डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर लगाए गए तेल प्रतिबंधों में दी गई छूट (sanctions waiver) को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। यह फैसला स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में ईरान पर अमेरिकी सैन्य हमले दोबारा शुरू होने के बाद लिया गया है। अमेरिकी प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप और प्रशासन ने बार-बार स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ हुआ समझौता पूरी तरह से उसके व्यवहार (performance-based) पर निर्भर है। ईरान को इसका लाभ तभी मिलेगा जब वह अच्छा व्यवहार दिखाएगा।"
ईरान को यह विशेष छूट जून के आखिर में दी गई थी, जो मूल रूप से 60 दिनों के लिए यानी 21 अगस्त तक लागू रहने वाली थी, लेकिन ईरान के आक्रामक रुख को देखते हुए इसे समय से पहले ही खत्म कर दिया गया।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जानकारी दी कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' से गुजर रहे तीन वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया था, जिसमें नागरिक भी सवार थे। अमेरिकी सेना ने ईरान के इस कदम को "बिना उकसावे के किया गया खतरनाक कृत्य" और "युद्धविराम का स्पष्ट उल्लंघन" बताया है। इन हमलों के जवाब में अमेरिकी सेंट्रल कमांड की सेनाओं ने ईरान पर सिलसिलेवार और शक्तिशाली हवाई हमले शुरू कर दिए हैं।
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हॉर्मुज में तेल टैंकरों की सुरक्षा पर गंभीर संकट के बादल दिखने लगे हैं। 24 घंटे के अंदर वहाँ से गुजर रहे तीन टैंकरों पर हमले हुए। इन घटनाओं ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। इन घटनाओं के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी कि या तो समझौता होगा, या फिर हम अपना काम पूरा करेंगे। उन्होंने धमकी दी कि हम एक घंटे के भीतर उनके पुल और ऊर्जा आपूर्ति को तबाह कर सकते हैं।
हॉर्मुज में सबसे ताज़ा हमले की पुष्टि ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस यानी UKMTO ने की। इसने जहाजों को काफ़ी ज़्यादा सतर्क रहने की सलाह दी है। यूकेएमटीओ के अनुसार, ताजा घटना में एक व्यावसायिक टैंकर को किसी अज्ञात हथियार से निशाना बनाया गया। एजेंसी के मुताबिक हमले में जहाज के ढांचे को नुकसान पहुंचा है, हालांकि किसी चालक दल के सदस्य के घायल होने या तेल रिसाव की सूचना नहीं मिली है।

यूकेएमटीओ ने कहा कि मामले की जांच जारी है और हॉर्मुज से गुजरने वाले सभी जहाजों को सावधानी बरतने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने को कहा गया है। अब तक किसी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

क़तर के टैंकर पर भी हमला

इससे पहले मंगलवार को ही दो अन्य जहाज भी हमलों का शिकार हुए थे। इनमें से एक कतर का एलएनजी जहाज अल रेकय्यात था। दूसरा जहाज सऊदी अरब का कच्चा तेल ले जा रहा टैंकर वेदयान था। इन घटनाओं ने दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा मार्ग की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कतर ने आरोप लगाया है कि उसके एलएनजी जहाज अल रेकय्यात पर ईरान की ओर से ड्रोन हमला किया गया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ड्रोन जहाज के इंजन रूम के पास टकराया, जिससे आग लग गई। जहाज के कप्तान ने रेडियो संदेश में आपातकालीन सहायता मांगते हुए कहा, 'मे डे... मे डे... यह एलएनजी जहाज अल रेकय्यात है। हमारे इंजन रूम के ऊपर ड्रोन हमला हुआ है। इंजन रूम में आग लगी है और धुआं भर गया है।'

क़तरी टैंकर पर चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित बताए गए हैं और उन्हें बाहर निकाल लिया गया। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि जहाज में तरलीकृत प्राकृतिक गैस होने के कारण विस्फोट का खतरा काफी अधिक था।

कतर की ईरान को कड़ी चेतावनी

क़तरी टैंकर पर हमले के बाद क़तर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने इस घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह हमला अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा पर हमला है। इसके साथ ही उन्होंने इस हमले को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए खतरा बताया। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। कतर ने ईरान को इस घटना और इसके परिणामों के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया है तथा ऐसे कदम तुरंत रोकने की मांग की है।

सऊदी टैंकर भी हुआ क्षतिग्रस्त

इसी दौरान सऊदी अरब के झंडे वाले सुपर टैंकर वेदयान को भी ओमान तट के पास नुकसान पहुंचा। हालांकि अभी यह साफ़ नहीं है कि जहाज पर ड्रोन हमला हुआ या किसी अन्य हथियार से उसे निशाना बनाया गया। जांच एजेंसियां मामले की पड़ताल कर रही हैं।

तेल सप्लाई के लिए क्यों अहम है हॉर्मुज?

हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों सऊदी अरब, कुवैत, इराक, कतर और संयुक्त अरब अमीरात के तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से दुनिया भर में भेजा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस मार्ग में लगातार असुरक्षा बनी रहती है तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों पर असर पड़ सकता है।

युद्धविराम के बावजूद नहीं घटा तनाव

ये हमले तब हुए हैं जब पिछले महीने अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिन का अंतरिम युद्धविराम समझौता हुआ था। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संघर्ष रोकना और स्थायी शांति समझौते के लिए बातचीत का रास्ता तैयार करना था। हालाँकि हाल ही में कतर में हुई अप्रत्यक्ष वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुँच सकी।

ट्रंप ने फिर दी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को चेतावनी दी है कि यदि बातचीत विफल रही तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा, 'या तो समझौता होगा, या फिर हम अपना काम पूरा करेंगे। हम एक घंटे के भीतर उनके पुल और ऊर्जा आपूर्ति को तबाह कर सकते हैं।'
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ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने ट्रंप की चेतावनी का जवाब देते हुए कहा कि धमकियों के बीच बातचीत आगे नहीं बढ़ सकती। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, 'अपने हस्ताक्षर का सम्मान कीजिए।' उनका इशारा अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम युद्धविराम समझौते की ओर था।

वैश्विक बाजार की बढ़ी चिंता

लगातार तीन जहाजों पर हुए हमलों ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों, तेल बाजार और बीमा कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हॉर्मुज में हमलों का सिलसिला जारी रहता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल तथा प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।