बीएमसी चुनाव में उम्मीदवारों के लिए नामांकन फॉर्म में निबंध लिखना अनिवार्य क्यों किया गया? नियम के मुताबिक़ अगर निबंध वाला कॉलम खाली छोड़ा गया तो नामांकन फॉर्म रद्द हो जाएगा।
बीएमसी चुनाव लड़ना है तो निबंध लिखना होगा। उम्मीदवारों को अब सिर्फ़ नामांकन फॉर्म भरना काफी नहीं होगा। पहली बार इतिहास में नामांकन फॉर्म के साथ निबंध लिखकर भी जमा करना है। अगर निबंध कॉलम खाली छोड़ा, तो नामांकन रिजेक्ट! 2516 उम्मीदवारों को 100 से 500 शब्दों में निबंध लिखने को कहा गया। निबंध इस पर लिखना था कि अगर वो चुने गए तो अपने वार्ड को कैसे विकसित करेंगे!
कल्पना कीजिए, चुनाव जीतने से पहले नेता जी पेन थामे बैठे हैं, सोच रहे हैं– 'सड़कें बनवाऊंगा, पानी का इंतज़ाम करूंगा या गड्ढों को पहले भरवाऊंगा?'
राज्य चुनाव आयोग का ये नया नियम 2018 से था, लेकिन इतने बड़े स्केल पर पहली बार लागू हुआ। कुछ उम्मीदवार खुश हैं। बीजेपी के विनोद मिश्रा बोले कि मेरा रोडमैप तैयार है, लिखना आसान था! वहीं कांग्रेस की शीतल म्हात्रे नाराज़ हैं। उन्होंने कहा कि पैंफलेट तो घर-घर बांटते ही हैं, ये निबंध किस काम का? मतलब, इस बार वोटरों को स्पीच और फ्लायर्स से आगे जाकर असली प्लान पढ़ने को मिलेगा। ट्रांसपेरेंसी का ये निबंध वाला ट्विस्ट चुनाव को और मजेदार बना रहा है!
बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी के आम चुनावों में पहली बार इस बार उम्मीदवारों को सिर्फ नामांकन पत्र और हलफनामा जमा करने से ज़्यादा करना पड़ा। नामांकन दाखिल करने वाले सभी 2516 उम्मीदवारों को निबंध लिखना जरूरी था। इस निबंध में उन्हें बताना था कि अगर वे चुने गए तो अपने इलाके का विकास कैसे करेंगे।
2018 में लाया गया था प्रावधान
यह नया नियम नागरिक चुनावों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए लाया गया है। राज्य चुनाव आयोग के सचिव सुरेश काकानी ने कहा, 'यह प्रावधान 2018 में शुरू किया गया था और इसके बाद उप-चुनावों में इस्तेमाल हुआ है, लेकिन इतने बड़े आम नागरिक चुनाव में पहली बार लागू किया गया है।'
अधिकारियों ने बताया कि नामांकन की जांच के दौरान रिटर्निंग अधिकारी को सख्त निर्देश दिए गए कि अगर निबंध वाला कॉलम खाली छोड़ा गया तो नामांकन पत्र रद्द कर दिया जाए।
उम्मीदवार क्या सोचते हैं?
कुछ उम्मीदवारों ने इस नियम का स्वागत किया। ईटी की रिपोर्ट के अनुसापर मालाड (पूर्व) से बीजेपी उम्मीदवार विनोद मिश्रा ने कहा, 'मैं पहले से कॉर्पोरेटर रह चुका हूँ। मेरे पास इलाके के विकास का साफ प्लान है और कई अधूरे प्रोजेक्ट हैं जिन्हें पूरा करना चाहता हूं। अपनी योजनाएं लिखना मेरे लिए आसान था। यह अच्छा मौका है अपनी सोच लोगों तक पहुंचाने का।'
लेकिन कई उम्मीदवारों को यह नियम पसंद नहीं आया। रिपोर्ट के अनुसार 2017 में हार चुकीं और फिर से चुनाव लड़ रहीं पूर्व कांग्रेस कॉर्पोरेटर शीतल म्हात्रे ने कहा, 'उम्मीदवार तो वैसे भी घर-घर जाकर पर्चे और बुकलेट बांटते हैं, जिसमें अपना काम और वादे लिखे होते हैं। नामांकन में फिर से निबंध लिखने का क्या फायदा? यह बेकार का काम है।'कांग्रेस विधायक असलम शेख ने भी यही बात कही। इनके परिवार के सदस्य बीएमसी चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, 'आजकल हाउसिंग सोसाइटी और लोकल ग्रुप उम्मीदवारों से कई मुद्दों पर सवाल पूछते हैं और ग्रिल करते हैं। नामांकन फॉर्म में निबंध लिखने से कुछ खास फर्क नहीं पड़ता। असली जांच तो जनता करती है।'
इस नियम का मुख्य उद्देश्य क्या है?
चुनाव आयोग का मानना है कि इससे उम्मीदवारों को अपने वार्ड के विकास की योजनाएं साफ-साफ लिखनी पड़ेंगी। इससे पारदर्शिता आएगी और वे जवाबदेह बनेंगे। मतदाताओं को भी उम्मीदवारों की सोच समझने में आसानी होगी। सिर्फ भाषणों या पर्चों से आगे जाकर वे असली एजेंडा जान सकेंगे।
बीएमसी चुनाव 15 जनवरी को होने हैं और वोटों की गिनती 16 जनवरी को होगी। मुंबई के 227 वार्डों में यह चुनाव हो रहा है। नामांकन की प्रक्रिया दिसंबर 2025 में पूरी हो चुकी है। इस नए निबंध नियम से चुनाव और दिलचस्प हो गया है। कुछ लोग इसे अच्छा कदम बता रहे हैं तो कुछ इसे अनावश्यक। अब देखना यह है कि मतदाता इन योजनाओं को पढ़कर किसे चुनते हैं।