loader

एनसीबी: रिमांड कॉपी में रिया के ड्रग्स लेने की बात का जिक्र नहीं, चैनल्स ने झूठ बोला? 

कुछ न्यूज़ चैनलों के तमाशापसंद एंकर्स ने मंगलवार को काफ़ी देर तक अपने चैनल पर इस ख़बर को जोर-शोर से चलाया कि फ़िल्म अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के सामने इस बात को कबूल लिया है कि वह ड्रग्स लेती थीं। 

उन्होंने चीख-चीखकर हिंदुस्तान के अवाम के सामने यह साबित करने की कोशिश की कि पिछले दो महीने से उन्होंने रिया को जो अपराधी साबित करने की मुहिम समाज के सामने छेड़ रखी थी, वह सही थी। लेकिन ऐसे तमाशापसंद एंकर्स के चेहरे का रंग तब उतर गया जब यह सामने आया कि एनसीबी की रिमांड कॉपी में रिया के ड्रग्स लेने की बात का कोई जिक्र ही नहीं था। 

एनसीबी की रिमाड कॉपी सामने आने के बाद यह सवाल ज़रूर खड़ा होता है कि क्या रिया को जान-बूझकर निशाना बनाया गया। 

ताज़ा ख़बरें

एनसीबी की मंशा पर सवाल 

इस मामले में एनसीबी के काम करने के तरीक़े पर ढेरों सवाल उठते हैं। एनसीबी ने अपनी रिमांड कॉपी में लिखा है कि सुशांत के हाउस मैनेजर, कुक ने इस बात को स्वीकार किया है कि वे सुशांत और रिया के कहने पर सुशांत के लिए ड्रग्स लाते थे और इसके लिए वे दोनों उन्हें पैसे भी देते थे। लेकिन इस आधार पर कि रिया सुशांत के लिए ड्रग्स ख़रीदती थी और उसके लिए पैसे देती थी, एनसीबी का यह कहना कि वह ड्रग सिंडिकेट की एक्टिव मेम्बर थी, एनसीबी की मंशा पर सवाल खड़े करता है।  

एनसीबी की रिमांड कॉपी से यह साबित हो जाने के बाद कि रिया से लेकर हाउस मैनेजर सैमुअल मिरांडा और बाक़ी लोग सुशांत के लिए ड्रग्स खरीदते थे, तो क्या यह साबित नहीं हो जाता कि सुशांत ड्रग्स लेते थे और इस बात को रिया ने एक टीवी चैनल के इंटरव्यू में भी स्वीकार किया था।
महाराष्ट्र से और ख़बरें

कई बार चलाई झूठी ख़बरें

सुशांत की मौत का मामला सामने आने के बाद से ही इन चैनल्स ने पहले इस तरह की ख़बरें चलाईं कि रिया ने ही सुशांत की हत्या की है लेकिन सीबीआई को अपनी जांच में ऐसा कुछ नहीं मिला। सुशांत के पिता की एफ़आईआर के आधार पर सुशांत के खाते से 15 करोड़ रुपये रिया द्वारा अपने खाते में ट्रांसफ़र करने की ख़बर भी फ़ुस्स हो गई। लेकिन इन चैनलों ने झूठ बोलना नहीं छोड़ा। 

उसके बाद ये ड्रग्स का तमाशा लेकर बैठ गए, अब उसकी भी हवा निकल गयी। अंत में इनके पास एक लाइन बची है कि एनसीबी ने अपनी रिमांड कॉपी में लिखा है कि रिया ड्रग सिंडिकेट की एक्टिव मेम्बर थी। वह ख़ुद ड्रग्स नहीं लेती थी और सुशांत के लिए मंगवाती थी। इस सच के सामने आने के बाद भी इन चैनल्स की ये हिम्मत नहीं है कि ये इस बात को चला सकें कि सुशांत ड्रग एडिक्ट था क्योंकि ये किसी भी हालत में रिया को मुजरिम बनाकर पेश करना चाहते थे, जिसमें इन्हें कुछ जांच एजेंसियों की ओर से भरपूर मदद मिलती दिख रही है। 

रिया की गिरफ़्तारी के बाद उनके वकील सतीश मानशिंदे ने सुशांत सिंह राजपूत को ड्रग का आदी बताते हुए कहा, ‘तीन केंद्रीय एजेंसियां उस महिला के पीछे बुरी तरह पड़ी हुई हैं, जो एक ड्रग एडिक्ट से प्यार करती थी।’ उन्होंने कहा कि रिया की गिरफ़्तारी से न्याय के साथ धोखा हुआ है।

...मेरी फ़ैमिली को गोली मार कर उड़ा दो

कुछ टीवी चैनलों के लिए टीआरपी बटोरने का मुद्दा बन चुके सुशांत की मौत के मामले में दिन-रात रिया को उनकी मौत का जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की गई। लेकिन हाल ही में रिया ने कई मामलों में साफ-साफ बात करके अपना पक्ष दमदार तरीके से सामने रखा था। 

न्यूज़ चैनल आज तक को दिए गए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में इस सवाल के जवाब में कि क्या उनका ड्रग डीलर्स के साथ कोई कनेक्शन है, रिया ने कहा था, ‘यही बचा था अब मेरे ऊपर डालने के लिए कि इस लड़की को इतना crucify (परेशान करना) कर दो, मैं तो बोलती हूं कि एक बंदूक ही ले आओ और मेरी फ़ैमिली लाइन से खड़ी हो जाएगी...गोली मार कर उड़ा दो हमें, नहीं तो हम ही सुसाइड कर लेते हैं, फिर कौन जिम्मेदार होगा।’ 

‘कभी भी ड्रग्स नहीं ली’

रिया ने कहा था कि वह इन सारे आरोपों को सिरे से खारिज करती हैं और ये पूरी तरह बेबुनियाद हैं। रिया ने यह भी कहा था कि उन्होंने जिंदगी में कभी भी कोई ड्रग्स नहीं ली है और वह अपना ड्रग ट्रस्ट कराने के लिए तैयार हैं। रिया ने एक सवाल के जवाब में कहा था कि सुशांत मैरोआना लेते थे और वह उन्हें कंट्रोल करने की कोशिश करती थीं।

सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

'सत्य हिन्दी'
की ताक़त बनिए


गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

महाराष्ट्र से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें