यूपी SIR में बीजेपी और समाजवादी पार्टी के गढ़ों में मतदाता सूची से नाम कटौती के आँकड़े चौंकाने वाले हैं! पीएम मोदी की वाराणसी जैसे बीजेपी के गढ़ में, समाजवादी पार्टी के गढ़ की तुलना में ज़्यादा वोट कटे हैं। गढ़ किसी का भी हो, असल सवाल है कि किनके वोट काटे गए- बीजेपी समर्थकों या फिर सपा समर्थकों के? कम से कम विपक्ष तो लगातार आरोप लगाता रहा है कि विपक्षी दलों के समर्थकों के वोट काटे जा रहे हैं। उनका कहना है कि दलित, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों के वोट ज़्यादा काटे गए हैं। तो यूपी में बीजेपी और सपा के गढ़ों की वास्तविक स्थिति क्या है?
इन सवालों के जवाब बीजेपी और समजवादी पार्टी ने भी दिया है, लेकिन इनको जानने से पहले पूरे आँकड़ों को समझ लें कि कहाँ कितने वोट कटे हैं। दरअसल, विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बाद जारी फाइनल वोटर लिस्ट ने उत्तर प्रदेश की सियासत में एक अनोखा कंट्रास्ट खड़ा कर दिया है। बीजेपी के पांच सबसे हाई-प्रोफाइल गढ़ों में औसतन 15.28% वोटर घट गए, जबकि सपा के यादव परिवार की पांच सीटों पर यह गिरावट सिर्फ 12.06% रही। लखनऊ तो पूरे राज्य में टॉप पर रहा, जहां 28.73% वोटरों के नाम कट गए, लेकिन योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर में गिरावट सबसे कम रही। एक तरफ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाराणसी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की लखनऊ सीट जैसे बीजेपी के मज़बूत क़िलों में वोटरों की संख्या में भारी गिरावट हुई है तो दूसरी तरफ़ अखिलेश यादव की कन्नौज और डिंपल यादव की मैनपुरी जैसी सपा की यादव-मुस्लिम वाली पारंपरिक पॉकेट्स में अपेक्षाकृत कम नाम कटे हैं।
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यूपी में वोटरों के नाम काटे जाने को लेकर द इंडियन एक्सप्रेस ने आँकड़ों का विश्लेषण किया है। रिपोर्ट के अनुसार बीजेपी की पांच प्रमुख लोकसभा सीटों- वाराणसी, लखनऊ, महाराजगंज, गोरखपुर और बांसगांव में वोटरों की औसत गिरावट 15.28 प्रतिशत रही। वहीं सपा की पांच यादव परिवार की सीटों- कन्नौज, मैनपुरी, आजमगढ़, फिरोजाबाद और बदायूं में औसत गिरावट 12.06 प्रतिशत रही। कांग्रेस की दो सीटों- रायबरेली और अमेठी में औसत गिरावट 12.1 प्रतिशत रही।

प्रधानमंत्री की वाराणसी सीट पर क्या हुआ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाराणसी लोकसभा सीट के पांच विधानसभा क्षेत्रों में औसत गिरावट 15.63 प्रतिशत रही। इसमें वाराणसी कैंटोनमेंट विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा 19.87 प्रतिशत वोटर घटे। 2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को यहां 58,277 वोटों की बड़ी लीड थी। बीजेपी नेता ने कहा कि यह शहरी क्षेत्र है, जहां प्रवासी वोटर ज्यादा थे। SIR के दौरान कई लोगों ने अपना नाम गांव की लिस्ट में शिफ्ट करा लिया। असली असर बूथ-वार लिस्ट के विश्लेषण के बाद पता चलेगा।

लखनऊ में सबसे ज़्यादा गिरावट

अंग्रेज़ी अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की लखनऊ लोकसभा सीट पर पांच विधानसभा क्षेत्रों में औसत गिरावट 28.73 प्रतिशत रही। इसमें लखनऊ कैंटोनमेंट क्षेत्र में 34.18 प्रतिशत गिरावट हुई, जो पूरे राज्य में सबसे ज़्यादा है। यहाँ उप-मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक बीजेपी विधायक हैं।

लखनऊ बीजेपी का मज़बूत गढ़ माना जाता है, जहां ऊँची जाति और शिया मुस्लिम वोटर ज्यादा हैं। बीजेपी ने यहाँ लगातार नौ बार जीत हासिल की है।

अन्य बीजेपी सीटों का हाल

  • बांसगांव (कमलेश पासवान की सीट): औसत गिरावट 12.32 प्रतिशत
  • महाराजगंज (पंकज चौधरी की सीट): 10.04 प्रतिशत की कमी
  • गोरखपुर (मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृह क्षेत्र, फिलहाल रवि किशन सांसद): 9.71 प्रतिशत की गिरावट
  • गोरखपुर में योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर अर्बन क्षेत्र में सबसे कम गिरावट 6.88 प्रतिशत रही

सपा के यादव परिवार की सीटों पर कम प्रभाव

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव कन्नौज से, उनकी पत्नी डिंपल यादव मैनपुरी से, और उनके चचेरे भाई आजमगढ़, फिरोजाबाद और बदायूं से सांसद हैं। इन सीटों पर यादव और मुस्लिम वोटरों की अच्छी संख्या है। इन पांच सीटों में औसत गिरावट 12.06 प्रतिशत रही। बदायूं में सबसे ज्यादा 16.65 प्रतिशत और कन्नौज में 14.47 प्रतिशत गिरावट हुई। कन्नौज के छिबरामऊ विधानसभा क्षेत्र में 20.6 प्रतिशत वोटर घटे। इसे बीजेपी ने 2022 में सिर्फ 1111 वोटों से जीता था। सपा ने 1999 से कन्नौज सीट छह बार जीती है।
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कांग्रेस की रायबरेली और अमेठी

राहुल गांधी की रायबरेली और किशोरी लाल की अमेठी में औसत गिरावट 12.1 प्रतिशत रही। अमेठी में 12.97 प्रतिशत और रायबरेली में 11.24 प्रतिशत। रायबरेली में रायबरेली विधानसभा क्षेत्र में 14.76 प्रतिशत गिरावट हुई।

सपा ने इन नाम कटौती पर क्या कहा?

सपा प्रवक्ता सुधीर पंवार ने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि सपा के गढ़ों में कम नाम कटने से साफ़ है कि मुस्लिम और यादव वोटरों ने नोटिस का जवाब देकर और दस्तावेज जमा करके अपने नाम बचाए। सपा कार्यकर्ता सतर्क रहे और जहां शक हुआ वहां आपत्ति उठाई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अवैध प्रवासियों के लिए डिटेंशन सेंटर बनाने की बात से मुस्लिम वोटरों में घबराहट हुई, इसलिए उन्होंने नाम बचाने की पूरी कोशिश की। सपा अब बूथ-वार विश्लेषण कर रही है। जब कि बीजेपी नेता ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में प्रवासी वोटर ज्यादा हैं, इसलिए गिरावट ज्यादा हुई।

जीत के अंतर से ज़्यादा वोट कटे!

विश्लेषण में देखा गया कि कई हाई-प्रोफाइल लोकसभा क्षेत्रों के विधानसभा सेगमेंट में वोटरों की औसत नेट डिलीशन 2022 विधानसभा चुनाव की जीत के अंतर से ज्यादा है।
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पूरे राज्य में SIR के बाद फाइनल वोटर लिस्ट में कुल वोटरों की संख्या क़रीब 13.39 करोड़ हो गई है। पहले की लिस्ट से 2 करोड़ से ज़्यादा नाम कटे हैं, लेकिन कुछ नए नाम भी जुड़े हैं। लखनऊ, गाजियाबाद आदि जैसे शहरी इलाक़ों में गिरावट ज्यादा देखी गई।

यह विश्लेषण चुनावी नजरिए से महत्वपूर्ण है क्योंकि 2027 के विधानसभा चुनाव में वोटर लिस्ट का बड़ा असर पड़ सकता है। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि किस पार्टी के वोट ज्यादा कटे, लेकिन शुरुआती आंकड़े भाजपा के गढ़ों पर ज्यादा असर दिखा रहे हैं। दोनों पार्टियां अब बूथ स्तर पर विस्तार से लिस्ट का अध्ययन कर रही हैं।