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खुद को 'चोरों का सरदार' कहने वाले मंत्री बयान पर कायम  

खुद को चोरों का सरदार बताने वाले बिहार के कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने कहा है कि वो अपने बयान पर कायम हैं। मंत्री ने मंगलवार 13 सितंबर को मीडिया से कहा- मैंने जो कहा है, मैं उस पर कायम हूं। मैं अपने बयान में संशोधन नहीं कर रहा हूं। इससे आगे मुझे कुछ नहीं कहना है। लोगों ने मुझे चुना है और उनके लिए लड़ना जारी रखेंगे।
कैमूर में एक रैली को संबोधित करते हुए मंत्री सुधाकर सिंह ने सोमवार को कहा था- हमारे (कृषि) विभाग का एक भी विंग ऐसा नहीं है जो चोरी के कामों को नहीं करता हो। चूंकि मैं विभाग का प्रभारी हूं, मैं उनका सरदार (प्रमुख) हूं ... मेरे ऊपर और भी कई लोग हैं।
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मंत्री यहीं नहीं रुके। सुधाकर सिंह ने कहा - सरकार बदल गई है, लेकिन काम करने का तरीका वही रहा। सब कुछ पहले जैसा ही है। बिहार राज्य बीज निगम ने किसानों को राहत देने के नाम पर करीब 200 करोड़ रुपये का गबन किया है। जिन किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले धान की खेती करनी है, वे बिहार राज्य बीज निगम से धान के बीज न लें।किसानों को राहत देने के बजाय, बीज निगमों ने 100-150 करोड़ रुपये चुरा लिए। सरकार तो काम कर रही है लेकिन क्षेत्र के लोगों की स्थिति शायद ही बदली।

कृषि मंत्री ने कहा कि अब जिले से दो मंत्री हैं। उसके बाद भी हालात नहीं बदले तो मंत्री बनने का क्या फायदा। कैमूर जिला भ्रष्ट अधिकारियों से भरा पड़ा है।

गौरतलब है कि बिहार के कृषि मंत्री सुधाकर सिंह इससे पहले 'चावल गबन' को लेकर विवादों में आ चुके हैं।

सुधाकर सिंह राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के बेटे हैं, जो बिहार के एक प्रमुख नेता हैं। सुधाकर सिंह बक्सर की रामगढ़ सीट से विधायक हैं। 2013 में नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में मंत्री रहते हुए चावल घोटाले के आरोप हैं। नई महागठबंधन सरकार में सिंह के मंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद, बीजेपी ने इस मामले को लेकर गठबंधन सरकार पर हमला किया।
बीजेपी के आरोपों पर सुधाकर सिंह ने कहा कि उन्हें मामले में अदालत के आदेश को देखना चाहिए। आरोप हमेशा लगाए जाते हैं लेकिन हमेशा सच नहीं होते हैं। चावल घोटाला, अगर हुआ, तो उनके शासन में हुआ। उन्होंने इसे तब क्यों नहीं उठाया? बता दें कि बीजेपी कृषि मंत्री सुधाकर सिंह पर जिस चावल घोटाले का आरोप लगा रही है, उस समय बिहार में जेडीयू-बीजेपी की मिली-जुली सरकार थी।

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क़मर वहीद नक़वी
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