अगर समान नागरिक संहिता लागू हो जाए तो हिंदुओं को क्या फ़ायदा या नुक़सान होगा? क्या इससे उनके धर्म और संस्कृति को सुरक्षा मिल जाएगी? क्या उनके लिए रोज़गार और उन्नति के दरवाज़े खुल जाएंगे? या फिर उन्हें संतोष मिलेगा कि मुसलमानों को उनके मजहबी अधिकारों से वंचित कर दिया गया? कहीं ऐसा तो नहीं कि हिंदू-मुसलमान की राजनीति के झाँसे में आकर बेवजह खुश हो रहे हों?
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