पहली और दर्दनाक घटना होने के चलते पंकज कुलश्रेष्ठ के निधन की प्रतिक्रिया पूरे प्रदेश के पत्रकारों में हुई। उनकी मृत्यु के बाद उनके स्थानीय संगी-साथी आगरा ज़िला प्रशासन से और लखनऊ के पत्रकार मुख्यमंत्री और अतिरिक्त मुख्य सचिव से मिल कर अनुदान राशि की माँग करते रहे लेकिन महीना बीतते-बीतते उन्हें आश्वासन से अधिक कुछ नहीं मिला।
हाल ही में कर्नाटक हाई कोर्ट ने भी अपने एक महत्वपूर्ण फ़ैसले में राज्य के प्रेस और मीडिया कर्मियों को भी कोविड वॉरियर का दर्ज़ा प्रदान करते हुए मृत्यु हो जाने की स्थिति में 50 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति दिए जाने का राज्य सरकार को आदेश दिया है।
बड़ी मुश्किल से उनका टेस्ट लिया गया। इसके बाद उनकी रिपोर्ट गुम हो गयी। सातवें दिन जब रिपोर्ट मिल सकी तब तक उनकी हालत बहुत बिगड़ चुकी थी। उन्हें मेडिकल कॉलेज में दाखिल किया गया लेकिन दूसरे दिन उनके प्राण पखेरू उड़ गए।