राहुल गांधी ने कहा कि FIR हो या विशेषाधिकार प्रस्ताव, वे नहीं डरेंगे और किसानों के लिए लड़ाई जारी रखेंगे। बयान के बाद सियासी टकराव और तेज़ होगा?
कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को साफ़ कहा कि वह किसानों के हक के लिए आवाज उठाते रहेंगे, चाहे उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई हो या संसद में प्रिविलेज मोशन लाया जाए। यह बयान तब आया जब संसद में उनके हालिया भाषण पर विवाद बढ़ गया और प्रिविलेज मोशन की खबरें आईं। हालाँकि, सरकार गुरुवार को प्रिविलेज मोशन पर पीछे हट गई और इसने राहुल की संसद सदस्यता ख़त्म करने के लिए नोटिस दाखिल किया है।
इसी बीच, राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो संदेश जारी किया। इसमें उन्होंने कहा, 'एफआईआर दर्ज हो, केस दर्ज हो या प्रिविलेज मोशन लाया जाए- मैं किसानों के लिए लड़ूंगा। कोई भी व्यापार समझौता जो किसानों की आजीविका छीन ले या देश की खाद्य सुरक्षा को कमजोर करे, वह किसान विरोधी है। हम मोदी सरकार को अन्नदाताओं के हितों से समझौता नहीं करने देंगे।'
यह विवाद संसद के बजट सत्र के दौरान राहुल गांधी के भाषण से शुरू हुआ। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कुछ मंत्रियों पर गंभीर आरोप लगाए, जिसमें एपस्टीन फाइल्स का जिक्र था। साथ ही, भारत-अमेरिका के हालिया व्यापार समझौते पर भी हमला किया। विपक्ष का कहना है कि यह समझौता किसानों के खिलाफ है और देश की खाद्य सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। उनके इस बयान के बाद बीजेपी ने कहा था कि वह राहुल के ख़िलाफ़ प्रिविलेज मोशन लाएगी।
रिजिजू ने एक दिन पहले क्या कहा था?
केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने बुधवार को संसद में और संसद के बाहर कहा था कि बीजेपी राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाएगी। लेकिन गुरुवार को बीजेपी ने सिर्फ लोकसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग की। समझा जाता है कि विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव रखे जाने पर बीजेपी को अपने सहयोगी दलों से समर्थन की उम्मीद नहीं थी। दूसरा यह कि इस पर संसद में बहस के दौरान सारा ध्यान राहुल गांधी पर जाता। सरकार नहीं चाहती कि राहुल गांधी पर बहस केंद्रित हो।फ़िलहाल, राहुल गांधी के खिलाफ प्रिविलेज मोशन लाने की कोई योजना नहीं है। प्रिविलेज मोशन संसद में किसी सदस्य के विशेषाधिकारों के उल्लंघन पर लाया जाता है। लेकिन बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ एक 'सब्स्टैंटिव मोशन' का नोटिस दिया है। सब्स्टैंटिव मोशन एक औपचारिक प्रस्ताव होता है, जो सदन के सामने किसी खास मुद्दे पर मंजूरी के लिए रखा जाता है।
सब्स्टैंटिव मोशन नोटिस में क्या है?
दुबे ने कहा, 'प्रिविलेज मोशन का कोई नोटिस नहीं है। मैंने एक सब्स्टैंटिव मोशन का नोटिस दिया है, जिसमें बताया है कि वह सोरोस फाउंडेशन, फोर्ड फाउंडेशन और यूएसएआईडी के साथ थाईलैंड, वियतनाम और कंबोडिया जाते हैं और भारत विरोधी ताकतों से साठगांठ करते हैं।'
बहरहाल, राहुल गांधी के बयान ने विपक्ष की मुहिम को और तेज कर दिया है। विपक्षी सांसदों ने संसद के मकर द्वार के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने समझौते की कुछ शर्तों को 'जनविरोधी' बताया और किसानों के साथ एकजुटता दिखाई। किसानों ने इस समझौते के खिलाफ गुरुवार को अखिल भारतीय बंद बुलाया।
इधर, कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में एडजर्नमेंट मोशन का नोटिस दिया। एडजर्नमेंट मोशन से सदन की सूचीबद्ध कार्यवाही को रोककर किसी जरूरी मुद्दे पर चर्चा की मांग की जाती है। तिवारी ने भारत-अमेरिका संयुक्त बयान और व्हाइट हाउस के हालिया कार्यकारी आदेश से उठने वाली गंभीर चिंताओं पर चर्चा की मांग की।
रिजिजू का ट्वीट
इधर, इस विवाद के बीच किरण रिजिजू ने गुरुवार को फिर से आरोप को दोहराया कि संसद में विपक्ष और सरकार के बीच हालिया टकराव के दौरान कांग्रेस सांसदों का एक समूह लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के कक्ष में घुस गया और उन्हें अपशब्द कहे तथा प्रधानमंत्री को धमकी दी।
रिजिजू ने घटना का एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसे उन्होंने अवैध रूप से रिकॉर्ड किए जाने का दावा किया। इससे संसद में जारी व्यवधानों और बाहर चल रही जुबानी जंग के बीच एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
रिजिजू ने एक्स पर लिखा है, 'यह कांग्रेस सांसद द्वारा बनाया गया अवैध वीडियो क्लिप है, जिसमें 20-25 कांग्रेस सांसद माननीय अध्यक्ष के कक्ष में घुस गए, उन्हें अपशब्द कहे और माननीय प्रधानमंत्री को धमकी दी। हमारी पार्टी बहस और चर्चा में विश्वास करती है और सांसदों को शारीरिक रूप से धमकी देने के लिए कभी प्रोत्साहित नहीं करती।'
यह पूरा मामला भारत-अमेरिका के अंतरिम व्यापार समझौते से जुड़ा है, जो हाल ही में हुआ है। विपक्ष का आरोप है कि यह समझौता किसानों की कमर तोड़ देगा और देश की खाद्य सुरक्षा को कमजोर करेगा। राहुल गांधी लगातार किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरते रहे हैं और अब उन्होंने साफ कर दिया है कि वह किसी दबाव में नहीं आएंगे।
विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे पर एकजुट हैं और संसद में आगे की रणनीति बना रही हैं। वहीं, सरकार ने इन आरोपों को राजनीतिक बताया है। आने वाले दिनों में संसद में इस पर और बहस होने की संभावना है।