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शरद पवार के घर के बाहर प्रदर्शन, चप्पलें फेंकी; सुप्रिया सुले पर भी ग़ुस्सा फूटा

महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम यानी एमएसआरटीसी के कर्मचारियों ने शुक्रवार को एनसीपी नेता शरद पवार के घर के बाहर प्रदर्शन किया। एमएसआरटीसी के कर्मचारी राज्य सरकार के साथ एमएसआरटीसी के विलय की मांग कर रहे हैं। शुक्रवार को 100 से अधिक कर्मचारियों ने मुंबई में शरद पवार के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया, नारेबाजी की और उनके घर पर जूते-चप्पल फेंके। प्रदर्शनकारियों के ग़ुस्से का शिकार एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले को भी होना पड़ा। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों ने दुर्व्यवहार किया। हालाँकि सुप्रिया सुले की ओर से न तो ऐसी कोई शिकायत की गई है और न ही इस बारे में बयान जारी किया गया है।

रिपोर्ट है कि दक्षिण मुंबई में पवार के आवास 'सिल्वर ओक' के बाहर प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की, जबकि सुप्रिया सुले ने उन्हें शांत करने की कोशिश की। 

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एमएसआरटीसी के कर्मचारी पिछले साल नवंबर से हड़ताल पर हैं। उनकी मांग है कि उनको राज्य सरकार के कर्मचारी का दर्जा दिया जाए और उस तरह की सुविधाएँ भी दी जाएं। नकदी संकट से जूझ रहे परिवहन निगम का सरकार में विलय करने की मांग की जा रही है। एनसीपी महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार में शामिल है और शरद पवार इस पार्टी के मुखिया हैं। इसी वजह से उन कर्मचारियों ने शरद पवार के घर के बाहर प्रदर्शन किया।

उनका यह प्रदर्शन बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फ़ैसले के बाद आया है जिसमें अदालत ने हड़ताली कर्मचारियों को 22 अप्रैल तक ड्यूटी पर फिर से शुरू करने के लिए कहा था। अदालत के आदेश के बाद राज्य के परिवहन मंत्री अनिल परब ने आश्वासन दिया कि उच्च न्यायालय की समय सीमा के भीतर काम करने के लिए रिपोर्ट करने वाले श्रमिकों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

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एक प्रदर्शनकारी ने 'पीटीआई' से कहा कि हड़ताल के दौरान आत्महत्या की वजह से क़रीब 120 एमएसआरटीसी कर्मचारियों की मौत हुई है। ये आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या है, जो राज्य की नीतियों ने करवाई है। हम सरकार में अपने विलय की मांग पर अडिग हैं। अभी तक शरद पवार ने कुछ नहीं किया है, वो इस मामले को हल करवाएं।'

एमएसआरटीसी के हजारों कर्मचारी नवंबर से विरोध कर रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि उनके साथ राज्य सरकार के कर्मचारियों के समान व्यवहार किया जाए।

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