देश की राजधानी दिल्ली में अगर पत्रकारों को मारा-पीटा जाए और महिला पत्रकार के साथ सार्वजनिक तौर पर यौन दुर्व्यवहार किया जाए तो इसके क्या मायने निकाले जाएं? क्या ये आने वाले भयावह समय के संकेत नहीं हैं? पेश है वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार की रिपोर्ट
लेखक सत्यहिंदी के संपादक हैं। वह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी लिबरल एंड क्रिएटिव आर्ट्स के पूर्व डीन हैं। पत्रकार, टीवी एंकर, लेखक, कवि और अनुवादक के तौर पर रचनात्मक लेखन कार्य करते रहे हैं।


























