पश्चिम बंगाल पुलिस ने शुक्रवार को मालदा हिंसा के कथित मास्टरमाइंड मोफक्केरुल इस्लाम को गिरफ्तार कर लिया। इस्लाम पेशे से वकील हैं और उत्तर दिनाजपुर जिले के इतहार के निवासी हैं। वे 2021 के विधानसभा चुनाव में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। राज्य में चुनाव हो रहे हैं और चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ रहा है। बीजेपी किसी भी हालत में इस बार चुनाव जीतने के लिए तमाम तरह की कोशिश कर रही है। मालदा में मतदाताओं के नाम एसआईआर के जरिए मतदाता सूची से उड़ा दिए गए। जनता ने वहां जबरदस्त प्रदर्शन करके न्यायिक अधिकारियों का घेराव किया और कथित तौर पर बंधक बना लिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना पर चुनाव आयोग से जांच को कहा। आयोग ने जांच एनआईए को सौंप दी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का आरोप है कि मालदा की घटना में सभी विरोधी दल शामिल हैं। उनका कहना है कि बीजेपी और चुनाव आयोग साजिशें कर रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, मोफक्केरुल इस्लाम हिंसा के दौरान कालीचक ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस (बीडीओ) के बाहर भाषण देते नजर आए थे और भीड़ को परिसर नहीं छोड़ने की अपील कर रहे थे। वे राज्य से भागने की कोशिश कर रहे थे और उत्तर बंगाल के बागडोगरा एयरपोर्ट से उन्हें रोका गया। पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर आगे की कार्रवाई कर रही है।
उत्तर बंगाल के पुलिस महानिरीक्षक के. जयरामन ने मीडिया को बताया कि मालदा हिंसा के सिलसिले में अब तक 35 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और 19 मामले दर्ज किए गए हैं। उन्होंने कहा, “लोगों को प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन हिंसा नहीं कर सकते।”
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मालदा की घटना क्या थी?

बुधवार शाम (1 अप्रैल 2026) को मालदा जिले के कालीचक ब्लॉक-II में सात न्यायिक अधिकारी न्यायिक काम से गए थे। वहां भीड़ ने उनका कई घंटों तक घेराव किया। न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाकर रखा गया। पुलिस ने देर रात उन्हें सुरक्षित रेस्क्यू किया।इस घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (2 अप्रैल) को इसे “सुप्रीम कोर्ट की गरिमा के प्रति चुनौती” और “चुनावों को बाधित करने की सोची-समझी कोशिश” बताया। कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि इस मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी जैसे सीबीआई या एनआईए को सौंप दी जाए।चुनाव आयोग ने भी एनआईए को मालदा हिंसा की जांच सौंप दी। एनआईए की टीम शुक्रवार को मालदा पहुंच चुकी है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने न्यायिक अधिकारियों के घेराव की घटना के लिए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM), इंडियन सेकुलर फ्रंट (ISF) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कांग्रेस पर भी उकसाने का आरोप लगाया और इसे चुनावी साजिश बताया।
हरिरामपुर (दक्षिण दिनाजपुर जिले) में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कहा कि बुधवार को मालदा के मोठाबाड़ी इलाके में न्यायिक अधिकारियों को कई घंटों तक घेरा गया था। उन्होंने दावा किया कि इस घटना का मास्टरमाइंड वकील मोफक्कारुल इस्लाम है, जिसे राज्य की सीआईडी (क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट) ने बागडोगरा एयरपोर्ट से भागते समय गिरफ्तार कर लिया।
ममता बनर्जी ने कहा, “बीजेपी ने आरोपी AIMIM से उधार लिया और यहां लाई। ISF उनके साथ है; कांग्रेस और बीजेपी ने भी उकसाया है।” उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों ने ही मालदा के मोठाबाड़ी में हिंसा की साजिश रची।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव के दौरान बाहरी गुंडों को बंगाल लाया जा रहा है और वे जजों को भी नहीं बख्श रहे। उन्होंने AIMIM पर बिहार विधानसभा चुनावों में वोट बांटकर BJP को फायदा पहुंचाने का भी आरोप लगाया। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हाल ही में पूर्व TMC विधायक हुमायूं कबीर द्वारा शुरू की गई आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) का समर्थन किया है। हुमायूं कबीर मुर्शिदाबाद जिले की मुस्लिम बहुल सीटों पर TMC और BJP दोनों को चुनौती देने की कसम खा चुके हैं।
वोटर लिस्ट से नाम काटे जाने पर ममता बनर्जी ने कहा कि वे इसकी पीड़ा समझती हैं और उन्होंने लोगों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी है। उन्होंने पूछा कि 2024 के लोकसभा चुनावों वाली वोटर लिस्ट से ही क्यों विधानसभा चुनाव नहीं कराए जा सकते। उन्होंने कहा, “अगर वोटर लिस्ट में घुसपैठियों के नाम थे, तो मोदी जी भी उनके वोटों से जीते थे, इसलिए उन्हें पहले इस्तीफा दे देना चाहिए।”

सीआरपीएफ की गाड़ियों से पैसे लाने का आरोप

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि CRPF की गाड़ियों से पैसे लाए जा रहे हैं और वे जानती हैं कि ये कहां जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “मेरे पास इन गतिविधियों का रिकॉर्ड है और उचित समय पर मैं इसे उजागर करूंगी।”केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पश्चिम बंगाल में 15 दिनों तक डेरा डालने की योजना पर ममता ने कहा, “आप 365 दिन भी बंगाल में रह लीजिए, इससे कुछ नहीं बदलेगा।” उन्होंने गुरुवार को अपने कालीघाट आवास के पास सुवेंदु अधिकारी के नामांकन रैली के दौरान हुई झड़प का जिक्र करते हुए कहा कि BJP से शिष्टाचार की उम्मीद करना व्यर्थ है।
भभानीपुर विधानसभा क्षेत्र (जहां से वे खुद चुनाव लड़ रही हैं) में 40,000 वोटरों के नाम कटने का जिक्र करते हुए ममता बनर्जी ने आत्मविश्वास जताते हुए कहा कि TMC इस चुनाव में जीतेगी। उन्होंने कहा, “मैं पूरे राज्य की 294 सीटों पर आपकी उम्मीदवार हूं… भूल जाइए कि पार्टी का उम्मीदवार किस नाम से है।”
ममता बनर्जी ने BJP पर धर्म के नाम पर नई तरह की राजनीति थोपने और लोगों में जहर फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वे सभी धर्मों के त्योहार मनाती हैं। उन्होंने दावा किया कि BJP संसद में डीलिमिटेशन बिल लाने की योजना बना रही है और बंगाल को फिर से बांटना चाहती है। सोशल मीडिया पर एक नक्शा वायरल होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें बिहार और उत्तर बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर नया राज्य बनाने की बात कही गई है।
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ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग द्वारा नए DGP, पुलिस कमिश्नरों और जिला मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि वे सभी बंगाल के हैं और राज्य का साथ देंगे। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे BJP की नहीं सुनें, बल्कि लोगों के लिए काम करें और हिंसा, मनी लॉन्ड्रिंग, हथियारों तथा ड्रग्स की तस्करी रोकें। उन्होंने कहा, “अभी के लिए सत्ता हमारे पास से छीन ली गई है, लेकिन हम जल्द ही वापस आएंगे और सबकी समीक्षा करेंगे।”