यूएस राष्ट्रपति ट्रंप ने 1987 से ही ईरान को लेकर अपनी गतिविधियां शुरू कर दी थीं। उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स में विज्ञापन दिया था, गार्डियन में इंटरव्यू दिया था। व्हाइट हाउस प्रवक्ता कैरोलीन लेविट ने 1988 के इंटरव्यू की जानकारी दी है। पढ़िए नया खुलासा और ईरान की तैयारीः
क्या अमेरिका वाकई ईरान से युद्ध खत्म करने जा रहा है। क्योंकि एक तरफ पाकिस्तान में इसी हफ्ते युद्ध विराम पर अमेरिका ईरान में बात होने वाली है। दूसरी तरफ मिडिल ईस्ट में अमेरिका अपने सैनिक बढ़ाता जा रहा है। रोज़ाना नई संख्या सामने आ जाती है। लेकिन अब जो खुलासा हुआ है, उसके मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप का लंबे समय से यह सपना रहा है कि अमेरिका ईरान के खार्ग द्वीप पर कब्जा करे। ट्रंप का 38 साल पुराना बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है, जिसमें उन्होंने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर ईरान ने अमेरिकी जहाज या सैनिकों पर एक गोली भी चलाई तो वे खार्ग द्वीप पर भारी हमला कर देंगे।
ट्रंप ने 1988 में ब्रिटिश अखबार द गार्डियन को दिए इंटरव्यू में कहा था, "मैं ईरान के साथ सख्ती बरतूंगा। उन्होंने हमें मनोवैज्ञानिक रूप से हराया है और हमें मूर्ख बनाकर रखा है। अगर हमारे किसी सैनिक या जहाज पर एक गोली भी चली तो मैं खार्ग द्वीप पर जाकर कब्जा कर लूंगा। ईरान इराक को भी नहीं हरा पा रहा है, फिर भी अमेरिका को धमकाता है।"
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने ट्रंप के 1988 के इंटरव्यू को शेयर करते हुए लिखा, "राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के मुद्दे पर अपने पूरे जीवन में उल्लेखनीय रूप से सही रहे हैं। जो कोई भी इससे इनकार करता है, वह ध्यान नहीं दे रहा है।"
ट्रंप ने 1987 में न्यूयॉर्क टाइम्स, वाशिंगटन पोस्ट और बोस्टन ग्लोब जैसे प्रमुख अखबारों में पूरे पन्ने का विज्ञापन दिया था, जिस पर उन्होंने लगभग 95,000 डॉलर खर्च किए थे। उस विज्ञापन में उन्होंने उस समय की अमेरिकी विदेश नीति की आलोचना करते हुए कहा था कि अमेरिका दूसरे देशों के जहाजों की सुरक्षा कर रहा है, जबकि जापान और सऊदी अरब जैसे सहयोगी इसमें कोई योगदान नहीं दे रहे।
अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच चल रहे मौजूदा युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिका ने पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को 15 सूत्रीय शांति योजना भेजी है। पाकिस्तान इस संघर्ष में मध्यस्थता की पेशकश कर रहा है। युद्धविराम की कोशिशों के बीच ट्रंप का पुराना बयान सामने आ जाना, एक तरह पूरी दुनिया को संकेत दिया जा रहा है कि ट्रंप की ईरान नीति में कोई बदलाव नहीं आया है।
वर्तमान युद्ध में अमेरिकी सेना ने खार्ग द्वीप पर ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। इसके बाद ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा था, "हमने खार्ग द्वीप पर सब कुछ तबाह कर दिया है, सिवाय तेल पाइपलाइनों के। हमारी हथियार दुनिया के सबसे शक्तिशाली और एडवांस हैं, लेकिन शालीनता के कारण मैंने द्वीप की तेल सुविधाओं को पूरी तरह नष्ट नहीं किया। हालांकि, अगर ईरान या कोई अन्य देश हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की मुक्त और सुरक्षित आवाजाही में बाधा डालता है, तो मैं इस फैसले पर तुरंत पुनर्विचार करूंगा।"
खार्ग पर ईरान की भी कम तैयारी नहीं है
रॉयटर्स ने तेहरान की तस्नीम समाचार एजेंसी के सैन्य सूत्रों के हवाले से बताया कि ईरान खार्ग में अमेरिकी सेना का मुकाबला करने की तैयारी जोरशोर से कर रहा है। ईरान में तमाम स्थानों पर युवकों की भर्तियां चल रही हैं। ईरान की बसीज, इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) और सेना द्वारा संचालित केंद्रों पर युवकों की भारी भीड़ देखी गई है। ईरान अमेरिका के साथ संभावित ज़मीनी युद्ध के लिए दस लाख से अधिक जमीनी लड़ाकों को जुटा रहा है।
एजेंसी के अनुसार, ईरानी जमीनी लड़ाकों में अमेरिकी सैनिकों के लिए ईरानी धरती पर “दोजख” (नरक) पैदा करने का उत्साह देखा जा रहा है। ये घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आए हैं जब अमेरिकी सैन्य गतिविधियाँ जारी हैं और यूएस की प्रतिष्ठित 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के सैनिकों के कुछ ही दिनों में मिडिल ईस्ट पहुँचने की उम्मीद है, ताकि वे पहले से मौजूद हजारों मरीन सैनिकों के साथ जुड़ सकें। यानी तैयारी दोनों तरफ से है।
अमेरिका के सामने चुनौतियां कम नहीं
ईरान युद्ध अब अमेरिका पर वित्तीय और सैन्य सामग्री के स्तर पर दबाव डाल रहा है। द टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी आक्रामक और रक्षात्मक हथियारों के भंडार तेजी से कम हो रहे हैं। इससे सेना को पुराने और कम सटीक हथियारों, जिन्हें “डंब बम” कहा जाता है, का उपयोग करना पड़ सकता है। ऐसे हथियार आमतौर पर विशेष परिस्थितियों में या सीमित बजट वाली वायु सेनाओं द्वारा इस्तेमाल किए जाते हैं।
ईरान पर थोप गए युद्ध को इसी हफ्ते एक महीना पूरा हो जाएगा। अमेरिका ने युद्ध के पहले 16 दिनों में ही अमेरिका और उसके सहयोगियों ने कथित तौर पर 11,000 हथियारों का इस्तेमाल किया, जिनकी कुल लागत लगभग 26 अरब डॉलर बताई गई है। कड़े सार्वजनिक बयानों के बावजूद, बताया जा रहा है कि पाकिस्तान के शीर्ष राजनयिक के माध्यम से परोक्ष बातचीत जारी है, हालांकि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के प्रस्तावों को कथित तौर पर खारिज कर दिया है।