यूएस राष्ट्रपति ट्रंप का दावा है कि पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने उनसे कहा था कि अगर उन्होंने दखल न दिया होता तो 'ऑपरेशन सिंदूर' में 3.5 करोड़ लोग मारे जाते। सवाल ये है कि भारत के खंडन के बावजूद ट्रंप ऐसा दावा बार-बार क्यों कर रहे हैं।
यूएस राष्ट्रपति ट्रंप स्टेट ऑफ द यूनियन को संबोधित करते हुए
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच "परमाणु युद्ध" सहित कुल आठ युद्धों को रोका है। हालांकि, इस बार उन्होंने एक नया और चौंकाने वाली बात जोड़ी। ट्रम्प ने दावा किया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने उनसे कहा था कि यदि ट्रम्प दखल नहीं देते, तो 'ऑपरेशन सिंदूर' (Operation Sindoor) के दौरान 3.5 करोड़ (35 million) लोग मारे जा सकते थे।
अपने दूसरे कार्यकाल के पहले 'स्टेट ऑफ द यूनियन' संबोधन के दौरान ट्रम्प ने कहा: "अपने पहले 10 महीनों में, मैंने आठ युद्ध समाप्त किए... पाकिस्तान और भारत के बीच परमाणु युद्ध होने वाला था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर मेरा हस्तक्षेप नहीं होता, तो 3.5 करोड़ लोग मारे जाते।"
ट्रम्प का कहना है कि उन्होंने इसराइल-हमास, इसराइल-ईरान, मिस्र-इथियोपिया, भारत-पाकिस्तान, सर्बिया-कोसोवो, रवांडा-कांगो, आर्मेनिया-अजरबैजान और कंबोडिया-थाईलैंड के बीच संघर्षों को सुलझाया है।
भारत ने ट्रम्प के मध्यस्थता के दावों को सिरे से खारिज किया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चुटकी लेते हुए कहा था कि जब यह संघर्ष चल रहा था, तब "अमेरिका, अमेरिका में ही था।" लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने अभी तक ट्रम्प के इन दावों पर एक बार भी नाराज़गी जताते हुए ट्रम्प को चुप रहने को नहीं कहा।
पिछले साल पहलगाम में 26 पर्यटकों की हत्या के बाद, भारत ने 7 मई को पाकिस्तान और PoK में आतंकी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के लिए 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया था।
ट्रम्प के इस बयान ने पाकिस्तान को असहज कर दिया है, क्योंकि पाकिस्तान ने ही पिछले साल ट्रम्प को उनके "राजनयिक हस्तक्षेप" के लिए नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया था।
ट्रम्प ऐसी हरकत क्यों कर रहे हैं
ट्रम्प अपनी छवि एक ऐसे नेता के रूप में बनाना चाहते हैं जो पारंपरिक कूटनीति के बजाय अपनी "पर्सनल डीलिंग" से दुनिया को विनाश से बचा सकता है। 3.5 करोड़ जैसे बड़े आंकड़े का इस्तेमाल उनके प्रभाव को और अधिक नाटकीय (Dramatic) बनाता है। ट्रम्प यह संदेश देना चाहते हैं कि उनके नेतृत्व में अमेरिका को अनावश्यक विदेशी युद्धों में पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वे केवल अपनी बातों से ही युद्ध रुकवा सकते हैं। यह उनके समर्थकों के बीच बहुत लोकप्रिय विचार है।
यह कोई रहस्य नहीं है कि ट्रम्प नोबेल शांति पुरस्कार पाने के इच्छुक रहे हैं। पाकिस्तान द्वारा उनके नामांकन और भारत-पाक जैसे जटिल मुद्दे पर सफलता का दावा करना इस पुरस्कार के लिए उनके मामले को मजबूत करने की एक कोशिश हो सकती है।
क्या ध्यान भटकाने के लिए ये बयान आया है
जब भी ट्रम्प को घरेलू मोर्चे पर आलोचना का सामना करना पड़ता है, वे अक्सर अपनी वैश्विक "उपलब्धियों" का बखान करते हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध रोकने का दावा करना किसी भी राष्ट्रपति के लिए इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक गिनी जाएगी। लेकिन ऐसा दावा कितनी बार किया जाना चाहिए। भारत में विपक्षी दलों के मुताबिक ट्रम्प अभी तक 80 बार से ज्यादा भारत-पाकिस्तान युद्ध रुकवाने का दावा कर चुके हैं।
ट्रम्प की शैली रही है कि वे आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं। भारत और पाकिस्तान ने हमेशा द्विपक्षीय बातचीत (Bilateral talks) पर जोर दिया है, लेकिन ट्रम्प खुद को इस समीकरण के केंद्र में रखकर अपनी विशिष्टता साबित करना चाहते हैं।
जहाँ भारत इन दावों को "काल्पनिक" मानकर खारिज कर रहा है, वहीं ट्रम्प के ये बयान पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक रूप से शर्मिंदगी का कारण बन रहे हैं, क्योंकि यह उसकी सैन्य कमजोरी और अमेरिका पर निर्भरता को दर्शाती है।