इसराइल के चैनल 12 ने शनिवार 28 फरवरी को खबर दी कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई (86 वर्ष) का महल पूरी तरह तबाह कर दिया गया है। कुछ ही देर बाद एक सैटेलाइट से खींची गई फोटो जारी की गई। जिसे तेहरान में खामनेई का महल बताते हुए पूरी तरह बर्बाद होने का दावा किया गया। रॉयटर्स ने खबर दी कि खामनेई को तेहरान के बाहर युद्ध शुरू होने से पहले ही भेज दिया गया था। जब पिछली बार ईरान और इसराइल युद्ध 12 दिन चला था तो भी खामनेई और उनरे परिवार के रूस भागने की सूचनाएं पश्चिमी मीडिया ने फैलाई थीं। शनिवार को ईरान पर इसराइल और अमेरिकी हमले ने खामनेई को संभावित निशाना बनाने की अटकलों को हवा दे दी है।

कौन हैं खामनेई

अयातुल्लाह अली खामनेई एक इस्लामी विद्वान हैं, जिन्होंने 1989 में ईरान के संस्थापक सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी के निधन के बाद यह पद संभाला। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से वे ईरान की राजनीति, सेना और न्यायपालिका पर अंतिम अधिकार रखते हैं। वे देश के आध्यात्मिक नेता भी हैं। उनकी सत्ता इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और बसिज मिलिशिया की वफादारी पर टिकी हुई है। पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका और इसराइल ने ईरान के साथ शत्रुतापूर्ण रवैया अपनाया हुआ है। उन्होंने ईरान को अमेरिका का "नंबर एक दुश्मन" और इसराइल को उसके ठीक पीछे बताया है। अमेरिका परमाणु कार्यक्रम को बर्बाद करना चाहता है।

शनिवार के हमलों में तेहरान के शेमीरान इलाके में राष्ट्रपति भवन के पास और खामनेई के परिसर के निकट सात मिसाइलें दागी गईं। एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, उनके कार्यालयों के आसपास भी हमले हुए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, खामनेई को तेहरान से सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया है और उनकी सार्वजनिक उपस्थिति कई दिनों से नहीं देखी गई।

इन हमलों का मकसद ईरान के राजनीतिक नेतृत्व को "खत्म" करना बताया जा रहा है। इसराइल के रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने कहा, "खामनेई जैसे तानाशाह, जो इसराइल को नष्ट करने का लक्ष्य रखते हैं, अब अस्तित्व में नहीं रह सकते।" प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संकेत दिया कि खामनेई की हत्या से लंबे संघर्ष का अंत हो सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमलों की घोषणा करते हुए कहा कि ये "ईरानी शासन से तत्काल खतरे को खत्म करने" के लिए हैं। उन्होंने पहले खामनेई को "आसान निशाना" बताया था और कहा था, "हम अभी उन्हें नहीं मारेंगे, कम से कम अभी नहीं।" ट्रंप ने ईरानियों से अपील की कि वे सरकार को उखाड़ फेंकें, क्योंकि यह "पीढ़ियों का एकमात्र मौका" है। अल जज़ीरा के संवाददाता अली हाशिम ने कहा कि हमले मुख्य रूप से राजनीतिक नेतृत्व को निशाना बनाने के लिए हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि खामनेई की स्थिति ईरान की स्थिरता के लिए आधार है, और उनका निशाना बनना क्षेत्रीय युद्ध को और भड़का सकता है। फिलहाल, खामेनेई की लोकेशन अज्ञात है और स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण बनी हुई है।

क्या इस बार अमेरिका-इसराइल ईरान में खामनेई को हटा पाएंगे

कई विश्लेषण (जैसे ACLED, Atlantic Council और Vox) के अनुसार, सिर्फ हवाई हमलों से पूर्ण सत्ता परिवर्तन मुश्किल है। ईरान की सेना (IRGC) और बसिज मिलिशिया की मजबूत वफादारी, साथ ही पिछले विरोध प्रदर्शनों (2025 में क्रैकडाउन) के बावजूद, शासन अभी मजबूत है। कोई बड़ा ग्राउंड इनवेजन नहीं हुआ है, और ट्रंप प्रशासन ऐसी लंबी जमीनी लड़ाई से बचना चाहता है।


अगर शासन गिरता है, तो क्षेत्र में अराजकता, शरणार्थी संकट और हथियारों का फैलाव हो सकता है। ईरान ने जवाबी हमले शुरू कर दिए हैं, जिसमें इसराइल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल दागी गई हैं। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि पूर्ण सत्ता परिवर्तन के लिए लंबी सैन्य कार्रवाई जरूरी होगी, जिसकी अमेरिका में राजनीतिक इच्छाशक्ति कम है। अभी तो अमेरिका और इसराइल सिर्फ और सिर्फ हवाई हमले के भरोसे हैं। जब तक ईरान में इसराइल और अमेरिका की जमीनी सेना नहीं जाती, तब तक किसी भी तरह का परिवर्तन मुश्किल है।

फिलहाल, हमले जारी हैं और स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण है। सत्ता परिवर्तन की संभावना मौजूद है, लेकिन यह तत्काल नहीं लगती- यह ईरानी लोगों के आंतरिक विद्रोह और लंबे संघर्ष पर निर्भर करेगी। क्षेत्रीय युद्ध का विस्तार होने का खतरा बढ़ गया है।

खाड़ी देश क्या ईरान पर हमला करेंगे

अमेरिका और इसराइल यही चाहते हैं कि ईरान के खिलाफ मिडिल ईस्ट के देश भी इसमें कूदें और ईरान पर हमला करे। खाड़ी देशों के पास अब बहाना भी है। लेकिन खाड़ी देश कम सतर्क नहीं हैं। ईरान ने पहले ही साफ कर दिया था कि अगर खाड़ के किसी भी देश का इस्तेमाल उस पर हमले के लिए हुआ तो वो उन देशों पर हमला करेगा। लेकिन ईरान ने इसका इंतज़ार किए बिना खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। अबू धामी में तो एक मौत भी हुई। मिसाइल रियाध और दुबई तक गिरीं।