राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को फॉक्स न्यूज़ को बताया कि ईरान ने शुरू में उनसे देश के ऊर्जा संयंत्रों पर अमेरिकी हमलों को सात दिनों के लिए रोकने का अनुरोध किया था। लेकिन हमने उन्हें 10 दिन का समय दिया। जिससे अब 6 अप्रैल तक हमले नहीं होंगे। ट्रंप ने कहा, “उन्होंने मेरे लोगों के माध्यम से मुझसे बहुत विनम्रता से कहा, ‘क्या हमें और समय मिल सकता है?’ क्योंकि हम कल रात की बात कर रहे हैं, जो बहुत जल्दी है, और अगर वे नहीं मानते हैं, तो मैं उनके बिजली संयंत्रों को नष्ट कर दूंगा।” उन्होंने आगे कहा, “उन्होंने सात दिन का समय मांगा था, और मैंने कहा, ‘मैं आपको 10 दिन का समय दे रहा हूं,’ क्योंकि उन्होंने मुझे जहाज दिए थे।”
जब ट्रंप ने पहली बार ईरानी ऊर्जा संयंत्रों पर हमले की धमकी दी थी, तो उन्होंने कहा था कि ईरान के पास होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए केवल 48 घंटे हैं। फिर उन्होंने उस समय सीमा को पांच दिन आगे बढ़ाकर शुक्रवार तक कर दिया, और अब इसे फिर से आगे बढ़ा दिया।

हूतियों ने लाल सागर में कोई रोक नहीं लगाई

हमले की आशंकाओं के बावजूद यमन के लड़ाका फोर्स हूतियों का कहना है कि लाल सागर में जहाजों का आवागमन रोकने का कोई कारण नहीं है। ईरान समर्थक हूतियों ने लाल सागर में जहाजों पर संभावित हमलों को लेकर जताई जा रही चिंताओं को कम करके आंका है। उनका कहना है कि चिंता की कोई बात नहीं है, हालांकि ऐसी आशंकाएं हैं कि अगर अमेरिका खारग द्वीप पर कब्जा कर लेता है तो ईरान हूतियों को लाल सागर में मोर्चा संभालने के लिए कह सकता है। लाल सागर में जहाजों का प्रबंधन करने वाली हूती संस्था, मानवीय संचालन समन्वय केंद्र (एचओसीसी) ने आश्वासन दिया है कि तेल टैंकरों सहित दर्जनों जहाज प्रतिदिन बाब अल मंडेब जलडमरूमध्य से गुजरते हैं, और यमन जहाजों और मुक्त व्यापार की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

ईरान पर लगातार हमले, इसलिए 10 दिनों के ऑफर में उनकी दिलचस्पी नहीं

अल जज़ीरा के रिपोर्टर ने तेहरान से खबर दी है कि ईरान के कम से कम नौ शहरों पर लगातार बमबारी हो रही है। सबसे भीषण बमबारी तेहरान पर हुई है। यह सिलसिला दिन-रात जारी रहा। यह ऐसे समय में हुआ है जब राष्ट्रपति ट्रंप ने समय सीमा को 10 दिनों के लिए और बढ़ा दिया है। ईरानी इस स्थिति को देख रहे हैं और उन्हें लगता है कि उन्हें दो विरोधाभासी संदेश भेजे जा रहे हैं। एक संदेश शांति की बात करता है और दूसरा कार्रवाई का, भारी बमबारी के रूप में। वे शब्दों की बजाय हमलों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, देख रहे हैं और सुन रहे हैं।किसी को कुछ नहीं पता कि पर्दे के पीछे क्या चल रहा है। बता दें कि ईरान ट्रंप के 15 सूत्री प्रस्ताव को खारिज कर चुका है।
अमेरिका और इसराइल के हवाई हमले में ईरान के पश्चिमी अज़रबैजान प्रांत की राजधानी उर्मिया में एक रिहायशी इमारत को निशाना बनाया गया है। यह सीधा मिसाइल हमला था। पश्चिमी अज़रबैजान के संकट प्रबंधन महानिदेशक हामेद सफारी ने इरना समाचार एजेंसी को बताया कि "चार रिहायशी इमारतें पूरी तरह से नष्ट हो गईं" और पुष्टि की कि हमले में "कई नागरिक मारे गए और घायल हुए"।
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ईरान ने मिडिल ईस्ट के होटलों को चेतावनी दी

ईरान ने मिडिल ईस्ट के होटल संचालकों को बड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगर अमेरिकी सैन्य कर्मियों को ठहराने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले होटल और अन्य नागरिक आवास ऐसी गतिविधियां जारी रखते हैं, तो उन्हें "वैध टारगेट" माना जाएगा। ईरान की फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने "विश्वसनीय सूत्रों" का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिकी कर्मियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले स्थान बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात तक ही सीमित नहीं हैं। एजेंसी ने आरोप लगाया कि सीरिया, लेबनान और जिबूती सहित क्षेत्र के अन्य हिस्सों में विदेशी सेनाओं के लिए वैकल्पिक आवास स्थलों की पहचान की गई है। ईरानी सेना (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर) के करीबी फ़ार्स द्वारा उद्धृत सूत्रों ने कहा कि होटल संचालकों को ईरान की चेतावनी "व्यापक और स्पष्ट" है। एजेंसी ने जोर देकर कहा कि विदेशी सैन्य कर्मियों की मेजबानी करने वाला कोई भी आवास "चाहे वह किसी भी जगह पर स्थित हो" - एक वैध टारगेट माना जाएगा। 
इससे पहले गुरुवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिकी सैनिक खाड़ी के अरब देशों में स्थित सैन्य ठिकानों से निकलकर होटलों और दफ्तरों में ठहरे हुए हैं। अरागची ने लिखा, "इस युद्ध की शुरुआत से ही अमेरिकी सैनिक जीसीसी के सैन्य ठिकानों से भागकर होटलों और दफ्तरों में छिप रहे हैं।" उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना जीसीसी नागरिकों को "मानव ढाल" के रूप में इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने खाड़ी देशों के होटलों से अमेरिकी सैन्य कर्मियों को कमरे न देने का आग्रह किया।