लखनऊ में एक 21 वर्षीय युवक ने कथित तौर पर अपने पिता की हत्या कर दी, उनके शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए और उन्हें एक नीले ड्रम में भर दिया। इस घटना को उसकी बहन ने अपनी आंखों से देखा। यह घटना शुक्रवार, 20 फरवरी को हुई थी लेकिन इसका भेद तीन दिन बाद खुला। पुलिस का कहना है कि यह घटना पिता द्वारा अपने बेटे को मेडिकल प्रवेश परीक्षा (एनईटी) देने के लिए कहने पर हुए विवाद के बाद हुई। यह घटना सोशल मीडिया पर बहस के केंद्र में है। लोग दो तरह के तर्क दे रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि पैरंट्स अपने बच्चों पर जबरन उनके हिसाब से करियर अपनाने का दबाव क्यों बनाते हैं। दूसरा तर्क यह है कि आज का युवक हताश है। वो करियर के संबंध में सही फैसले नहीं ले पा रहा, जब पैरंट्स टोकते हैं तो वो गुस्से में कुछ भी कर बैठता है। इसके लिए आसानी से पैसे कमाने के तरीकों को भी जिम्मेदार बताया जा रहा है, जिसमें रील बनाना और दिनभर मोबाइल में व्यस्त रहना शामिल है। 
लखनऊ के सेंट्रल पुलिस उपायुक्त विक्रांत वीर ने बताया कि आरोपी की पहचान अक्षत के रूप में हुई है, जो बी.कॉम का छात्र है और वह अपने पिता की NEET परीक्षा देने की इच्छा से असहमत था। इसी बात को लेकर हुए विवाद के चलते यह जघन्य अपराध हुआ।

मेरठ का ‘नीला ड्रम’ हत्याकांड का असर

पुलिस के अनुसार, लखनऊ में हुई इस जघन्य हत्या की घटना मार्च 2025 में मेरठ में हुई ‘नीले ड्रम’ हत्याकांड से प्रेरित थी। मेरठ हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला ने मुस्कान के पति सौरभ राजपूत, जो 29 वर्षीय मर्चेंट नेवी अधिकारी थे, की हत्या कर दी और उनके शरीर के 15 टुकड़े कर दिए, फिर उन्हें एक बड़े नीले ड्रम में भर दिया। इसके बाद ड्रम को सीमेंट से सील कर दिया गया ताकि बदबू को छिपाया जा सके और अपराध तथा शव का पता लगने में देरी हो।
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लखनऊ पुलिस सूत्रों ने बताया कि आरोपी ने सोशल मीडिया पर मेरठ के नीले ड्रम कांड के बारे में पढ़ा था और बार-बार होने वाले झगड़ों के चलते करीब एक साल से अपने पिता मनवेंद्र की हत्या की योजना बना रहा था। यह घटना लखनऊ के पॉश आशियाना इलाके में आरोपी के तीन मंजिला पारिवारिक घर में घटी। लेकिन घटना समाज के सामने तमाम सवाल खड़े कर दिए हैं।

पिता की राइफल छीनकर बहन के सामने गोली मारी

आरोपी ने अपने पिता की लाइसेंसी राइफल का इस्तेमाल अपराध को अंजाम देने के लिए किया। पुलिस के बयान के अनुसार, तीखी बहस के बाद अक्षत ने अपने पिता की राइफल छीन ली और उन पर गोली चला दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। अक्षत ने अपने पिता की हत्या अपनी 11वीं कक्षा की छात्रा बहन के सामने की और कथित तौर पर उसे धमकी भी दी कि अगर उसने इस घटना के बारे में किसी को बताया तो वह उसे जान से मार देगा। डीसीपी ने कहा, "बहन ने पूरी घटना देखी लेकिन उसे डरा-धमकाकर चुप करा दिया गया।"

आरोपी ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश कैसे की

आरोपी के पिता, जो एक पैथोलॉजी लैब के मालिक थे और शराब के कारोबार में भी शामिल थे, को आखिरी बार 20 फरवरी की सुबह, यानी अपराध वाले दिन, जीवित देखा गया था। पुलिस को गुमराह करने के प्रयास में, अक्षत ने पुलिस को बताया कि उसके पिता ने उसे सुबह 6 बजे जगाया था और कहा था कि वे दिल्ली जा रहे हैं और दोपहर तक वापस आ जाएंगे। हालांकि, मानवेंद्र के तीनों फोन नंबर बंद मिलने के बाद परिवार चिंतित हो गया। पुलिस ने बताया कि हत्या 20 फरवरी की सुबह करीब 4:30 बजे हुई। फोरेंसिक टीमें सबूत जुटा रही हैं।
आशियाना एसएचओ क्षत्रपाल ने बताया कि बाद में आरोपी अपने पिता के शव को तीसरी मंजिल से नीचे एक खाली कमरे में घसीटकर ले गया और उसके टुकड़े-टुकड़े कर दिए। एसएचओ ने बताया, "उसने कुछ हिस्सों को अपनी कार में लादा और सदराउना नामक एक सुनसान इलाके में ले जाकर फेंक दिया।" डीसीपी ने बताया कि उन्हें उसी कमरे में एक नीले ड्रम में मानवेंद्र का सिर और धड़ भरा हुआ मिला, जिसे आरोपी बाद में ठिकाने लगाने की योजना बना रहा था। डीसीपी ने कहा, "वह धड़ को ठिकाने लगाने की कोशिश कर रहा था, तभी हमने हस्तक्षेप किया।"

पुलिस द्वारा पकड़े जाने के बाद भी आरोपी झूठ बोलता रहा और पहले दावा किया कि उसके पिता ने आत्महत्या की थी, लेकिन अंत में उसने हत्या की बात कबूल कर ली। आरोपी को सोमवार को गिरफ्तार कर लिया गया।
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पुलिस ने इस मामले को फौरन ही सुलझा लिया लेकिन समाज के सामने बड़ा सवाल छोड़ दिया है कि क्या ऐसी हत्याएं आने वाले समय में और बढ़ सकती हैं। देश में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी है, युवकों के पास रोजगार के अवसर नहीं हैं, वे अपने लिए सही करियर का चुनाव नहीं कर पा रहे हैं, क्या पैरंट्स को बच्चों पर करियर संबंधी दबाव बनाना चाहिए। इस मामले में यह भी तथ्य है कि परिवार के पास पैसे की कमी नहीं थी, बिजनेस था। लेकिन इसके बावजूद इस तरह की कलह में हत्या कर दी गई।