डोनाल्ड ट्रंप ने अब ईरान के साथ युद्धविराम के 'ख़त्म' होने की घोषणा कर दी है। ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व पर हमला किया और उन्हें 'बेकार', 'झूठा', 'हिंसक' व 'खतरनाक' करार देते हुए कहा कि ईरान के साथ हुआ अंतरिम युद्धविराम अब ख़त्म हो चुका है। हालाँकि, इसके साथ ही उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के वार्ताकार बातचीत जारी रख सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों में हलचल मच गई। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया, जबकि भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट दर्ज की गई।

अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप का यह बयान तब आया है जब अमेरिका ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तीन वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। तुर्की में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने साफ़ शब्दों में कहा, 'मेरे लिए ईरान के साथ हुआ समझौता खत्म हो चुका है। अब मैं उनके साथ कोई बातचीत नहीं करना चाहता।' हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के वार्ताकार बातचीत जारी रख सकते हैं, लेकिन उनके अनुसार अब इस बातचीत का कोई मतलब नहीं रह गया है।
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ईरानी नेताओं को 'ख़तरनाक' बताया

ट्रंप ने ईरान के शीर्ष नेताओं पर बेहद कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, 'वे बेहद खतरनाक लोग हैं। अगर उनके पास परमाणु हथियार होंगे तो वे उनका इस्तेमाल ज़रूर करेंगे। वे झूठ बोलते हैं और उनके साथ बातचीत करना समय की बर्बादी है।' उनके इस बयान को हाल के महीनों में अमेरिका की ओर से ईरान के ख़िलाफ़ सबसे कड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।

'एक शॉट' में खत्म कर सकते हैं'

कुछ दिन पहले ही अली खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में देश के शीर्ष नेता एक ही जगह मौजूद हैं और अमेरिका चाहे तो उन्हें 'एक ही शॉट में खत्म कर सकता है।' हालाँकि ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ऐसा नहीं करेगा, क्योंकि वह बातचीत चाहते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने एक अमेरिकी न्यूज़ वेबसाइट Axios को दिए इंटरव्यू में कहा था, 'वे सभी वहां मौजूद हैं। एक ही शॉट में हम उन सभी को खत्म कर सकते हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि फिर बातचीत करने के लिए कोई नहीं बचेगा। वे समझौता करने के लिए बेताब हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम संस्कार की रस्में पूरी होने तक दोनों पक्षों ने बातचीत से एक सप्ताह का विराम लेने का फ़ैसला किया है और इस दौरान कोई भी पक्ष हमला नहीं करेगा।

हॉर्मुज में टैंकरों पर हमलों के बाद बढ़ा तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव उस समय और बढ़ गया जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तीन वाणिज्यिक जहाजों पर हमले हुए। इनमें कतर का एलएनजी जहाज अल-रेकैय्यात, सऊदी अरब का तेल टैंकर और एक अन्य व्यापारिक जहाज शामिल था। अमेरिका ने इन हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि ईरान ने इन आरोपों को खारिज कर दिया।

हमलों के जवाब में अमेरिकी सेना ने मंगलवार रात ईरान के 80 से अधिक सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की। इन हमलों में कथित तौर पर एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल लॉन्चिंग साइट, ड्रोन बेस, समुद्री निगरानी केंद्र और बंदरगाहों के सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया गया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यह मई के बाद ईरान पर सबसे बड़ा सैन्य अभियान था।

ईरान ने भी किया पलटवार

अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान की सेना रिवोल्यूशनरी गार्ड यानी IRGC ने जवाबी हमला करते हुए बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। ईरान ने यह भी दावा किया कि उसने एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन मार गिराया है। हालाँकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

तेल की क़ीमतों में तेज उछाल

ट्रंप के युद्धविराम ख़त्म होने के बयान और बढ़ते सैन्य तनाव के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की क़ीमतों में तीन प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। जानकारों का कहना है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस की आपूर्ति होती है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का सैन्य संघर्ष वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है।

सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। तेल की बढ़ती क़ीमतों और वैश्विक अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने बिकवाली शुरू कर दी, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। दिन में एक समय तो सेंसेक्स में 1700 अंकों की गिरावट आ गई थी।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था, महंगाई और पेट्रोल-डीजल की क़ीमतों पर भी पड़ सकता है।

परमाणु वार्ता पर भी संकट!

कुछ सप्ताह पहले ही अमेरिका और ईरान ने युद्ध रोकने के लिए एक अंतरिम समझौता किया था। पिछले सप्ताह दोनों देशों के अधिकारी कतर में परमाणु कार्यक्रम को लेकर अप्रत्यक्ष बातचीत भी कर चुके थे। लेकिन ताजा सैन्य कार्रवाई और ट्रंप के बयान के बाद उस प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

माना जा रहा है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। तेल की कीमतों, वैश्विक व्यापार, समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि दोनों देश आगे कूटनीतिक रास्ता अपनाते हैं या सैन्य टकराव और तेज होता है।