अमेरिका-ईरान के बीच इस्लामाबाद वार्ता से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि अमेरिका हथियार तैयार कर रहा है। वार्ता विफल हुई तो ईरान पर हमला संभव। वहीं ईरान ने लेबनान में सीजफायर की शर्त रखी। तो क्या वार्ता आगे बढ़ेगी या तनाव बढ़ेगा?
इस्लामाबाद वार्ता से कुछ घंटे पहले ईरान और अमेरिका के बीच तनातनी चरम पर है। पाकिस्तान में वार्ता के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के रवाना होने के बाद ट्रंप ने चेताया है कि यदि ईरान से वार्ता विफल होती है तो जहाजों में हथियार लोड किए जा रहे हैं। वहीं, ईरान ने इस वार्ता से पहले ही दो शर्तें रख दी हैं और कहा है कि लेबनान में युद्धविराम और ईरान की ब्लॉक संपत्तियों को छोड़ने के बाद ही वार्ता हो पाएगी। वार्ता से पहले दोनों पक्षों के बीच तनातनी है, लेकिन पाकिस्तान ने बातचीत के लिए इस्लामाबाद में कड़े सुरक्षा उपाय किए हैं।
ट्रंप की चेतावनी
इस्लामाबाद में कैसी तैयारी है, इसको जानने से पहले यह जान लें कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्या चेतावनी दी है। उन्होंने चेताया है कि अगर पाकिस्तान में चल रही शांति वार्ता फेल हो गई तो अमेरिकी युद्धपोतों को सबसे बेहतरीन हथियारों और गोला-बारूद से लोड किया जा रहा है। वे ईरान पर फिर से हमले के लिए पूरी तरह तैयार हैं। न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, 'हम जहाजों को लोड कर रहे हैं। हम उन्हें सबसे अच्छे हथियारों से भर रहे हैं, जो पहले से भी ज्यादा बेहतर हैं। अगर डील नहीं हुई तो हम उनका इस्तेमाल करेंगे और बहुत प्रभावी तरीके से करेंगे।' ट्रंप ने आगे कहा, 'हम 24 घंटे में पता लगा लेंगे। जल्द ही सब साफ हो जाएगा।' उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना लोडिंग अप कर रही है और रेस्ट ले रही है, ताकि अगली जीत के लिए तैयार रहे। ट्रंप ने ईरान पर भरोसा न करने की बात भी कही। उन्होंने कहा, 'हम ऐसे लोगों से डील कर रहे हैं जिनके बारे में हमें नहीं पता कि वे सच बोलते हैं या नहीं। वे हमारे सामने कहते हैं कि सभी न्यूक्लियर हथियार खत्म कर दिए गए, लेकिन मीडिया में जाकर कहते हैं कि हम यूरेनियम एनरिचमेंट करना चाहते हैं।'
ईरान की शर्तें सख्त
दूसरी तरफ ईरान ने साफ कह दिया है कि अमेरिका के साथ शांति वार्ता तब तक नहीं शुरू होगी, जब तक लेबनान में पूर्ण युद्धविराम नहीं हो जाता और ईरान की ब्लॉक की गई संपत्तियां नहीं छोड़ दी जातीं। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने एक्स पर लिखा, 'दोनों पक्षों के बीच तय हुए दो महत्वपूर्ण कदम अभी लागू नहीं हुए हैं– लेबनान में युद्धविराम और ईरान की ब्लॉक संपत्तियों को छोड़ना। ये दोनों बातें वार्ता शुरू होने से पहले पूरी होनी चाहिए।'ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने भी कहा कि अमेरिका को अपने वादे निभाने चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि लेबनान पर इसराइल के हमले अगर जारी रहे तो पूरा युद्धविराम समझौता टूट सकता है।
ईरान की दसियों अरब डॉलर की संपत्तियां विदेशी बैंकों में ब्लॉक पड़ी हैं। ये पैसे मुख्य रूप से तेल और गैस बेचने से आए थे। अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से ईरान इन पैसों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
जेडी वेंस इस्लामाबाद में
ट्रंप के इस बयान से पहले अमेरिकी वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के लिए निकल गए। वे ईरान के साथ शांति वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं। वेंस ने रवाना होते समय कहा, 'हम वार्ता की उम्मीद कर रहे हैं। मुझे लगता है यह अच्छी रहेगी।'अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस
वेंस ने ट्रंप के हवाले से कहा कि अगर ईरान अच्छे विश्वास से बात करेगा तो अमेरिका भी खुले दिल से बात करेगा। लेकिन अगर ईरान 'खेलने' की कोशिश करेगा तो अमेरिकी टीम उसका स्वागत नहीं करेगी। वेंस के साथ मध्य पूर्व के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुश्नर भी हैं। इधर, ईरान की तरफ से विदेश मंत्री अब्बास अरागची और संसद स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ वार्ता में शामिल हो सकते हैं।
इस्लामाबाद में कड़ी सुरक्षा
पाकिस्तान ने इन वार्ताओं को ‘इस्लामाबाद टॉक्स 2026’ नाम दिया है। शहर के रेड जोन को सील कर दिया गया है। सुरक्षा बहुत सख्त कर दी गई है। गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने कंट्रोल रूम बनाने की बात कही है।पाकिस्तान ने सभी डेलिगेट्स और पत्रकारों के लिए वीजा ऑन अराइवल की सुविधा दी है। उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने एयरलाइंस से अनुरोध किया है कि ऐसे लोगों को बिना वीजा बोर्डिंग पास दें। वार्ता सेरिना होटल में अप्रत्यक्ष तरीके से होगी। दोनों पक्ष अलग-अलग कमरों में बैठेंगे और पाकिस्तान बीच में प्रस्ताव लेकर जाएगा।
पाकिस्तान कर रहा है मध्यस्थता?
अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता से दो हफ्ते का युद्धविराम चल रहा है। यह युद्धविराम ट्रंप की समय सीमा खत्म होने से ठीक पहले घोषित किया गया था। अमेरिका ने 15 सूत्री शांति प्रस्ताव दिया था, जिसे ईरान ने ठुकरा दिया और अपनी 10 सूत्री योजना दी। दोनों पक्षों की मांगें एक-दूसरे से अलग हैं।
मुख्य मुद्दे हैं
- ईरान का यूरेनियम एनरिचमेंट बंद करना
- हार्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलना
- ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर रोक
- ईरान द्वारा समर्थित समूहों को समर्थन बंद करना
- ईरान की ब्लॉक संपत्तियां छोड़ना और प्रतिबंध हटाना
- लेबनान में इसराइल के हमले बंद करना।
वार्ता शनिवार से शुरू होने वाली है। पूरी दुनिया इन बातचीत पर नजर रखे हुए है। अगर ये बातचीत सफल हुई तो पश्चिम एशिया में शांति आ सकती है, लेकिन अगर फेल हुई तो ट्रंप के मुताबिक अमेरिका फिर से बहुत बड़े हमले कर सकता है। ईरान भी क़रारा जवाब देने की चेतावनी दे रहा है। स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है।