ईरान युद्ध के बीच इसराइली सेना आईडीएफ़ की हालत ख़राब है और यह कभी भी बिखर सकती है। यह चेतावनी ईरान या और किसी दुश्मन देश ने नहीं, बल्कि खुद बेंजामिन नेतन्याहू की सेना आईडीएफ़ के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जामिर ने दी है। उन्होंने चेताया है कि यदि सैनिकों की कमी का जल्दी समाधान नहीं किया गया तो पूरी सेना खुद ही ढह सकती है। उन्होंने सुरक्षा कैबिनेट की बैठक में यह बात कही। इसराइल के ही अख़बार जेरूसलम पोस्ट ने यह ख़बर दी है।
सुरक्षा कैबिनेट की बैठक में जनरल जामिर ने साफ़ कहा कि फ़िलहाल आईडीएफ़ को तीन नए क़ानूनों की बहुत ज़रूरत है– भर्ती का नया कानून, रिजर्व सैनिकों की ड्यूटी का कानून, और अनिवार्य सेवा की अवधि बढ़ाने का कानून। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो जल्द ही सेना अपने रोजमर्रा के कामों के लिए भी तैयार नहीं रह पाएगी और रिजर्व सिस्टम टिक नहीं पाएगा।

शांतिकाल के लिए भी सैनिक पर्याप्त नहीं?

जेरूसलम पोस्ट ने आईडीएफ़ के सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि सैनिकों की भारी कमी को लेकर बहुत बड़ी चिंता है, खासकर तब जब युद्ध चल रहा है। शांतिकाल में भी ग़ज़ा, लेबनान, सीरिया और वेस्ट बैंक की सीमाओं पर पहले से ज़्यादा सैनिकों की ज़रूरत होगी, कम नहीं। अगर सरकार ज्यादा सैनिक नहीं जोड़ती तो कई जगहों पर बड़ा खालीपन हो जाएगा।
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कुछ रिपोर्टें हैं कि इसराइल के पास क़रीब 15000 सैनिक कम हैं, जिनमें 7-8 हजार फ्रंटलाइन सैनिक शामिल हैं। इस कमी की वजह से रिजर्व सैनिकों पर भारी बोझ रहा है। इसराइल के सामने एक दिक्कत यह भी है कि मल्टी-फ्रंट वॉर है। एक तरफ़ ईरान है तो दूसरे मोर्चे पर लेबनान और हिजबुल्लाह भी हैं। ऐसे में रिजर्व ड्यूटी का लंबा समय हो गया है। अब डर है कि अगर स्थिति यही रही तो रिजर्व सैनिक टिक नहीं पाएंगे और सेना सामान्य काम भी नहीं कर पाएगी।

हरेदी युवाओं की भर्ती क्यों अटकी हुई है?

सेना में हरेदी यानी अति-रूढ़िवादी लोगों की भर्ती में उल्लेखनीय वृद्धि के लिए भी कोई कानून नहीं बनाया गया है, जिसके कारण सेना में मैन पावर की कमी बनी हुई है। इस समस्या की एक बड़ी वजह यह है कि हरेदी यानी अति-रूढ़िवादी समुदाय के युवाओं को सेना में भर्ती करने के लिए कोई मजबूत कानून अभी तक नहीं बना है। इससे पहले युद्ध शुरू होने से पहले सरकार हरेदी युवाओं की भर्ती को लागू करने वाला एक विवादित बिल तेजी से आगे बढ़ा रही थी।

आलोचकों का कहना है कि यह बिल असल में हरेदी पार्टियों को खुश करने के लिए राजनीतिक था और असरदार भर्ती नहीं करवाएगा।

जब ऑपरेशन रोअरिंग लायन शुरू हुआ तो प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि एकता बनाए रखने के लिए इस बिल को साइड पर रख दिया जाएगा और युद्ध के दौरान इसे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

विपक्ष ने की आलोचना

जनरल जामिर की इस चेतावनी के बाद विपक्षी नेताओं ने सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि हरेदी भर्ती न लागू करने और तैयारी की कमी से देश में बड़ा सुरक्षा संकट आ सकता है। येश अटिड पार्टी के सदस्यों ने विदेश मामलों और रक्षा समिति के चेयरमैन एमके बोआज बिस्मुथ को पत्र लिखा और मांग की कि तुरंत इमरजेंसी मीटिंग बुलाई जाए ताकि आईडीएफ़ में ज़्यादा सैनिक जोड़ने के उपाय किए जा सकें।
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पत्र में लिखा गया कि हरेदी भर्ती अटकाना कोई राजनीतिक झगड़ा नहीं है, बल्कि यह 'पिकुआच नेफेश' (जान बचाने का मामला) है। जेरूसलम पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, 'हमने कई बार चेतावनी दी है, अब इसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ की बात से साफ़ है कि भर्ती न होने और रिज़र्व सैनिकों पर ज़्यादा बोझ पड़ने से आईडीएफ़ अंदर से ही टूट रही है।'
विपक्ष के नेता यायर लापिड ने कहा, "अगले संकट में सरकार यह नहीं कह पाएगी कि ‘हमें पता नहीं था’। पूरी जिम्मेदारी सरकार की है।" इसराइल बेयतेनू के नेता अविग्दोर लिबरमैन ने कहा कि सबको भर्ती करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार 7 अक्टूबर के हमले जैसी आपदा से पहले चेतावनियों को नजरअंदाज करने की आदत डाल चुकी है। पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने पूछा, 'आप स्वर्ग के लिए क्या इंतजार कर रहे हैं?' उन्होंने कहा कि शास और यूनाइटेड टोराह ज्यूडिज्म पार्टियों पर निर्भर सरकार सुरक्षा नहीं दे सकती। ब्लू एंड व्हाइट के नेता बेनी गैंट्ज़ ने कहा कि सरकार मिडिल ईस्ट बदलने और युद्ध जीतने का वादा कर रही है, लेकिन असल में सामूहिक भर्ती से बच रही है और यहाँ तक कि जीतने के लिए ज़रूरी सैनिक भी सुनिश्चित नहीं कर पा रही। उन्होंने चेतावनी दी कि इस शर्म को कालीन के नीचे नहीं छिपाया जा सकता।
पूर्व आईडीएफ चीफ ऑफ स्टाफ गादी आइजनकोट ने कहा कि सभी के लिए अनिवार्य सेवा का कानून लाना समय की मांग और नैतिक जरूरत है। इससे ही इसराइल सही रास्ते पर लौटेगा।
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रिजर्विस्ट पार्टी के नेता योआज हैंडेल ने कहा, 'चीफ ऑफ स्टाफ सही कह रहे हैं। उनकी बात सुनो। जीत के लिए सैनिक चाहिए। सरकार बार-बार रिजर्व सैनिकों को रिसोर्स की तरह इस्तेमाल कर उन्हें थकाने पर उतारू है।' उन्होंने आरोप लगाया कि कैमरे के सामने भर्ती से बचने वाले कानून को फ्रीज करने का दावा किया जाता है, लेकिन हकीकत में ऐसे संस्थानों को पैसे दिए जा रहे हैं जो भर्ती से बचने को बढ़ावा देते हैं और मौजूदा कानून भी लागू नहीं किया जा रहा।

क्या होगा आगे?

इस वक्त इसराइल कई मोर्चों पर तनाव झेल रहा है। सैनिकों की कमी अगर बढ़ती गई तो सीमाओं की सुरक्षा, रोजमर्रा के ऑपरेशन और रिजर्व सिस्टम सभी पर असर पड़ेगा। विपक्ष सरकार से मांग कर रहा है कि राजनीति से ऊपर उठकर तुरंत कदम उठाए जाएं, ताकि सेना मजबूत बनी रहे और देश की सुरक्षा बनी रहे। यह चेतावनी इसराइल की सुरक्षा व्यवस्था के लिए बहुत गंभीर मानी जा रही है।