ममता यह नहीं समझ पा रही हैं कि अब चंडी का पाठ करना काउंटर-प्रोडक्टिव होगा। दुर्गा-चंडी, बंग महिमा 2019 के चुनाव परिणामों के बाद ही शुरू करना था। मोदी ने वाइब्रेंट गुजरात के साथ गुजराती गौरव का नारा उन्माद की हद तक खड़ा किया था। आज वह कहीं नहीं दिखाई देता क्योंकि इस बीच मोदी को गंगा मां ने वाराणसी बुला लिया।
ममता की स्थिति उस अकेले फाइटर की मानिंद हो गयी जो योद्धा तो बड़ा है लेकिन एक चक्रव्यूह में फँसा है जिससे निकलना अंतिम दिनों में संभव नहीं।
काउंटर रणनीति यह होती कि ममता के सलाहकार खासकर प्रशांत किशोर इस नारे की काट में उतना ही प्रबल ‘बँगला माटी -जय दुर्गा’ इस कदर विकसित करते कि जहाँ कुछ लोग जय श्रीराम कहते उसके चौगुनी ताक़त से ममता के लोग अपना नारा प्रबल करते। इस माइंडगेम में ममता आगे नहीं निकल सकीं।