34 बरस के स्टार सुशांत सिंह राजपूत के ज़रिये आज के नौजवानों के सपनों की संहारकथा का एक प्रतीक विसर्जित हुआ । कोरोना ने उन सच्चाइयों को और क़रीब कर दिया है जिनसे भागते हुए कोई सबसे दूर चला जाता है । चीजें जल्दी जल्दी और अप्रत्याशित ढंग से घट रही हैं । ऐसी दुनिया को बिना बदले कैसे जिया जा सकता है? सुशांत पहले से चले आ रहे और बढ़ते सवालों की अगली कड़ी भर है आख़िर नहीं , शीतल पी सिंह की मीमांसा
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।








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