गृहमंत्रालय के एक आदेश ने करोड़ों प्रवासी मज़दूरों को दासयुग में पहुँचा दिया है । अब वे अपनी मर्ज़ी के मालिक नहीं रहे बल्कि उन पर केंद्रीय गृहमंत्रालय का अधिकार हो गया है । वे जिन राज्यों में लॉकडाउन में निरुद्ध किये गये हैं वहाँ से बाहर निकल कर अपने घर न जा सकेंगे । अगर वे स्वस्थ हैं तो उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित उद्योग में काम करना पड़ेगा और इसकी मज़दूरी क्या होगी कैसे मिलेगी कौन देगा ? यह सब अस्पष्ट है । रिटायर्ड आईएएस अफ़सर राजू शर्मा से इस आदेश की वैधता पर सवाल कर रहे हैं शीतल पी सिंह
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।






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