लखनऊ यूनिवर्सिटी ने लाल बारादरी मस्जिद में नमाज अदा करने और विरोध प्रदर्शन करने के लिए 13 छात्रों (10 हिंदू और 3 मुस्लिम) को नोटिस जारी किया है। बारादरी में नमाज़ पढ़ने का दक्षिणपंथी संगठन विरोध कर रहे थे लेकिन कुछ हिंदू छात्र मुस्लिम छात्रों की ढाल बन गए।
लखनऊ की लाल बारादरी में नमाज़ पढ़ने वालों की सुरक्षा में खड़े हिन्दू छात्र
लखनऊ विश्वविद्यालय के लाल बारादरी परिसर में नमाज पढ़ने के मामले में प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। विश्वविद्यालय के 13 छात्रों को नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के छात्र शामिल हैं। हसनगंज पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर कार्यपालक मजिस्ट्रेट (लखनऊ कमिश्नरेट) ने इन छात्रों को एक साल तक शांति बनाए रखने के लिए पाबंद रखने का निर्देश दिया है। इस बीच यूनिवर्सिटी गेट पर हनुमान चालीसा पढ़ने और नारे लगाने वालों पर प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की है। हनुमान चालीसा पढ़ने वाले लाल बारादरी में नमाज़ पढ़ने का विरोध कर रहे थे।
13 छात्रों को नोटिस में कौन कौन हैं
जिन छात्रों पर कार्रवाई हुई है, उनमें हर छात्र को 50,000 रुपये का व्यक्तिगत मुचलका (पर्सनल बॉन्ड) और दो जमानतदारों से 50,000-50,000 रुपये के मुचलके जमा कराने होंगे। यदि वे ऐसा नहीं करते, तो उन्हें अदालत में पेश होकर कारण बताना होगा कि उन्हें क्यों न एक साल के लिए शांति भंग न करने के लिए पाबंद किया जाए। नोटिस प्राप्त करने वाले छात्रों के नाम इस प्रकार हैं:
प्रिंस प्रकाश (हिंदू), अहमद रजा (मुस्लिम), शुभम खरवार (हिंदू), तौकीर गाजी (मुस्लिम), नवनीत यादव (हिंदू), प्रेम प्रकाश यादव (हिंदू),
शिवाजी यादव (हिंदू), प्रसन्ना शुक्ला (हिंदू), प्रिंस कुमार (हिंदू), अक्षय कुमार वर्मा (हिंदू), अभिषेक श्रीवास्तव (हिंदू), कांची सिंह (हिंदू)
और मो. अयाज हसन (मुस्लिम)
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों ने लाल बारादरी के पास नमाज अदा की, नारे लगाए, कैंटीन क्षेत्र के निकट विरोध प्रदर्शन किया और निर्माण कार्य को रोकने की कोशिश की। अधिकारियों का कहना है कि इन गतिविधियों से कैंपस में तनाव पैदा हुआ और सार्वजनिक
शांति तथा सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ने की आशंका थी।
पुलिस ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की
मुस्लिम छात्रों द्वारा नमाज़ पढ़ने के बाद बजरंग दल ने विश्वविद्यालय के लाल बारादरी वाले हिस्से को गंगाजल से शुद्ध किया। इस दौरान पुलिस मौजूद थी, उसने इन असामाजिक तत्वों को रोकने की कोशिश की, लेकिन उसे बहुत कामयाबी नहीं मिली। जबकि नमाज़ पढ़ने वाले और उनकी सुरक्षा के लिए खड़े हुए हिन्दू छात्रों को नोटिस दिया गया। पुलिस ने इन लोगों की उत्तेजक नारेबाजी और गुंडागर्दी का कोई संज्ञान नहीं लिया।
अजीबोगरीब तर्कः 'नमाज़ और इफ़्तार से शांति भंग'
लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र अहमद रज़ा ने बताया कि "हमें जारी किए गए नोटिस में लिखा है कि हमारी नमाज़ और इफ़्तार के आयोजन से शांति भंग हुई। कुछ लोग हिंसक हो गए। हम इसका बचाव नहीं कर रहे हैं। गड़बड़ी का मुख्य कारण यह है कि मुसलमानों ने नमाज़ पढ़ी और हिंदुओं ने उनकी रक्षा की... हिंदुओं और मुसलमानों समेत 13 लोगों को शांति भंग करने के आरोप में नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि ऐसा कोई उल्लंघन नहीं हुआ था। हमने कोई आपत्तिजनक नारे नहीं लगाए। हमने ऐसे नारे नहीं लगाए जिनसे शांति भंग हो। इसके विपरीत, जब भाजपा के लोग वहां खड़े थे, तो उन्होंने धार्मिक नारे लगाकर शांति भंग करने की कोशिश की; उन्होंने आपत्तिजनक नारे लगाए, लेकिन उनके खिलाफ कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है...।"
रमज़ान के दौरान नमाज़ पर रोक लगाई गई
यह मामला रविवार से शुरू हुआ, जब लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऐतिहासिक लाल बारादरी (एक मुगल कालीन इमारत, जो ASI संरक्षित है) के गेट को सील कर दिया और बैरिकेडिंग लगा दी। छात्रों का आरोप है कि यह कार्रवाई रमज़ान के दौरान बिना पूर्व सूचना के की गई, ताकि मुस्लिम छात्र मस्जिद में नमाज न पढ़ सकें। विरोध में NSUI, समाजवादी छात्र सभा (SCS) और AISA जैसे छात्र संगठनों के सदस्यों (ज्यादातर हिंदू) ने मानव श्रृंखला बनाकर मुस्लिम छात्रों को नमाज पढ़ने में सुरक्षा प्रदान की, जिसकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई और इसे 'गंगा-जमुनी तहजीब' का प्रतीक बताया गया।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने रजिस्ट्रार को ज्ञापन सौंपा, लेकिन बाद में पुलिस ने नोटिस जारी कर दिए। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इमारत जीर्ण-शीर्ण होने और सुरक्षा कारणों से बंद की गई है, जबकि छात्र इसे धार्मिक स्वतंत्रता और कैंपस अधिकारों पर हमला बता रहे हैं।
यह घटना धार्मिक स्वतंत्रता, विश्वविद्यालय परिसर में धार्मिक गतिविधियों और कार्रवाई पर बहस छेड़ रही है। छात्रों ने कहा है कि वे नोटिस का जवाब देंगे और यदि गेट नहीं खोले गए तो आंदोलन तेज करेंगे।
लाल बारादरी का निर्माण नवाब गाज़ी-उद-दीन हैदर ने 1814 में शुरू करवाया था और उनके बेटे नवाब नसीर-उद-दीन हैदर ने 1820 में इसे पूरा करवाया था। बादशाह बाग में लाखौरी ईंटों से बनी इस 12 दरवाजों वाली इमारत में शाही परिवार आराम करता था और इसके अंदर एक मस्जिद भी थी। मध्यकालीन और आधुनिक इतिहास विभाग के पूर्व प्रमुख प्रोफेसर अरूप चक्रवर्ती ने बताया कि इमारत का एक हिस्सा 2021 में ढह गया था।
नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के सदस्य प्रिंस प्रकाश ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए कहा, "अगर वे लाल बारादरी परिसर को बंद करना चाहते हैं, तो उन्हें नमाज़ के लिए कोई और जगह तय करनी चाहिए।" समाजवादी छात्र सभा के छात्र तौकील गाज़ी ने विश्वविद्यालय के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि लाल बारादरी को जीर्ण-शीर्ण के तर्क का समर्थन करने वाली कोई सर्वेक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।