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प्रतीकात्मक तसवीर।

पुणे:  सवर्ण युवती से प्रेम संबंध के कारण दलित युवक की हत्या

महाराष्ट्र के पुणे में दलित समाज के एक युवक की बेरहमी से हत्या कर दी गई। युवक का कसूर सिर्फ़ इतना था कि वह सवर्ण जाति की एक युवती से प्यार करता था। युवक का नाम विराज विलास जगताप था और उसकी उम्र 20 साल थी। 

‘इंडिया टुडे’ के मुताबिक़, विराज ने मौत से पहले दिए अपने अंतिम बयान में उसके साथ हुई क्रूरता को बताया है। बयान में विराज ने कहा था कि वह अपनी मोटरसाइकिल से जा रहा था, तभी युवती के रिश्तेदारों ने एक ऑटो से उसे टक्कर मार दी। विराज ने कहा था कि उसके नीचे गिरने के बाद, अभियुक्त आए और उस पर रॉड और पत्थरों से हमला कर दिया। 

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विराज के अंतिम बयान में लिखा गया है कि युवती के पिता जगदीश काते ने विराज के मुंह पर उस वक्त थूका, जब वह घायल हालत में रोड पर पड़ा था। 

विराज ने बयान में कहा था, ‘मैं दया की भीख मांग रहा था लेकिन युवती के पिता ने कुछ नहीं सुना। उन्होंने कहा कि तुम्हारी मेरी बेटी के साथ प्यार करने की हिम्मत कैसे हुई।’
पिंपरी चिंचवाड़ पुलिस ने विराज ने अपने बयान में जिन 6 लोगों का नाम लिया था, उन सभी को गिरफ़्तार कर लिया है। अभियुक्तों में से दो नाबालिग हैं। 

‘इंडिया टुडे’ के मुताबिक़, विराज के बड़े भाई सागर जगताप ने कहा कि 7 जून को रात 9 बजे युवती के परिजनों की ओर से विराज को फ़ोन आया और उन्होंने कहा कि वे उससे इस मामले में (युवती से अफ़ेयर को लेकर) बात करना चाहते हैं। सागर ने कहा कि परिजनों ने विराज को घर पर बुलाया। 

सागर ने कहा कि घर पहुंचने पर युवती के परिजनों ने विराज को गालियां दीं और उसकी जाति के बारे में भी अपशब्द कहे। सागर के मुताबिक़, जब विराज उनके घर से निकला तो उस पर बीच रास्ते में रॉड और पत्थरों से हमला कर दिया। 

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विराज के चाचा ने कहा कि वह एक युवती से प्यार करता था। उन्होंने अभियुक्तों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की मांग की। एसीपी श्रीधर जाधव ने कहा है कि मामले में एफ़आईआर दर्ज कर ली गई है।

अभियुक्तों पर आईपीसी की धारा 302 (हत्या) सहित कई गंभीर धाराओं में मुक़दमा दर्ज किया गया है। अभियुक्तों पर अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत भी मुक़दमा दर्ज किया गया है। सभी अभियुक्तों को अदालत में पेश किया गया और 7 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है। 

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