शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मामले में नया मोड़ आ गया है। शाहजहांपुर के पत्रकार रमाकांत दीक्षित का दावा है कि आशुतोष ब्रह्मचारी ने उन पर अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ बच्चों के यौन शोषण के झूठे आरोप लगाने के लिए रिश्वत देने की कोशिश की थी।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
उत्तर प्रदेश में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर लगे कथित बाल यौन शोषण के मामले में एक बहुत बड़ा खुलासा हुआ है। शाहजहांपुर में रहने वाले रमाकांत दीक्षित नाम के पत्रकार ने साजिश से पर्दा उठाया है। उनका दावा है कि आशुतोष ब्रह्मचारी ने मुझे भी फोन कर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर यौन शोषण का आरोप लगाने के उकसाया था। इसके बदले खूब सारे पैसे देने का भी लालच दिया था। आशुतोष ब्रह्मचारी वही शख्स है, जिसने शंकराचार्य के खिलाफ प्रयागराज में यौन शोषण की शिकायत पुलिस में की थी। बाद में स्थानीय अदालत ने शंकराचार्य के खिलाफ एफआईआर का आदेश दिया। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के बीच बुरी तरह ठनी हुई है। ताजा घटनाक्रम उसी का नतीजा माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शंकराचार्य की तनातनी बढ़ने के बाद घटनाक्रम तेज हुआ। प्रयागराज की एक पॉक्सो अदालत ने Swami Avimukteshwaranand Saraswati और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ आशुतोष ब्रहम्चारी की शिकायत पर FIR दर्ज करने का आदेश दिया। अविमुक्तेश्वरानंद पर अपने आश्रम में नाबालिग बच्चों के यौन शोषण का आरोप लगा। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया है कि जांच निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से की जाए और पीड़ित बच्चों की पहचान व सम्मान की पूरी सुरक्षा की जाए।
पत्रकार रमाकांत दीक्षित ने क्या कहा
इसी मामले पर पत्रकार रमाकांत दीक्षित ने कहा कि 18 फरवरी को वे अपने घर पर थे । तीन लोग उनके पास आए और उन्होंने उन्हें अपने ही फोन से आशुतोष से बात करवाई, जिसने शंकराचार्य के खिलाफ शिकायत की है। उन लोगों ने कहा, “स्वामीजी को थोड़ा सबक सिखाना पड़ेगा” और शंकराचार्य पर आरोप लगवाने की बात करने लगे। इस पर दीक्षित ने कहा, “आप मेरी बेटियों के बारे में ऐसी बातें कैसे कह सकते हो? मैं शंकराचार्य जी से मिल चुका हूं और मैंने उनके खिलाफ कोई शिकायत नहीं की है।” दीक्षित ने बताया कि इस पर आशुतोष ने उन्हें धमकी दी, कहा कि अगर तुम हमारा साथ नही दोगे तो हमारे पास तमाम रास्ते हैं। दीक्षित ने यह सारी बात स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को सादे कागज पर लिखकर अपना हस्ताक्षर करके दी।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस पूरे घटनाक्रम को अपने खिलाफ रचा जा रहा बहुत बड़ा षड्यंत्र बताया. उनका कहना है कि उन्हें बदनाम करने और कानूनी जाल में फंसाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, अब यह स्पष्ट हो रहा है कि लोगों को प्रलोभन देकर मेरे खिलाफ खड़ा करने का प्रयास चल रहा है। शंकराचार्य ने यह भी दावा किया कि गौहत्या जैसे मुद्दों पर उनकी मुखर आवाज के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो परिवार शाहजहांपुर से आया है, उसे खतरा हो सकता है और इसके लिए प्रार्थना की जाएगी।
इस मामले पर अभी तक आशुतोष ब्रह्मचारी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन रमाकांत का बयान हर तरफ वायरल हो रहा है। इस खुलासे पर कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत का कहना है कि अब तो ये साफ़ है, शंकराचार्य के ख़िलाफ़ बड़ी साजिश रची गई है । उन्होंने पूछा कि हिंदुओं का खून नहीं खौल रहा? सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में पोस्ट करते हुए एक्स पर लिखा कि भाजपा हटाओ…सनातन बचाओ ।
इस बीच, ज्योतिरमठ शंकराचार्य की ओर से पैरवी कर रहे वकील श्रीनाथ त्रिपाठी ने कहा कि एफआईआर और कोर्ट के आदेश में किसी भी तरह के सबूत का ज़िक्र नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस पहले सबूत जुटाएगी और उसके बाद ही गिरफ्तारी पर विचार करेगी। त्रिपाठी ने कहा, हम निचली अदालत, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई के लिए तैयार हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि गिरफ्तारी करनी है या नहीं, यह फैसला पुलिस पर निर्भर करता है। और अगर वे गिरफ्तारी करते हैं तो यह उनके लिए आग से खेलने जैसा होगा। बहरहाल इस पूरे मामले की जांच अभी जारी है।
क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नाराज़गी है वजह
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच पिछले कुछ महीनों में तीखा विवाद चल रहा है। यह विवाद जनवरी 2026 में माघ मेले के दौरान शुरू हुआ, जब माघ मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मौनी अमावस्या पर पालकी में संगम स्नान करने से रोका था। उन्होंने इसे अपमान बताया और विरोध प्रदर्शन किया। शंकराचार्य ने कुंभ मेले में हुई मौतों और अव्यवस्था का मामला लगातार उठाया था।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में विधानसभा में बयान देते हुए कहा कि "हर कोई खुद को शंकराचार्य नहीं कह सकता" और किसी भी व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता। उन्होंने शंकराचार्य पद की परंपरा का हवाला दिया और कहा कि यह आदिशंकराचार्य द्वारा स्थापित चार पीठों की पवित्र परंपरा है। योगी ने भीड़ प्रबंधन और स्टांपेड जैसी स्थिति से बचाव का मुद्दा उठाया।
यह विवाद और गहरा गया जब एक अयोध्या के एक अधिकारी ने स्वामी पर योगी का अपमान करने का आरोप लगाकर इस्तीफा दे दिया। स्वामी ने योगी सरकार पर हमले तेज किए, जबकि योगी ने कानून के समानता और धार्मिक मर्यादा पर जोर दिया। हालांकि उस अधिकारी ने अपना इस्तीफा बाद में वापस ले लिया। वो अधिकारी खुद करप्शन के आरोपों में घिरा हुआ है।
यह नया POCSO मामला स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के लिए एक और बड़ा झटका है, जबकि जांच अब शुरू होगी। पुलिस ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। लखनऊ में गतिविधियां तेज हैं। सनातन धर्म समर्थक संगठन योगी और शंकराचार्य के इस विवाद को हिन्दुत्व के लिए खतरा बता रहे हैं। एक चर्चा यह भी है कि योगी के खिलाफ अभियान छेड़ने के लिए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को दिल्ली के दिग्गज शीर्ष नेताओं का समर्थन मिला हुआ है।