यूएस राष्ट्रपति ट्रंप के ट्वीट से शनिवार को इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका की बातचीत ठप होते होते बची। इस घटना से पता चल रहा है कि अमेरिका कितने पानी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने होर्मुज खाली करने के संबंध में शनिवार को ट्वीट किया। उधर संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह बंदरगाह के पास देखा गया अमेरिकी विध्वंसक पोत होर्मुज की तरफ बढ़ने लगा। ईरान के अधिकारियों ने फौरन इस्लामाबाद में स्पीकर गालिबाफ और विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची के पास सूचना भेजी। ईरान की कड़ी चेतावनी के बाद युद्धपोत पीछे हट गया। ईरानी सशस्त्र बल आईआरजीसी ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिकी युद्धपोत होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर आगे बढ़ता है, तो उसे 30 मिनट के भीतर निशाना बनाया जाएगा। इस धमकी का असर हुआ। युद्धपोत चुपचाप लौट गया।
सूत्रों के अनुसार, ईरानी सेना ने इस पोत की गतिविधियों पर नज़र रखते हुए इसे जलडमरूमध्य की ओर बढ़ते हुए ट्रैक किया। इसके बाद इस्लामाबाद में चल रही बातचीत के बीच पाकिस्तानी मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका को सख्त संदेश भेजा गया। चेतावनी में स्पष्ट कहा गया कि आगे बढ़ने की स्थिति में सैन्य कार्रवाई की जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय अमेरिकी मीडिया आउटलेट ब्लूमबर्ग ने ईरानी समाचार एजेंसी फ़ार्स के हवाले से बताया कि इस चेतावनी के बाद अमेरिकी पोत ने दिशा बदल ली और वापस लौट गया। यह घटनाक्रम क्षेत्र में ट्रंप के उतावलेपन और सैन्य टकराव के खतरे को और बढ़ाता हुआ दिखाई दे रहा है।
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ट्रंप का बयान: “होर्मुज को साफ़ कर रहे हैं”

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य को “साफ़” करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ट्रंप के इसी बयान से हलचल मची थी।
ट्रंप ने लिखा, “हम अब होर्मुज जलडमरूमध्य को साफ़ करने की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं,” और यह भी दावा किया कि ईरान के सभी बारूदी सुरंग बिछाने वाले जहाजों को डुबो दिया गया है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, और ईरान की ओर से इस पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन ट्रंप के बयान के बाद ईरानी सेना चौकन्नी ज़रूर थी। 

इस्लामाबाद में बातचीत के दौरान यह घटना अमेरिका के लिए महंगा सौदा साबित होने वाली थी। ईरान ने शनिवार सुबह ही चिन्ता जताई कि होर्मुज में जो बारूदी सुरंगे बिछी हुई थीं। वो ट्रैक नहीं हो पा रही हैं। अगर अमेरिकी युद्धपोत उसमें जाता तो कोई भी घटना हो सकती थी। इस घटना से साबित हो गया कि होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण बना हुआ है।

इस्लामाबाद में शुरू हुई बातचीत

उधर, इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए बातचीत शुरू हो चुकी है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह बातचीत मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से की जा रही है, हालांकि इसका प्रारूप अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
ईरान की न्यूज एजेंसियों फ़ार्स और तसनीम ने बताया कि प्रारंभिक स्तर पर कुछ प्रगति और लेबनान के दक्षिणी बेरूत में इसराइल के हमलों में कमी के बाद बातचीत शुरू करने का फैसला लिया गया। ईरान की पहली शर्त यही थी कि जब तक लेबनान में हमले बंद नहीं होते तब तक बातचीत शुरू नहीं की जा सकती। इसराइल ने अब हमले बंद किए हैं और 14 अप्रैल को वो लेबनान से बातचीत करने जा रहा है।

क्षेत्र में तनाव चरम पर

फुजैराह के पास अमेरिकी पोत की वापसी और ट्रंप के आक्रामक बयान ऐसे समय पर आए हैं जब पूरा क्षेत्र बेहद संवेदनशील स्थिति में है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है, और यहां किसी भी सैन्य टकराव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इस बीच, सभी निगाहें अब इस्लामाबाद में चल रही बातचीत पर टिकी हैं। जहां यह तय होगा कि हालिया घटनाएं युद्ध की ओर बढ़ेंगी या कूटनीति कोई रास्ता निकाल पाएगी।