कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला है। जयराम रमेश ने शुक्रवार को कहा कि “मोदी द्वारा भव्य रूप से वादा की गई गैस, बस गैस ही बनी रही।” उन्होंने भारत के पीएनजी गैस आयात पर निर्भरता की ओर इशारा किया। दरअसल, देश में एलपीजी, पीएनजी और पेट्रोल-डीजल को लेकर घबराहट फैली हुई है। सरकार को शुक्रवार को बयान देना पड़ा कि किसी चीज की किल्लत नहीं है और देश में किसी तरह का लॉकडाउन नहीं होगा। हालांकि खुद पीएम मोदी ने संसद में जनता से हर तरह के संकट का सामना करने के लिए तैयार रहने को कहा था। पीएम मोदी शुक्रवार शाम 6.30 बजे सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात करेंगे।इसमें चुनावी राज्य वाले सीएम शामिल नहीं होंगे।

कहां गया आत्मनिर्भर भारतः कांग्रेस

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा, “2014-15 से 2024-25 के बीच भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता 84% से बढ़कर 90% हो गई। इसी अवधि में एलपीजी (तरलीकृत पेट्रोलियम गैस) के आयात पर निर्भरता 46% से बढ़कर 62% हो गई।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि “यह सब तब हुआ जब मंत्र था आत्मनिर्भर भारत।”

सबसे बड़ा गैस भंडार कहां गयाः कांग्रेस

उन्होंने कहा, “26 जून 2005 को तब के गुजरात के मुख्यमंत्री (मोदी) ने डींग मारी थी कि गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने कृष्णा-गोदावरी नदी बेसिन के गहरे पानी में भारत का सबसे बड़ा गैस भंडार खोज लिया है। मोदी ने घोषणा की थी कि इससे भारत ऊर्जा के मामले में आज़ाद हो जाएगा।”
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मोदी ने 20 हज़ार करोड़ का घोटाला छिपा दियाः कांग्रेस

जयराम रमेश ने दावा किया कि 2011 से 2016 के बीच पाँच CAG (नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक) रिपोर्टों में यह खुलासा हुआ कि यह “20,000 करोड़ रुपये का घोटाला” था, जिसे बाद में प्रधानमंत्री ने ढक दिया। इसके चलते अगस्त 2017 में गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन को ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन में विलय कर दिया गया।

एलपीजी, पेट्रोल को लेकर घबराहट बढ़ी, लंबी लाइन में लोग लगे हैं

कांग्रेस नेता जयराम रमेश का ये बयान ऐसे समय में आया है जब पेट्रोल पंपों और एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स पर पैनिक बाइंग तथा लंबी कतारों की खबरें आ रही हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार कच्चे तेल, ईंधन और एलपीजी के स्टॉक का विवरण जारी किया है, ताकि लोगों की घबराहट को शांत किया जा सके। 
सरकार ने 26 मार्च को कहा कि भारत के पास तेल का लगभग 60 दिनों का स्टॉक कवर है और एलपीजी की एक पूरी महीने की आपूर्ति का इंतजाम कर लिया गया है। सरकार ने कहा कि पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है और कमी की खबरों को “जानबूझकर फैलाया गया गलत सूचना अभियान” बताया, जिसका मकसद पैनिक बाइंग को भड़काना है।
सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों ने भी कहा कि पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति स्थिर बनी हुई है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि पूरे देश में सभी पेट्रोल पंपों के पास पर्याप्त स्टॉक हैं और सामान्य रूप से चल रहे हैं। पेट्रोल या डीजल की कोई राशनिंग नहीं है।
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मोदी ने संसद में बयान दिया था

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 मार्च को संसद में कहा था कि जनता हर तरह के संकट का सामना करने को तैयार रहे। हमने कोरोना काल में भी संकट से निपटा था। भारत दुनिया भर के ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं के साथ निरंतर संपर्क में है और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की गड़बड़ियों के बीच तेल और गैस, जिसमें एलएनजी भी शामिल है, को कहीं से भी सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है ताकि आपूर्ति बिना रुकावट बनी रहे। लोकसभा में मोदी ने कहा था कि सरकार घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ा रही है और साथ ही आयात स्रोतों को विविधता दे रही है ताकि ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। मोदी के इस बयान के बाद देश में पैनिक फैल गया। इसका फायदा एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स ने उठाया। उन्होंने खुलेआम एलपीजी की कालाबज़ारी शुरू कर दी जो अब तक जारी है। सरकार एलपीजी की किल्लत दूर नहीं कर पाई है और जनता ब्लैक में एलपीजी खरीद रही है। 
विपक्ष ने संसद भवन परिसर में कथित एलपीजी आपूर्ति की कमी को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहा है।