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शिवपाल के मंच से मुलायम ने की सपा को जिताने की बात

उत्तर प्रदेश में अपने पहले शक्ति परीक्षण में कुनबे से अलग होकर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी बनाने वाले शिवपाल यादव जहाँ भीड़ जुटाने में सफल रहे, वहीं रैली में मुलायम सिंह यादव की मौजूदगी ने उन्हें एक तरह से बूस्टर डोस दे दी। मुलायम की मौजूदगी से उत्साहित शिवपाल ने आज एक बार फिर कहा कि उन्होंने नई पार्टी नेताजी के कहने पर ही बनाई है।

रैली में मुलायम पहुँचे ज़रूर पर मंच से बार-बार समाजवादी पार्टी का नाम लेते और सपा की सरकार बनाने का आह्वान करते दिखे। राजधानी लखनऊ के रमाबाई आंबेडकर मैदान को भरने की कुव्वत यूँ तो केवल बसपा सुप्रीमो मायावती की मानी जाती रही है पर आज शिवपाल भी मजमा जुटाने में ज़्यादा कमज़ोर नहीं साबित हुए। अखिलेश यादव और सपा से असंतुष्ट क़रीब 50 पूर्व विधायक, विधान परिषद सदस्य और राज्यसभा सांसद आज शिवपाल की रैली में दलबल के साथ नज़र आए।

शिवपाल की रैली पर योगी मेहरबान?

शिवपाल के आज के जमावड़े पर योगी सरकार की विशेष अनुकम्पा नज़र आई। रैली में आ रहे वाहनों के लिए विभिन्न राजमार्गों पर टोल चार्ज नहीं लिया गया तो तमाम अदालती आदेशों व नियमों को दरकिनार कर पूरे लखनऊ में शिवपाल के बैनर, होर्डिंग, झंडे लगने पर नगर निगम ने कोई रोक नहीं लगाई। ज़िला प्रशासन ने किसी सरकारी आयोजन की तरह रैली के लिए ट्रैफ़िक की व्यवस्था सँभाली।

शिवपाल ने मुलायम के कान में क्या कहा

बीते कई मौकों पर बेटे अखिलेश के साथ सभाओं, पार्टी कार्यालयों में मंच साझा करते रहे सपा संस्थापक मुलायम आज अचानक शिवपाल की रैली में पहुँच गए। हालाँकि बेटे अखिलेश की पार्टी सपा के झंडे के रंग का गमछा और सर पर लाल टोपी लगाए मुलायम ने रैली के मंच से अपने संबोधन में भी बार-बार समाजवादी पार्टी का नाम लिया और शिवपाल के कान में कुछ समझाने पर ही ऐसा करने से रुके। ख़ुद नेताजी (मुलायम सिंह यादव) के क़रीबियों का कहना है कि शिवपाल के मंच पर भी वह अपना पुत्रमोह दिखाने में नहीं चूके। उनका कहना है कि रैली मंच से बार-बार समाजवादी पार्टी का नाम लेकर मुलायम ने एक तरह से कार्यकर्त्ताओं को संदेश भी देने की कोशिश की कि उनका दिल कहाँ है। रैली में अपने भाषण के अंत में मुलायम ने कहा, अपने सब प्रत्याशियों को जीता लेना और समाजवादी पार्टी की सरकार बना देना। हालाँकि फिर दुरुस्त करते हुए बोले, आप लोग जिन शिवपाल यादव के लिए आए हैं, उनकी पार्टी प्रगतिशील के लिए बोल रहा हूँ। रैली में मुलायम की छोटी बहू अपर्णा यादव भी पहुँचीं। अपर्णा ने कहा कि 'शेर को चोट नहीं देनी चाहिए। अब शिवपाल चाचा को चोट पहुँचाई गई है तो आगे-आगे देखिएगा, क्या होता है।'

बीजेपी के साथ साँठ-गाँठ? 

शिवपाल यादव ने अपने संबोधन में कहा कि उन्होंने यह रैली इस देश से बीजेपी को हटाने के लिए बुलाई है। रैली में किसान, मज़दूर, अल्पसंख्यक मुसलमान से लेकर युवा-दलित सब मौजूद थे और यह पहला मौक़ा है जब रमाबाई मैदान में दलित, पिछड़े, गरीब, किसान सब इकट्ठा हुए। उन्होंने कहा कि रैली का नाम जन आक्रोश रैली इसलिए रखा था कि देश और प्रदेश में जब से बीजेपी की सरकार बनी है सब दुखी हैं। शिवपाल ने कहा कि बीजेपी की सरकार जब-जब आई है, इन्होंने भाई को भाई से लड़ाने का काम किया और देश को कमज़ोर करने का काम किया। प्रधानमंत्री पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि उनका सीना 56 इंच का होगा लेकिन दम नहीं है। शिवपाल बोले कि उनके साथ छोटे-छोटे 44 दल हैं और नेताजी साथ हैं जिनके साथ 40 साल उन्होंने काम किया है।नेताजी की इजाज़त से पार्टी बनाई: शिवपाल

अलग पार्टी बनाने के सवाल पर शिवपाल ने कहा कि वे हमेशा नेताजी के साथ और समाजवादी पार्टी के साथ रहना चाहते थे। उन्होंने कहा कि मैंने कभी कोई पद नहीं माँगा, सीएम-मंत्री का पद भी नहीं माँगा और नेताजी का आदेश हमेशा माना। उन्होंने आगे कहा कि पार्टी की रजत जयन्ती पर हमने केवल सम्मान माँगा था। इसके अलावा कुछ नहीं मांगा था। पार्टी न टूटे, इसके लिए हमने भी प्रयास किया और नेताजी ने भी प्रयास किया। शिवपाल ने कहा कि चुगलखोरों की वजह से जिनके पास कोई जनाधार नहीं था, यह सब हुआ।

मंच पर ही मुलायम से मुख़ातिब होकर शिवपाल ने कहा कि हमने आपकी इजाज़त से पार्टी बनाई, भगवती सिंह, राम नरेश, राम सेवक यादव बैठे हैं सबके सामने आपने इजाज़त दी थी। उन्होंने कहा, 'बार-बार पूछा, तब पार्टी बनाई है।'
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