घोषणाएँ सुनने में तो अच्छी लगती हैं लेकिन इन पर भरोसा तभी होगा जब लोगों को इनके ठोस फायदे मिलने लगेंगे। कोरोना महामारी ने करोड़ों लोगों को बेरोजगार किया है और करोड़ों की आमदनी आधी रह गई है, महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ दी है, बहुत-से लोग इलाज के अभाव में मारे गए हैं।
सच पूछा जाए तो किसानों और मध्यम वर्ग के व्यापारियों और नौकरीपेशा लोग तो इस बजट से निराश ही हुए हैं।