मज़दूरों का 'पैदल घर चलो' जारी है। सैकड़ों किलोमीटर की दूरी फंलागते औरतों-बच्चों के साथ पुलिस के डंडों से होकर गुजरते भूखे प्यासे वे चले जा रहे हैं। कोरोना से इनकी लड़ाई में ये अकेले हैं। सरकार का मतलब सिर्फ़ पुलिस का डंडा है! वे लौट तो रहे हैं पर गाँव में भी सब कुछ सहल नहीं। उनकी क़दमताल पर हमसे आपसे शीतल के सवाल।
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