अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों को लेकर फैजाबाद बार एसोसिएशन (Faizabad Bar Association) के वकीलों ने गुरुवार (2 जुलाई 2026) को अयोध्या में एक बड़ा विरोध मार्च निकाला। वकीलों ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा और निर्माण कार्य से जुड़े गोपाल राव के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग को लेकर पुलिस को लिखित शिकायत सौंपी है। हालांकि पुलिस ने वकीलों के मार्च की कोशिश को रोकना चाहा, लेकिन रोक नहीं पाई। चंपत राय के खिलाफ अयोध्या में यह पहला प्रदर्शन था। वकील इससे पहले चंपत राय को अयोध्या छोड़ने का अल्टीमेटम दे चुके हैं। अयोध्या में इस मुद्दे पर आंदोलन का माहौल बनता जा रहा है।
इस शिकायत में चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के अलावा ट्रस्टी कृष्ण मोहन को भी आरोपी बनाया गया है। वकीलों के इस प्रदर्शन के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा, जिससे पुलिसकर्मियों को भीड़ पर काबू पाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ तत्काल मामला दर्ज नहीं किया, तो वे एक बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।
वकीलों ने कोर्ट परिसर से राम जन्मभूमि पुलिस स्टेशन तक मार्च किया। उन्होंने नारे लगाए और ट्रस्ट के सीनियर अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने और आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की। पुलिस स्टेशन में, कई वकील स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) के ऑफिस में मीडियाकर्मियों के साथ जमा हुए और तुरंत केस दर्ज करने की मांग की। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को शांत करने की कोशिश की और भरोसा दिलाया कि शिकायत की जांच की जाएगी और कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी।
ताज़ा ख़बरें
पत्रकारों से बात करते हुए मिश्रा ने कहा कि एसोसिएशन ने राम मंदिर के चंदे में कथित हेराफेरी को लेकर राय, मिश्रा और राव के खिलाफ FIR की मांग की है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। राव मंदिर के निर्माण कार्य से जुड़े हैं। मिश्रा ने PTI को बताया, "एक लिखित शिकायत दी गई है। पांच लोग शिकायत की हार्ड कॉपी लेने गए हैं। अगर वे कॉपी नहीं देते हैं, तो विरोध जारी रहेगा। पुलिस ने कहा है कि कार्रवाई की जाएगी और मामले को लेकर पूरा भरोसा दिलाया है। FIR में चंपत राय, अनिल मिश्रा, गोपाल राव और कृष्ण देव शामिल हैं। अभी के लिए, हम देखेंगे कि कोतवाली राम जन्मभूमि पुलिस स्टेशन में क्या कार्रवाई होती है।"
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पुलिस आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज करने में नाकाम रहती है तो बार एसोसिएशन आंदोलन शुरू करेगा।इस रिपोर्ट को लिखे जाने तक पुलिस ने शिकायत पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। मंदिर के चंदे के फंड को लेकर विवाद 7 जून को शुरू हुआ, जब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने चंदे के मैनेजमेंट में हेराफेरी का आरोप लगाया। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने 23 जून को अपनी शुरुआती रिपोर्ट सौंपी। इसके बाद 25 जून को FIR दर्ज की गई और मंदिर के चंदा गिनने की प्रक्रिया से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। यूपी सरकार ने अब एसआईटी जांच का समय 15 जुलाई तक बढ़ा दिया है। 

कांग्रेस ने पीएम मोदी से सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की

इस बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल (KC Venugopal) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर इस पूरे 'महा-घोटाले' की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की है। वेणुगोपाल ने एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा:"अयोध्या राम मंदिर में हुई बड़े पैमाने पर 'चंदा चोरी' ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। करोड़ों मासूम श्रद्धालुओं ने भगवान राम के नाम पर अपनी मेहनत की कमाई दान की थी। जिन्हें 'मर्यादा पुरुषोत्तम' के रूप में जाना जाता है, उनके नाम का उन लोगों द्वारा दुरुपयोग और अपमान किया गया है जो खुद को हिंदू धर्म का रक्षक बताते हैं।"

एसआईटी जांच खारिज किया

उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आगे कहा:"अयोध्या राम मंदिर का निर्माण सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हुआ था, जिसमें सरकारी जमीन का उपयोग किया गया और भारत सरकार द्वारा एक सार्वजनिक ट्रस्ट का गठन किया गया। इसलिए मंदिर के प्रशासन में जो कुछ भी होता है, उसकी पूरी जिम्मेदारी पूरी तरह से केंद्र सरकार की है। विभिन्न हलकों से चोरी को लेकर मिल रही कई चेतावनियों को बार-बार नजरअंदाज किया गया और शीर्ष पदों पर बैठे लोगों ने जानबूझकर आंखें मूंद लीं, जिससे करोड़ों रुपयों की लूट हुई।"एसआईटी की जांच को खारिज करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा:"अब तक हमने जो भी एसआईटी (SIT) की कार्रवाई देखी है, वह महज एक दिखावा और आंखों में धूल झोंकने जैसा है, जिसे स्पष्ट रूप से इस घोटाले के 'मगरमच्छों' (बड़े चेहरों) को बचाने के लिए तैयार किया गया है। यह सिर्फ एक आम लूट नहीं है, बल्कि यह इस बात पर गहरा प्रहार है कि कैसे आस्था को पहले राजनीतिक लाभ और फिर वित्तीय संवर्धन के लिए भ्रष्ट किया जाता है। मैंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस 'चंदा चोरी महा-घोटाले' की तत्काल सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की है।"

एसआईटी ने अब तक क्या किया

एसआईटी ने 23 जून 2026 को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी, जिसमें सख्त कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। इसके बाद 25 जून 2026 को राम जन्मभूमि थाने में ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत आपराधिक साजिश, अमानत में ख्यानत (क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट) और चोरी की संपत्ति रखने जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। एसआईटी की रिपोर्ट और एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 25 जून की रात को ही मंदिर के चंदा-प्रबंधन और गिनती प्रक्रिया से जुड़े 8 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम हैं: रामशंकर यादव उर्फ तिन्नू यादव (यह ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का पूर्व ड्राइवर बताया जा रहा है और इसकी भूमिका सुपरवाइजर के तौर पर थी), सुभाष चंद्र श्रीवास्तव / सुभाष श्रीवास्तव (कैश गिनने वाले स्टाफ का प्रभारी),  अनुकल्प मिश्रा (गिनती स्टाफ),  अविनाश शुक्ला (गिनती स्टाफ),  करुणेश पांडेय (गिनती स्टाफ), मनीष यादव (गिनती स्टाफ),  लवकुश मिश्रा (गिनती स्टाफ) और राम शंकर मिश्रा (गिनती स्टाफ)। पुलिस और एसआईटी ने गिरफ्तार किए गए आठ में से सात आरोपियों के ठिकानों और आवासों पर छापेमारी कर कुल 79.85 लाख रुपये की नकदी बरामद की है। यह वही पैसा था जिसे चंदे से कथित तौर पर चुराया गया था। केवल सुभाष श्रीवास्तव के पास से नकदी की बरामदगी नहीं हुई है।