प्रतीकात्मक तसवीर।
पंजाब में बिहार-उत्तर प्रदेश के फंसे बदहाल मजदूर, जो किसी भी तरह अपने घर-गांव जाना चाहते हैं, वे कोरोना-काल के नए कबूतर हैं और बेईमान-लालची ट्रांसपोर्टर तथा कुछ जालसाज़ लोग कबूतरबाज़ हैं। राज्य पुलिस द्वारा हाल में की गई गिरफ़्तारियों से इस गोरखधंधे का पर्दाफ़ाश हुआ है।
24 अप्रैल को जालंधर की शाहकोट और लोहियां पुलिस ने भी ऐसा ही एक मामला पकड़ा। इस मामले में 4 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। 23 अप्रैल को मंडी गोबिंदगढ़ पुलिस ने प्रवासी मजदूरों से भरा एक ट्रक पकड़ा था। सब जगह मजदूरों से इस नाम पर हजारों रुपए वसूले गए थे कि उन्हें उनके मूल राज्यों की सीमा तक पहुंचा दिया जाएगा।
ट्रक, टेंपो और छोटी-बड़ी मोटर गाड़ियां ही कबूतरबाज़ी में इस्तेमाल नहीं की जा रही हैं बल्कि चिकित्सा जैसे पवित्र पेशे में काम आने वाली एंबुलेंस को भी इस काले कारोबार में कबूतरबाज़ अपना हथियार बना रहे हैं।