क्या जातीय जनगणना का मुद्दा राजनीति का नरैटिव बदल रहा है? क्या इससे हिंदुत्व का ज्वार ठंडा पड़ने लगा है? पांच राज्यों के चुनाव में ये मुद्दा किस तरह से असर कर रहा है? क्या इसने 2024 के चुनाव का एजेंडा बदल दिया है?
लेखक सत्यहिंदी के संपादक हैं। वह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी लिबरल एंड क्रिएटिव आर्ट्स के पूर्व डीन हैं। पत्रकार, टीवी एंकर, लेखक, कवि और अनुवादक के तौर पर रचनात्मक लेखन कार्य करते रहे हैं।


























