ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच गुरुवार रात को पूरे देश में इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह ठप कर दी गईं, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तेहरान सहित कई प्रमुख शहरों में ताजा झड़पों में मौतों की संख्या बढ़कर 45 हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी अधिकारियों को चेतावनी दी है कि अगर वे "लोगों को मारेंगे" तो अमेरिका कड़ी कार्रवाई करेगा। यह प्रदर्शन आर्थिक संकट, महंगाई और शासन के खिलाफ पिछले दो हफ्तों से जारी हैं, और अब ये राष्ट्रीय स्तर पर फैल चुके हैं।

ईरान में विरोध प्रदर्शन पिछले दो हफ्तों से चल रहे हैं, जो मुख्य रूप से आर्थिक संकट से उपजे हैं। देश में महंगाई 40 प्रतिशत से अधिक हो गई है, रियाल की कीमत डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है, और आम लोगों की जीविका प्रभावित हो रही है। प्रदर्शनकारी सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामनेई के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने पूर्व शाह रज़ा पहलवी के समर्थन में नारे लगाए हैं, जैसे "जाविद शाह" (शाह जिंदाबाद)। शाह परिवार के सदस्यों ने अमेरिका में शरण ले रखी है। वहां से उनके बयान प्रदर्शन के लिए जारी हो रहे हैं।

प्रदर्शन तेहरान, शिराज, इस्फहान, किरमानशाह, लोर्डेगन, फासा और अन्य शहरों में फैल चुके हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर गवर्नर कार्यालयों पर हमला किया है, पुलिस वाहनों को आग लगाई है, और न्यायिक भवनों को नियंत्रित करने की कोशिश की है। सुरक्षा बलों ने गोलीबारी की, जिसमें कम से कम 45 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं, जिनमें आठ नाबालिग शामिल हैं। नॉर्वे स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स एनजीओ ने इस मौतों की पुष्टि की है। इसके अलावा, 2,200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हालांकि कई शहरों में ईरान सरकार के समर्थन में भी प्रदर्शन हो रहे हैं।   

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रज़ा पहलवी का बयान

अमेरिका में रह रहे रज़ा पहलवी ने एक्स पर बयान जारी किया है। ईरान में इस्लामिक क्रांति के बाद अमेरिका ने शाह परिवार को अपने यहां शरण दी थी। शाह परिवार वहीं से अमेरिकी मदद से ईरान की राजनीति में दखल देता है। मौजूदा प्रदर्शन शाह परिवार की अपील पर हो रहे हैं। रज़ा पहलवी ने कहा- आज रात लाखों ईरानियों ने अपनी आज़ादी की मांग की। इसके जवाब में, ईरान की सरकार ने संचार के सभी माध्यम काट दिए हैं। उसने इंटरनेट बंद कर दिया है। उसने लैंडलाइन भी काट दिए हैं। वह उपग्रह संकेतों को भी जाम करने का प्रयास कर सकती है। मैं स्वतंत्र विश्व के नेता, राष्ट्रपति ट्रंप को सरकार को जवाबदेह ठहराने के अपने वादे को दोहराने के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। अब समय आ गया है कि यूरोपीय नेताओं सहित अन्य लोग भी उनका अनुसरण करें, अपनी चुप्पी तोड़ें और ईरान के लोगों के समर्थन में अधिक निर्णायक कदम उठाएं। मैं उनसे आह्वान करता हूं कि वे ईरानी लोगों तक संचार बहाल करने के लिए उपलब्ध सभी तकनीकी, वित्तीय और राजनयिक संसाधनों का इस्तेमाल करें ताकि उनकी आवाज़ और उनकी इच्छा सुनी और देखी जा सके। मेरे साहसी देशवासियों की आवाज़ को खामोश न होने दें।
कई शहरों में झड़पें गंभीर हैं, जहां हथियारबंद प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर सुरक्षा बलों पर हमला किया। कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं, जिसमें गोलियों की आवाजें सुनाई दे रही हैं और लोग घायलों को उठाकर ले जाते दिख रहे हैं। तेहरान में हजारों लोग सड़कों पर उतरे, जहां "इस्लामिक गणराज्य को मौत" जैसे नारे लगाए गए।

इंटरनेट ब्लैकआउट: सरकार की रणनीति

नेटब्लॉक्स नामक इंटरनेट मॉनिटरिंग ग्रुप ने पुष्टि की है कि गुरुवार रात को ईरान में राष्ट्रव्यापी इंटरनेट ब्लैकआउट लागू किया गया, जिससे इंटरनेट ट्रैफिक "लगभग शून्य" हो गया। यह कदम प्रदर्शनों को दबाने के लिए उठाया गया है, क्योंकि सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदर्शनकारी एक-दूसरे से जुड़ रहे थे। पहले से ही कई शहरों में इंटरनेट और फोन लाइनें काट दी गई थीं। ईरान ने पहले भी 2022, 2019 और 2009 के प्रदर्शनों के दौरान इंटरनेट बंद किया था।

इस ब्लैकआउट से पहले, प्रदर्शनकारियों के कई वीडियो ऑनलाइन साझा किए गए थे, जिसमें सुरक्षा बलों द्वारा गोलीबारी दिखाई गई थी। अब, सरकारी वेबसाइटें और ऐप्स भी ऑफलाइन हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम प्रदर्शनों को संगठित होने से रोकने के लिए है, लेकिन इससे वैश्विक स्तर पर ईरान का अलगाव बढ़ गया है।

ट्रंप की धमकी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, "अगर वे लोगों को मारना शुरू करते हैं... तो हम उन्हें बहुत जोर से मारेंगे।" ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों को "बहादुर लोग" कहा और कहा कि अगर ईरानी शासन प्रदर्शनकारियों पर हमला करता है, तो अमेरिका "उन्हें नरक का सामना कराएगा"। यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रंप प्रशासन पहले से ही ईरान पर दबाव बढ़ा रहा है, जिसमें मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों को नष्ट करने की धमकियां शामिल हैं।

ईरानी अधिकारियों ने ट्रंप की धमकियों को खारिज किया है और कहा है कि अमेरिका कुछ ज्यादा ही "साहस" दिखा रहा है। ईरान की नई रक्षा परिषद ने कहा है कि अगर हमला हुआ तो पहले ही जवाब दिया जाएगा। निर्वासित क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है और कहा है कि "वर्तमान शासन का अंत हो चुका है"।

बहरहाल, ईरान में स्थिति बेहद तनावपूर्ण है। सरकार ने आईआरजीसी (इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) की इकाइयों को तैनात किया है और कई प्रांतों में कार्यालय बंद कर दिए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह 2022 के प्रदर्शनों से भी बड़ा हो सकता है, जब महिला अधिकारों पर विरोध हुआ था। वैश्विक मीडिया और मानवाधिकार संगठन इस पर नजर रखे हुए हैं, लेकिन इंटरनेट ब्लैकआउट से जानकारी सीमित हो गई है।

दुनिया से और खबरें
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने स्थिति को "बेहद कठिन और जटिल" बताया है और बातचीत की पेशकश की है, लेकिन सुरक्षा बलों की कार्रवाई से विश्वास कम हुआ है। ट्रंप की धमकी से अमेरिका-ईरान तनाव और बढ़ सकता है, खासकर जब ईरान पहले से ही इसराइल के साथ संघर्ष का सामना कर रहा है। दुनिया की नजरें अब ईरान पर टिकी हैं कि क्या यह शासन परिवर्तन की ओर बढ़ेगा या दमन से शांत हो जाएगा।