पश्चिम बंगाल में शुरू से ही विवादों में रही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की पहेली उलझती ही जा रही है। बीती 28 फ़रवरी को प्रकाशित मतदाता सूची में 6.44 करोड़ नाम थे। इसके अलावा करीब 60 लाख नामों को तार्किक विसंगति वाली सूची में रखा गया था।
अब सात सौ से ज़्यादा न्यायिक अधिकारियों की ओर से ऐसे वोटरों के दस्तावेजों की जाँच के बाद सोमवार आधी रात के समय पहली पूरक सूची तो प्रकाशित की गई। लेकिन आयोग साफ़-साफ़ यह बता नहीं सका है कि इसमें कितने लोगों के नाम कटे हैं। उसका कहना है कि 32 लाख मामलों का निपटारा हो चुका है। इसमें 35 से 40 फ़ीसदी नाम कटने की आशंका है।
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लेकिन इस पूरक सूची ने कई विवाद पैदा कर दिए हैं। कलकत्ता हाईकोर्ट में सात साल तक जज रहे न्यायमूर्ति शहीदुल्लाह मुंशी के अलावा ममता बनर्जी सरकार में मंत्री रहे गुलाम रब्बानी के नाम भी इस सूची से गायब हैं। इससे मंत्री के चुनाव लड़ने पर असमंजस पैदा हो गया है। दूसरी ओर, उत्तर 24-परगना जिले के सीमावर्ती बशीरहाट में एक ही बूथ पर 340 मतदाताओं के नाम कटने पर भी विवाद तेज हो रहा है। इसमें इलाके के बूथ लेवल अधिकारी यानी बीएलओ के नाम भी शामिल हैं।
चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया है कि पहली पूरक सूची में क़रीब 10 लाख नाम जोड़े गए हैं। जिन नियमों पर न्यायिक अधिकारियों के ई-हस्ताक्षर नहीं थे, उनको सूची में शामिल नहीं किया जा सका है।

आयोग की वेबसाइट के हैक होने का दावा किया जा रहा है। मंगलवार रात को अचानक ज़्यादातर वोटरों के नाम विचाराधीन सूची में दिखने लगे। इनमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी शामिल थी। शुभेंदु अधिकारी का नाम तो डिलीटेड वाली सूची में था। बाद में आयोग ने सफाई दी कि तकनीकी गड़बड़ी के कारण ऐसा हुआ।

बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी का दावा है कि एसआईआर के कवायद के तहत राज्य की मतदाता सूची से क़रीब 79 लाख फर्जी नाम हटा दिए गए हैं। इसी वजह से बीजेपी अबकी 177 से भी ज़्यादा सीटें जीतेगी।

एक बूथ से 340 वोटर गायब

बशीरहाट के बड़ो गोबरा गांव के पांच नंबर बूथ से एक साथ 340 वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं। यह लोग अल्पसंख्यक समुदाय के हैं। दिलचस्प बात यह है कि इनमें इलाके के बीएलओ मोहम्मद शफीउल आलम भी शामिल हैं।

तीन-चार दस्तावेज के बाद भी नाम हटे

इस बूथ के वोटरों का दावा है कि आयोग ने 11 में से कोई भी एक दस्तावेज मांगा था। लेकिन लोगों ने तीन-चार दस्तावेज जमा किए थे। बावजूद इसके मतदाता सूची से उनके नाम काट दिए गए। गांव वालों ने चुनाव आयोग पर राजनीतिक दबाव में काम करते हुए एक खास समुदाय के वोटरों के नाम काटने का आरोप लगाया है।
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इस बूथ पर कुल 992 वोटर थे। मृत्यु और दूसरी वजहों से इनमें से 38 नाम पहले ही कट गए थे। बाकियो में से 358 को एसआईआर की सुनवाई के लिए बुलाया गया था। इनमें से 18 लोगों के नाम तो ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल थे। लेकिन पूरक सूची में बाकी तमाम 340 लोगों के नाम काट दिए गए हैं।

पूर्व हाई कोर्ट जज नाराज़

दूसरी ओर, हाई कोर्ट के पूर्व जज शहीदुल्लाह मुंशी ने भी मतदाता सूची से अपना नाम कटने पर नाराज़गी जताई है। वो फिलहाल बंगाल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष हैं। उनकी पत्नी और बड़े बेटे का नाम अब भी विचाराधीन श्रेणी में है। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि तमाम ज़रूरी दस्तावेज जमा करने के बावजूद सूची से नाम कटना बेहद अपमानजनक है।
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तृणमूल कांग्रेस सरकार में मंत्री और ग्वालपोखर के विधायक गुलाम रब्बानी भी पूरक सूची प्रकाशित होने के बाद परेशान हैं। तृणमूल ने उनको इस बार भी पुरानी सीट से ही टिकट दिया है। लेकिन पूरक सूची में नाम नहीं होने के कारण अब उनकी उम्मीदवारी ही खतरे में पड़ गई है। अब पार्ट में उनकी जगह किसी और को टिकट देने पर विचार किया जा रहा है। रब्बानी का आरोप है कि उनका नाम जानबूझ कर पूरक सूची में शामिल नहीं किया गया है ताकि वो चुनाव नहीं लड़ सकें।