बीजेपी के अंदर नई यूजीसी नियमावली को लेकर असंतोष और इस्तीफों का सिलसिला जारी है। यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) द्वारा जारी 'यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस) रेगुलेशंस, 2026' को लेकर ऊपरी जातियों में भारी गुस्सा है। कई बीजेपी नेता और कार्यकर्ता इसे 'एकतरफा' और 'रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन' को बढ़ावा देने वाला बता रहे हैं। दूसरी तरफ इसी मुद्दे पर इस्तीफा देने वाले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट (CM) अलंकार अग्निहोत्री को यूपी सरकार ने निलंबित कर दिया है। अलंकार ने सरकारी आवास खाली कर दिया है।

दरअसल, यूजीसी के इन नए नियमों के तहत सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को परिभाषित किया गया है और इसे खत्म करने के लिए इक्विटी कमेटियां गठित करने का प्रावधान है। लेकिन इन कमेटियों में केवल आरक्षित वर्गों (एससी, एसटी, ओबीसी) के प्रतिनिधित्व की बात कही गई है, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों-कर्मचारियों के लिए कोई पर्याप्त सुरक्षा या संतुलन का इंतजाम नहीं है। आलोचकों का कहना है कि इससे फर्जी शिकायतों का खतरा बढ़ सकता है और सामान्य वर्ग के छात्र असुरक्षित हो जाएंगे।

बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने इसे पार्टी के लिए राजनीतिक आत्मघाती कदम करार दिया है। उत्तर प्रदेश के एक सीनियर नेता ने कहा, "सरकार पहले से ही सवर्णों के खिलाफ कई फैसले ले चुकी है, अब यह हमारे बच्चों की पीढ़ी पर असर डालेगा। जब आरक्षण की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं, ऐसे नियम लाना पूरी तरह अस्वीकार्य है।"

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लखनऊ बीजेपी में बग़ावत

राजधानी लखनऊ के बख्शी का तालाब क्षेत्र स्थित कुम्हारवां मंडल के महामंत्री अंकित तिवारी ने इन नियमों के खिलाफ अपना इस्तीफा दे दिया है। तिवारी ने कहा कि ये नियम सवर्ण समुदाय के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। उन्होंने अपने सभी पार्टी पदों से इस्तीफा देते हुए घोषणा की कि पार्टी अब पंडित दीन दयाल उपाध्याय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा निर्धारित मूल उद्देश्यों से भटक रही है।अपने इस्तीफा पत्र में अंकित तिवारी ने लिखा, "मैं अपने सभी पदों से इस्तीफा दे रहा हूं क्योंकि पार्टी हमारे प्रेरणास्रोत पंडित दीन दयाल उपाध्याय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा निर्धारित मूल उद्देश्यों से भटक गई है। ये यूजीसी नियम वरिष्ठ नेतृत्व द्वारा हमारे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए मैं अपना इस्तीफा सौंप रहा हूं।"
अंकित तिवारी के साथ कुम्हारवां मंडल के अन्य कई पदाधिकारियों ने भी सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देने वालों की सूची में शामिल हैं- आलोक सिंह (मंडल उपाध्यक्ष), महावीर सिंह (मंडल सचिव), मोहित मिश्रा (शक्ति केंद्र समन्वयक), वेद प्रकाश सिंह (शक्ति केंद्र समन्वयक), नीरज पांडे (शक्ति केंद्र समन्वयक), अनूप सिंह (युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष), राज विक्रम सिंह (युवा मोर्चा मंडल महामंत्री), अभिषेक अवस्थी (पूर्व मंडल सचिव), विवेक सिंह (बूथ अध्यक्ष) और कमल सिंह (पूर्व सेक्टर समन्वयक)। 
बीजेपी के स्थानीय स्तर पर ये इस्तीफे पार्टी के लिए चुनौती बन रहे हैं, खासकर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी के बीच। कई नेता चेतावनी दे रहे हैं कि यदि नियम वापस नहीं लिए गए तो सवर्ण वोट बैंक पर असर पड़ सकता है। यह विवाद तेजी से राजनीतिक रंग ले रहा है और पार्टी के अंदरूनी असंतोष को उजागर कर रहा है।

एक अन्य बीजेपी नेता ने चेतावनी दी, "2024 लोकसभा चुनाव में पार्टी का आंकड़ा 240 पर सिमट गया, जिसे एससी-एसटी समुदायों के समर्थन न मिलने से जोड़ा गया। अगर ये नियम वापस नहीं लिए गए तो पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।"

उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा, "ये नियम सामान्य वर्ग के दमन का हथियार बन जाएंगे। यूजीसी का उद्देश्य दलित-पीछड़े छात्रों का उत्पीड़न रोकना होना चाहिए, न कि सामान्य वर्ग के छात्रों को असुरक्षित बनाना।"

वहीं कांग्रेस नेता जीतेन्द्र सिंह अलवर और शिवसेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी ने भी नियमों की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि ये नियम छात्रों में विभाजन पैदा करेंगे और सभी के लिए समान सुरक्षा का प्रावधान क्यों नहीं है।

प्रतिरोध तेज होते हुए बीजेपी के कुछ स्थानीय नेताओं ने पदों से इस्तीफा दे दिया है। रायबरेली के सलून में बीजेपी किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष श्याम सुंदर त्रिपाठी और बलरामपुर के मृगेन्द्र उपाध्याय ने 25 जनवरी 2026 को इस्तीफा दिया। राजपूत संगठन करणी सेना ने नियम वापस न लेने पर बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन की धमकी दी है।

यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की शुरुआत में होने हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर नियम वापस नहीं लिए गए तो इससे जातिगत तनाव बढ़ सकता है और बीजेपी की ऊपरी जाति आधारित वोट बैंक पर असर पड़ सकता है।

बरेली के सिटी मैजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा

अलंकार अग्निहोत्री को यूपी सरकार ने निलंबित किया, घर खाली कराया

2019 बैच के पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने 26 जनवरी 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट बरेली के पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के कुछ घंटों बाद ही यूपी सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया और विभागीय जांच के आदेश जारी किए। सरकार ने उन्हें प्रथम दृष्टया (प्राइमा फेस) दोषी मानते हुए यह कार्रवाई की है।अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा ईमेल के जरिए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, बरेली जिला मजिस्ट्रेट अविनाश सिंह तथा मुख्य सचिव को भेजा था। उन्होंने इस्तीफे का मुख्य कारण सरकारी नीतियों से गहरा वैचारिक मतभेद और संवैधानिक मूल्यों का क्षरण बताया। विशेष रूप से उन्होंने दो मुद्दों पर जोर दिया:


  • नए यूजीसी नियम (Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026): इन्हें उन्होंने "काला कानून" करार दिया। उनका आरोप है कि ये नियम सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के छात्रों को झूठी शिकायतों के जरिए परेशान करेंगे और भेदभाव को बढ़ावा देंगे। उन्होंने इसे उच्च शिक्षा में विभाजनकारी बताया।
  • माघ मेला विवाद: प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के दौरान ज्योतिर मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों और बुजुर्ग संतों के साथ कथित मारपीट और अपमान का जिक्र किया। उन्होंने इसे ब्राह्मणों के खिलाफ "एंटी-ब्राह्मण अभियान" का हिस्सा बताया और सवाल उठाया कि क्या सरकार ब्राह्मणों का नरसंहार चाहती है?

ब्राह्मणों से अपीलः अग्निहोत्री ने ब्राह्मण सांसदों-विधायकों से इस्तीफा देने की अपील की और कहा कि वे चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने संकेत दिया कि ब्राह्मणों और सामान्य वर्ग के लिए वैकल्पिक राजनीतिक मंच बनाने की जरूरत है।
बंधक बनाने का आरोपः इस्तीफे के बाद उन्होंने आरोप लगाया कि जिला मजिस्ट्रेट अविनाश सिंह के आवास पर मीटिंग के दौरान उन्हें 45 मिनट तक बंधक बनाए रखा गया, अपशब्द कहे गए और रातभर कैद रखने की कोशिश की गई।

सरकार की प्रतिक्रिया और कार्रवाई

जिला मजिस्ट्रेट अविनाश सिंह ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने कहा कि मीटिंग में एडीएम, एसडीएम, पुलिस और खुफिया अधिकारी मौजूद थे, कोई बंधक बनाने या दुर्व्यवहार की घटना नहीं हुई।
  • यूपी सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुएअलंकार अग्निहोत्री को निलंबित किया। उत्तर प्रदेश सरकार सेवक (अनुशासन और अपील) नियम, 1999 की धारा 4 और 7 के तहत प्रथम दृष्टया दोषी पाया। बरेली मंडल आयुक्त को जांच अधिकारी नियुक्त किया। जांच पूरी होने तक उन्हें शामली जिले के जिलाधिकारी कार्यालय से अटैच किया गया। विभागीय जांच के बाद चार्जशीट जारी की जाएगी।

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यह घटना प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि एक सेवा-रत अधिकारी का इस तरह सार्वजनिक विरोध और इस्तीफा असामान्य है। अलंकार अग्निहोत्री कानपुर नगर निवासी हैं, बीएचयू से बी.टेक और एलएलबी हैं, अमेरिका में काम कर चुके हैं और उन्नाव, बलरामपुर, लखनऊ में एसडीएम रह चुके हैं। वे सख्त प्रशासनिक शैली के लिए जाने जाते थे।