बहरीन में ईरान-समर्थक प्रदर्शन और तनाव के बीच असंतोष की ख़बरें हैं। क्या यहाँ अब फिर से शिया समूहों और सरकार के बीच पुराना संघर्ष जोर पकड़ेगा?
ईरान के समर्थन में प्रदर्शन
ईरान पर हमले के बाद क्या बहरीन में अब विद्रोह की स्थिति बन रही है? कम से कम इतना तो साफ़ है कि बहरीन में तनाव बहुत बढ़ गया है। ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत के बाद यहां बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। बहरीन में शिया मुसलमान आबादी का बड़ा हिस्सा हैं और वे क़रीब 55-60% हैं, जबकि शासक परिवार सुन्नी है। शिया समुदाय ख़ामेनेई को अपना धार्मिक नेता मानता था, इसलिए उनकी मौत पर ग़ुस्सा और शोक बेहद गहरा है।
ख़ामेनेई की मौत की ख़बर आने के बाद बहरीन की सड़कों पर हजारों लोग निकल आए। ज़्यादातर प्रदर्शनकारी शिया समुदाय से हैं। वे अमेरिका और इसराइल के ख़िलाफ़ नारे लगा रहे हैं और ईरान के साथ एकजुटता दिखा रहे हैं। कई जगहों पर पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ जोरदार झड़पें हुईं। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया, आँसू गैस के गोले छोड़े और कई लोगों को गिरफ्तार किया।
स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिनमें लोग काले कपड़े पहने शोक मना रहे हैं और सड़कों पर मार्च कर रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि प्रदर्शनकारी ईरान के हमलों का समर्थन कर रहे हैं, क्योंकि ईरान ने बहरीन में अमेरिकी नौसेना के बेस पर जवाबी हमले किए हैं।
झड़पों की शुरुआत
रिपोर्ट है कि बहरीन के सीट्रा द्वीप पर ईरान समर्थक प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हो गई हैं। ईरान समर्थक लोग ईरान के हमलों का समर्थन कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हाथापाई हो गई। तुर्की टुडे की रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया पर इन झड़पों की तस्वीरें और वीडियो तेजी से फैल गए। इनमें प्रदर्शनकारी नारे लगा रहे हैं और सुरक्षा बल उन्हें रोकने की कोशिश कर रहे हैं।
सुरक्षा बलों ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया है कि खाड़ी सहयोग परिषद यानी जीसीसी से जुड़ी पेनिनसुला शील्ड फोर्स की यूनिट सऊदी अरब से बहरीन में दाखिल हुई है। ये फोर्स सुरक्षा बलों की मदद के लिए आई है। लेकिन सऊदी अरब और बहरीन की सरकार ने इस पर कोई बयान नहीं दिया है।
बहरीन के गृह मंत्रालय का बयान
तुर्की टुडे की रिपोर्ट के अनुसार बहरीन के गृह मंत्रालय ने एक लिखित बयान में कहा है कि उन्होंने उन लोगों को गिरफ्तार किया है जो सार्वजनिक सुरक्षा को ख़तरा पैदा कर रहे थे। मंत्रालय के मुताबिक़, कुछ गिरफ्तार लोग ईरान के हमलों के समर्थन में वीडियो शेयर कर रहे थे। ईरान के हमलों की शुरुआत से ही साइबरक्राइम विभाग ऐसे लोगों पर नज़र रख रहा था।
रिपोर्ट के अनुसार मंत्रालय ने यह भी बताया कि कुछ लोगों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके फर्जी वीडियो बनाए। इन वीडियो में घरों को ऐसा दिखाया गया जैसे वे क्षतिग्रस्त हो गए हों। ये वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए गए थे, जिससे लोगों को गुमराह करने और डराने की कोशिश की गई। मंत्रालय ने कहा कि ऐसे अपराधों से सख्ती से निपटा जाएगा।ईरान का दावा: अमेरिकी बेस पर हमला
ईरान की आईआरजीसी ने कहा है कि उन्होंने बहरीन में अमेरिकी एयर बेस पर बड़ा हमला किया। आईआरएनए ने टेलीग्राम पर पोस्ट किया कि आईआरजीसी की नौसेना ने सुबह के समय ड्रोन और मिसाइल से हमला किया। हमले का निशाना बहरीन के शेख ईसा इलाके में अमेरिकी एयर बेस था। हालांकि, ईरान ने इस दावे का कोई सबूत नहीं दिया। हमले के बाद बहरीन में सायरन बजने लगे और हवाई रक्षा प्रणाली चालू हो गई। लोगों ने विस्फोटों की आवाजें सुनीं। सऊदी अरब और कतर में भी हमले हुए।
ये सारी घटनाएँ अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से हो रही हैं। ईरान का कहना है कि उसके हमले अमेरिका और इसराइल के हमलों का जवाब हैं। बहरीन में ईरान समर्थक प्रदर्शनकारी ईरान के साथ खड़े हैं, जबकि सरकार अमेरिका के साथ है। बहरीन में अमेरिकी एयर बेस है, जो खाड़ी क्षेत्र में अहम है।
बहरीन में विरोध तेज क्यों?
बहरीन एक छोटा द्वीप देश है, जहां कुल आबादी में शिया मुसलमानों की संख्या ज्यादा है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार बहरीन के नागरिकों में शिया 55 से 60% तक हो सकते हैं। बाकी सुन्नी हैं। शासक अल खलीफा परिवार सुन्नी है और सऊदी अरब का मजबूत समर्थन पाता है। 2011 में भी यहां बड़े विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिन्हें सऊदी सेना की मदद से दबाया गया था। सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि अब फिर वही स्थिति बनती दिख रही है।
क्या सऊदी अरब की सेना भेजी गई?
स्थिति बिगड़ने पर बहरीन में कथित तौर पर बाहरी सेना भेजे जाने की रिपोर्ट है। ये सेना प्रदर्शनकारियों को काबू करने और सुरक्षा बलों की मदद करने के लिए आई है। हालाँकि, सऊदी अरब की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। तुर्की टुडे ने रिपोर्ट दी है कि ऑनलाइन चल रहे पोस्टों में दावा किया गया कि गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल से जुड़ी पेनिनसुला शील्ड फोर्स की यूनिट्स सिक्योरिटी फोर्सेस को सपोर्ट करने के लिए सऊदी अरब से बहरीन में घुसी हैं। सऊदी अरब और बहरीन ने इस मामले पर कोई बयान जारी नहीं किया है।
कई देशों में ईरान के समर्थन में प्रदर्शन
ख़ामेनेई की मौत के बाद सिर्फ बहरीन ही नहीं, पाकिस्तान, इराक, लेबनान, भारत के कुछ हिस्सों और अन्य जगहों पर भी शिया समुदाय में शोक और गुस्से की लहर है। कई देशों में प्रदर्शन हुए, कुछ जगहों पर हिंसा भी। ईरान ने जवाब में कई जगहों पर हमले किए, जिससे पूरा खाड़ी क्षेत्र अशांत है।
बहरहाल, बहरीन सरकार ने कहा है कि वह कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठा रही है। अभी स्थिति बहुत नाजुक है। अगर प्रदर्शन और बढ़े तो और बड़े संघर्ष की आशंका है।