पश्चिम बंगाल की सियासत में बीजेपी ने ममता बनर्जी को टक्कर देने के लिए संकल्प पत्र के ज़रिए 7 बड़े मुद्दों का मेगा प्लान तैयार किया है। जानें चुनावी रणनीति और इसके मायने क्या।
पश्चिम बंगाल में इस महीने होने वाले चुनाव में ममता बनर्जी सरकार को सत्ता से उखाड़ने का दावा करने वाली बीजेपी ने सरकार के 15 साल के कार्यकाल के दौरान चार्जशीट तो पहले ही जारी कर दी है, अब पार्टी इसी सप्ताह राज्य के लिए अपना संकल्प पत्र यानी चुनावी घोषणापत्र भी जारी करेगी। हालाँकि अब तक इसकी तारीख का एलान नहीं किया गया है।
भाजपा सूत्रों ने बताया कि इस संकल्प पत्र में कांग्रेस पर हमला करने की बजाय पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस और उससे पहले सत्ता में रही वाममोर्चा सरकार के कार्यकाल पर हमला करते हुए उनको कटघरे में खड़ा किया है।
बीजेपी के सात बड़े मुद्दे क्या?
पार्टी के नेताओं ने बताया कि संकल्प पत्र में पार्टी ने सात मुद्दों पर खास जोर देने की बात कही है। इसके साथ ही राज्य की बदहाली आर्थिक स्थिति से लेकर बेरोजगारी और ढांचागत विकास के साथ ही ग्रामीण इलाकों की तस्वीर बदलने के दावे किए गए हैं। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योगों के मुद्दे पर भी कई लुभावने वादे शामिल हैं। सूत्रों का दावा है कि संकल्प पत्र में सिंगूर में उद्योग लगाने का भी ज़िक्र किया जाएगा। यहाँ इस बात का ज़िक्र प्रासंगिक है कि प्रधानमंत्री ने अपनी सिंगूर रैली में वहां उद्योग लगाने का कोई ठोस वादा नहीं किया था। लेकिन अब संकल्प पत्र में इस बात का जिक्र किया गया है।इसमें सिद्धार्थ शंकर राय के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का कोई जिक्र नहीं होगा। संकल्प पत्र की शुरुआत में ही कहा गया है कि पश्चिम बंगाल का पिछला पांच दशक हर मोर्चे पर निरंतर गिरावट की कहानी है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आई गिरावट का ज़िक्र करते हुए वाममोर्चा सरकार के कार्यकाल के दौरान इसके राजनीतिकरण और तृणमूल कांग्रेस के दौर में इस क्षेत्र में होने वाले भ्रष्टाचार और अराजकता का ज़िक्र किया गया है।
अमित शाह ने जारी की थी 'चार्जशीट'
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीते सप्ताह पार्टी की ओर से चार्जशीट जारी करते हुए कहा था कि इसमें सरकार के कमियों और गलतियों का जिक्र है। अब आगे इन कमियों को दूर करने की पार्टी की योजनाओं के बारे में भी बताया जाएगा। भाजपा नेताओं के मुताबिक, संकल्प पत्र में उन कमियों और उनको दूर करने की पार्टी की रणनीति की विस्तार से चर्चा की गई है।
पार्टी के संकल्प पत्र में कहा गया है कि सत्ता में आने के बाद वह तृणमूल कांग्रेस सरकार के 15 साल के कुशासन और भ्रष्टाचार पर श्वेत पत्र प्रकाशित करेगी। इसके साथ ही कोयला, बालू और पत्थर जैसे प्राकृतिक संसाधनों की लूट पर अंकुश लगाया जाएगा।
भाजपा ने राज्य में सक्रिय माफिया सिंडिकेट के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का भी वादा किया है। इसमें तृणमूल कांग्रेस की आरक्षण नीति में आमूलचूल बदलाव की बात भी कही गई है।
लक्ष्मी भंडार योजना की रक़म बढ़ाएगी
पार्टी ने लक्ष्मी भंडार योजना के तहत मासिक रकम बढ़ा कर तीन हजार करने का वादा किया है। इसी तरह युवा साथी योजना के तहत बेरोजगार युवाओं को हर महीने तीन हजार रुपए की मदद दी जाएगी और सरकारी कर्मचारियों के बकाया महंगाई भत्ते का भुगतान सरकार के गठन के 45 दिनों के भीतर कर दिया जाएगा। पार्टी ने सरकारी कर्मचारियों के तमाम खाली पदों को भी शीघ्र भरने का भरोसा दिया है। इसके अलावा राज्य के विभिन्न इलाकों में हर साल अग्निवीरों की भर्ती के लिए चार-चार शिविर खोले जाएंगे।पश्चिम बंगाल से और ख़बरें
पार्टी ने कहा है कि सरकार में आने के बाद वह सेना में बंगाल रेजिमेंट बनाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाएगी। भाजपा ने महिलाओं की सुरक्षा और सीमा पार से घुसपैठ रोकने की दिशा में ठोस कदम उठाने की बात कही है। संकल्प पत्र में केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य में बड़े पैमाने पर विकास योजनाएं शुरू करने और डीप सी पोर्ट बनाने का भी वादा किया गया है।
हाईवे विकास की योजना
इसके साथ ही सुंदरबन से दार्जिलिंग तक के इलाके को नेशनल हाईवे से जोड़ा जाएगा ताकि यह दूरी अधिकतम आठ घंटे में तय की जा सके। बीजेपी ने उत्तर बंगाल के विकास की दिशा में क़दम उठाया और राज्य की लंबित रेलवे परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने का भरोसा दिया है। संकल्प पत्र में पार्टी ने शिक्षा और स्वास्थ्य के ढांचे को मजबूत करने का भी वादा किया है।
बीजेपी नेताओं का कहना है कि इस संकल्प पत्र को तैयार करने की प्रक्रिया कई महीने पहले शुरू हुई थी। इसके लिए राज्य के विशिष्ट नागरिकों के घर जाकर उनसे सलाह मांगी गई थी। इसी तरह पार्टी के तमाम कार्यालयों में ड्रॉप बॉक्स रखे गए थे। लोगों से अपने सुझाव वहां जमा करने की अपील की गई थी। नेताओं के मुताबिक, भारी तादाद में मिले सुझावों के अध्ययन के बाद ही संकल्प पत्र तैयार किया गया है ताकि सत्ता में आने के बाद समय गंवाए बिना राज्य के विकास की प्रक्रिया तेज की जा सके।