आम तौर पर न्यायपालिका सार्वजनिक हित के मामलों में सक्रियता दिखाती थी और अपनी तरफ से हस्तक्षेप करने से कतराती नहीं थी। मगर मज़दूरों की समस्याओं, उनके कष्टों और उनकी पीड़ा पर उसका रुख़ कैसा है क्या वह हस्तक्षेप कर रही है, क्या वह सरकारों को उनका ध्यान रखने और उनकी मदद करने के लिए निर्देश दे रही है? पेश है वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार की टिप्पणी।
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