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मनमोहन सिंह ने क्यों कहा, सावरकर विरोधी नहीं है कांग्रेस?

कांग्रेस सावरकर विरोधी नहीं है, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस बयान के बाद यह सवाल चर्चा में है कि कांग्रेस क्या वैचारिक रूप से दिग्भ्रमित होती जा रही है? या जिस तरह से राहुल गाँधी-प्रियंका गाँधी पिछले लोकसभा या विधानसभा चुनावों के दौरान मंदिर-मंदिर जाकर पूजा-अर्चना या गंगा यात्रा करके सॉफ्ट हिंदुत्व का संकेत दे रहे थे, यह उसी दिशा में कोई सोचा-समझा क़दम है? 

महात्मा गाँधी की हत्या के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का हाथ था, राहुल गाँधी ऐसा बयान देकर अदालती लड़ाईयों का सामना कर रहे हैं। राहुल संघ, गोडसे तथा सावरकर की नीतियों का विरोध करने और उनसे मुक़ाबला करने की बात करते हैं, ऐसे में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का यह बयान चौंकाने वाला ही है। मनमोहन सिंह ने जो बयान दिया उसमें उन्होंने यह सफ़ाई भी दी है कि जब इंदिरा गाँधी देश की प्रधानमंत्री थीं तब उन्होंने सावरकर पर डाक टिकट जारी किया था। 

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मनमोहन सिंह महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में प्रचार के अंतिम चरण के दौरान बृहस्पतिवार को बीजेपी की केंद्र और राज्य सरकार को आर्थिक नीतियों तथा पीएमसी बैंक के मुद्दे पर घेरने आये थे लेकिन सावरकर को लेकर बयान देकर वह चर्चा को अलग ही दिशा दे गए। सिंह ने कहा कि कांग्रेस सावरकर विरोधी नहीं है लेकिन हम उनकी हिंदुत्व की विचारधारा से सहमत नहीं हैं। बीते कुछ दिनों से सावरकर को लेकर विवाद शुरू हो गया है और यह तबसे शुरू हुआ है जबसे भारतीय जनता पार्टी ने अपने संकल्प पत्र में सावरकर को ‘भारत रत्न’ देने की बात कही। 

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राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी ने जानबूझकर इस मुद्दे को संकल्प पत्र में शामिल किया है ताकि ध्रुवीकरण हो सके। इसके पीछे एक तर्क यह भी दिया जा रहा है कि पूरे चुनाव प्रचार में देवेंद्र फडणवीस सरकार अपनी उपलब्धियों को गिनाने के बजाय कश्मीर से धारा 370 को हटाने पर ही चर्चा कर रही है। पार्टी के दोनों शीर्ष नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह अपनी हर सभा में धारा 370 के अलावा किसी और मुद्दे पर बात ही नहीं करते। 

किसानों की उपज का दुगना भाव कभी नरेंद्र मोदी का मुख्य वादा हुआ करता था लेकिन सूखे और बाढ़ से पीड़ित महाराष्ट्र के किसानों के समक्ष वे राष्ट्रवाद और धारा 370 का ही जिक्र कर रहे हैं। ऐसे में सावरकर को भारत रत्न देने की बात ने चुनाव के अंतिम चरण में नई चर्चा छेड़ दी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सावरकर को ‘भारत रत्न’ देने की घोषणा के अगले ही दिन कहा,  ‘राष्ट्रवाद को हमने राष्ट्र निर्माण के मूल में रखा है और ये सावरकर के संस्कार हैं।’ सावरकर को भारत रत्न देने के सवाल पर जिस तरह कांग्रेस के नेताओं के अलग-अलग बयान आ रहे हैं उन्हें देखकर तो लगता है कि पार्टी को बहुत बड़े वैचारिक मंथन की जरूरत है।

कांग्रेस को यह तय करना होगा कि उसे सॉफ्ट हिंदुत्व अपनाना है या गाँधी-नेहरू के सर्वधर्म समभाव की नीति पर चलते रहना है?

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी कहते हैं यदि महात्मा गाँधी की 150 वीं जयंती वर्ष पर देश की सरकार सावरकर को ‘भारत रत्न’ देने जा रही है तो 'इस देश को भगवान ही बचाये'। तिवारी के अनुसार यह एक सोची-समझी योजना के तहत किया जा रहा है। तिवारी ने कहा कि एक तरफ़ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महात्मा गाँधी की बातें करते हैं, उनके आदर्शों को सराहते हैं, वहीं दूसरी तरफ़ सावरकर को भारत रत्न देने की भी बात करते हैं। 

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कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह कहते हैं कि सावरकर गाँधी की हत्या के आरोपी थे। यह बात सही है कि सावरकर गाँधी के वैचारिक विरोधी थे तथा उनकी हत्या के आरोप में गिरफ्तार भी हुए थे। लिहाजा जब-जब उनको भारत रत्न देने की बात उठेगी तो पक्ष-विपक्ष की ओर से बयान तो आने शुरू ही होंगे। ऐसे में मनमोहन सिंह का यह कहना कि हम सावरकर के विरोधी नहीं हैं, कई बातों को जन्म देता है। सवाल यह उठता है कि क्या कांग्रेस यह मानने को तैयार हो गयी है कि सावरकर गाँधी की हत्या के आरोपी नहीं थे? या कांग्रेस अपनी विचारधारा को कोई नई दिशा देने की कवायद में लगी हुई है?
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