पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान ख़ान सत्ता से हटाए जाने की जिस अमेरिकी साज़िश का बार-बार आरोप लगाते रहे थे उसकी पुष्टि अब टॉप सीक्रेट केबल 'साइफर' के लीक में भी हुई है। केबल लीक में यह बात सामने आई है कि अमेरिका ने इमरान खान की सरकार गिराने में बड़ी भूमिका निभाई थी। इन्वेस्टिगेटिव वेबसाइट Drop Site ने यह टॉप-सीक्रेट केबल साइफर जारी की है। इसकी पहचान केबल I-0678 है। यह दस्तावेज अप्रैल 2022 में इमरान खान के नो-कॉन्फिडेंस वोट से ठीक पहले का है। इसमें पाकिस्तान के तत्कालीन अमेरिकी राजदूत और अमेरिकी विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी डोनाल्ड लू के बीच हुई बैठक का ब्योरा है।

इस टॉप सीक्रेट केबल के लीक होने से पाकिस्तान में फिर से इमरान ख़ान पर बवाल मच गया है। इमरान खान के पुराने दावों को नई ताक़त मिल गई है और माना जा रहा है कि उनकी पार्टी पीटीआई इसको बड़ा मुद्दा बना सकती है।

इमरान खान का पुराना दावा सही साबित?

इमरान खान लंबे समय से कह रहे थे कि अमेरिका उनकी स्वतंत्र विदेश नीति के कारण उनसे नाराज़ था। उन्होंने रूस और चीन के साथ अच्छे संबंध रखे थे। खासकर, अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिका के निकलने के बाद अमेरिका ने पाकिस्तान में सैन्य अड्डे मांगे, लेकिन इमरान ने इनकार खान कर दिया। रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने वाले दिन ही इमरान मॉस्को गए थे। पाकिस्तान ने रूस के खिलाफ यूएन वोट में हिस्सा नहीं लिया।
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इमरान खान कहते थे कि इन कारणों से अमेरिका ने पाकिस्तान की पुरानी पार्टियों- पीएमएल-एन और पीपीपी के साथ मिलकर उनकी सरकार गिराई। अमेरिका इन आरोपों से इनकार करता रहा था।

लीक केबल में क्या लिखा है?

लीक हुई केबल के अनुसार डोनाल्ड लू ने पाकिस्तानी राजदूत से कहा कि अगर इमरान खान संसद में नो-कॉन्फिडेंस वोट से हटा दिए जाते हैं तो 'सब कुछ माफ कर दिया जाएगा'। इसका मतलब था कि इमरान के जाने के बाद पाकिस्तान और अमेरिका के संबंध फिर से अच्छे हो जाएंगे। केबल में यह भी चेतावनी दी गई थी कि अगर इमरान बच गए तो पाकिस्तान को अमेरिका और यूरोप दोनों से अलग-थलग कर दिया जाएगा।

पाकिस्तानी सेना की भूमिका

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान की शक्तिशाली सेना ने इमरान खान की सरकार के साथ मिलकर काम करने की बजाय अमेरिका से अलग से संपर्क साध लिया था। 2021 में सेना ने अमेरिका में एक पूर्व CIA से जुड़े लॉबिस्ट को काम पर रखा था।

इमरान के हटने के बाद कई बड़े फ़ैसले हुए। पाकिस्तान ने यूक्रेन युद्ध के लिए गुप्त रूप से तोपखाने के गोले भेजे। IMF से मिलने वाले कर्ज को यूक्रेन युद्ध से जोड़ा गया। पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ डिफेंस समझौता किया, जिसका इमरान विरोध कर रहे थे। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को धीमा कर दिया गया।

असिम मुनीर बने US के संपर्क सूत्र!

रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान के बाद आर्मी चीफ़ जनरल असिम मुनीर ने पाकिस्तान की असली सत्ता संभाल ली। उन्होंने खुद को फील्ड मार्शल बनाया और अमेरिका के साथ संबंध सुधारने पर पूरा ध्यान दिया।
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पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति

यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब पाकिस्तान अमेरिका-ईरान युद्ध समाप्त करने में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। इमरान खान अभी भी जेल में हैं। उनकी पार्टी PTI इस लीक को अपने दावों की पुष्टि मान रही है। वहीं पाकिस्तान सरकार और सेना ने अभी तक इस लीक पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

यह लीक दस्तावेज पाकिस्तान की राजनीति में विदेशी दखलंदाजी और सेना की भूमिका को लेकर नए सवाल खड़े कर रहा है। इमरान खान के समर्थक इसे उनके खिलाफ साजिश का सबूत बता रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे पुराना मुद्दा मानकर टालने की कोशिश कर रहा है।

शेख हसीना ने भी लगाए थे साज़िश के आरोप

बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना ने भी सत्ता से हटाए जाने से पहले अपने ख़िलाफ़ चल रही साज़िश का आरोप लगाया था। ख़ासकर उन्होंने सेंट मार्टिन द्वीप को लेकर अमेरिका पर आरोप लगाया था। यह बंगाल की खाड़ी में बांग्लादेश का एक छोटा द्वीप है, जो सामरिक रूप से अहम माना जाता है। हसीना का कहना था कि अगर उन्होंने इस द्वीप की संप्रभुता अमेरिका को सौंप दी होती और बंगाल की खाड़ी पर अमेरिकी प्रभाव को मान लिया होता तो वे सत्ता में बनी रहतीं। उन्होंने इसे अपनी बेदखली का एक प्रमुख कारण बताया।
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यह आरोप उन्होंने अपने सत्ता काल के दौरान मई-जून 2024 के आसपास लगाए थे। उन्होंने बाद में अगस्त 2024 में भारत पहुंचने के बाद भी इन आरोपों को दोहराया। उन्होंने दावा किया था कि उनके पिता शेख मुजीबुर रहमान की तरह उनकी हत्या की भी साज़िश रची जा रही थी। उन्होंने विदेशी ताक़तों पर अपनी सरकार को गिराने और बांग्लादेश की संप्रभुता पर हमला करने का आरोप लगाया। ठीक, पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान की तरह ही।