जाति जनगणना कराने की घोषणा के एक साल बाद भी आख़िर Enumeration कैसे होगा, इसकी जानकारी का इंतज़ार क्यों है? क्या मोदी सरकार की मंशा में कोई खोट है? कम से कम कांग्रेस ने तो यही आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूरा मकसद जाति जनगणना को टालने का है। इसने कहा कि ठीक एक साल पहले 30 अप्रैल 2025 को मोदी सरकार ने घोषणा की थी कि आगामी जनगणना में पूरे देश की जाति गणना शामिल की जाएगी, लेकिन अब एक पूरा साल बीत गया है और इसकी प्रक्रिया, तरीका या समय सारिणी के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं दी गई है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर एक लंबा-चौड़ा पोस्ट लिखकर इसे ड्रामेटिक यू-टर्न क़रार दिया है। उन्होंने चार बड़े कारण बताए हैं जिससे पीएम मोदी की मंशा पर सवाल उठाए गए हैं।
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पीएम की मंशा पर सवाल- कांग्रेस ने बताईं वजहें

  • 21 जुलाई 2021: गृह मंत्री ने लोकसभा में एक बीजेपी सांसद के सवाल के जवाब में कहा था कि सरकार की नीति है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा अन्य जातियों की गणना नहीं की जाएगी।
  • 21 सितंबर 2021: मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा कि जाति जनगणना कराने का कोई भी आदेश सरकारी नीति में दखलअंदाजी होगी।
  • 16 अप्रैल 2023: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर नियमित जनगणना के साथ जाति जनगणना की मांग की।
  • 28 अप्रैल 2024: प्रधानमंत्री ने न्यूज़18 को दिए इंटरव्यू में कांग्रेस की जाति जनगणना की मांग को 'अर्बन नक्सल' सोच बताया था।
  • 30 अप्रैल 2025: अचानक मोदी सरकार ने कैबिनेट कमिटी ऑन पॉलिटिकल अफेयर्स की बैठक में फैसला लिया कि आगामी जनगणना में जाति गणना शामिल की जाएगी।

पीएम की सोच 'अर्बन नक्सल' से प्रभावित?

जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री को कांग्रेस नेतृत्व से इस 'अर्बन नक्सल' वाले आरोप के लिए माफी मांगनी चाहिए। इससे भी ज्यादा, उन्हें देश की जनता को यह बताना चाहिए कि उन्होंने अपनी सोच को 'अर्बन नक्सल' विचारों से कैसे प्रभावित होने दिया, जब उन्होंने 30 अप्रैल 2025 को जाति जनगणना की घोषणा की।
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कांग्रेस के बड़े आरोप

  • एक साल बीत गया, लेकिन जाति गणना कैसे की जाएगी, इसका कोई ब्योरा अभी तक उपलब्ध नहीं है।
  • विपक्षी दलों, राज्य सरकारों या इस विषय के विशेषज्ञों से कोई चर्चा नहीं की गई।
  • 5 मई 2025 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री को फिर पत्र लिखा, लेकिन उसका कोई जवाब या स्वीकारोक्ति तक नहीं आई।
  • हाल ही में संसद के विशेष सत्र में भी यह साफ हो गया कि प्रधानमंत्री मोदी का जाति जनगणना को टालने का इरादा है।
जयराम रमेश ने कहा कि बिहार और तेलंगाना जैसी राज्य सरकारों ने कुछ महीनों में ही बड़े जाति सर्वेक्षण पूरा कर लिया। लेकिन केंद्र सरकार अब कह रही है कि जनगणना के नतीजे आने में समय लगेगा, जिसका इस्तेमाल महिलाओं के आरक्षण या अन्य मुद्दों पर देरी करने के लिए किया जा रहा है।
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जाति जनगणना कब हुई?

देश में आखिरी बार 1931 में पूर्ण जाति जनगणना हुई थी। 2011 की जनगणना में केवल सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना हुई थी, लेकिन उसका पूरा डेटा सार्वजनिक नहीं किया गया। लंबे समय से कांग्रेस और क्षेत्रीय पार्टियां जाति जनगणना की मांग कर रही हैं। वे कहते हैं कि इससे ओबीसी, एससी-एसटी जैसे पिछड़े वर्गों के लिए सही नीतियाँ बनाई जा सकती हैं और आरक्षण लागू किए जा सकते हैं। मोदी सरकार ने 30 अप्रैल 2025 को घोषणा की थी कि जाति गणना को पारदर्शी तरीके से मुख्य जनगणना में शामिल किया जाएगा। लेकिन कांग्रेस अब आरोप लगा रही है कि सरकार इस मुद्दे को ठंडे बस्ते में डालना चाहती है और जानबूझकर देरी कर रही है।