्तर तक पहुँचने में 22 साल लगेंगे और यह तभी संभव होगा जब हम प्रति वर्ष 9 प्रतिशत की दर से बढ़ें। रंगराजन ने जो यह बात कही है उससे फ़िलहाल की स्थिति में तो ऐसा संभव नहीं लगता।

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