राहुल गांधी ने एपस्टीन फाइल्स को लेकर केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी और उद्योगपति अनिल अंबानी पर आरोप लगाए। हरदीप पुरी ने फौरन प्रेस कॉन्फ्रेंस की और माना कि एपस्टीन से मिला था। अब राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार उल्लंघन का प्रस्ताव लाने की तैयारी हो रही है।
एपस्टीन फाइल्स में केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी का नाम। राहुल ने घेरा।
एपस्टीन फाइल्स पर मोदी सरकार बुधवार को बुरी तरह घिर गई। नेता विपक्ष राहुल गांधी ने इस मामले को लोकसभा में उठाने की कोशिश की लेकिन सत्तापक्ष और स्पीकर ने उन्हें बार-बार रोका लेकिन राहुल अपने तरीके से केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी और राफेल डील के बाद ठेका हासिल करने वाले अनिल अंबानी का नाम लेने में सफल रहे। इस घटनाक्रम से परेशान केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने फौरन प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और अपनी सफाई पेश की। लेकिन उन्होंने यह स्वीकार किया कि वो एपस्टीन से मिले थे। इस बीच संसदीय कार्यमंत्री किरण रिजिजू ने कहा है कि राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार उल्लंघन का प्रस्ताव संसद में लाया जाएगा, क्योंकि नेता विपक्ष ने बिना अनुमति इस मामले को उठाया है।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि उन्होंने एपस्टीन से केवल 3-4 बार मुलाकात की थी और वह भी इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (आईपीआई) के एक डेलिगेशन के हिस्से के रूप में।
राहुल गांधी ने लोकसभा में बजट सत्र के दौरान अपने भाषण में 'एपस्टीन फाइल्स' का जिक्र करते हुए दावा किया कि इन फाइलों में पुरी का नाम है। ये फाइलें अमेरिकी वित्तीय अपराधी और सेक्स ऑफेंडर जेफरी एपस्टीन के अपराधों और उनके उच्च-प्रोफाइल सोशल सर्कल से जुड़ी हैं। जिसमें कई विश्व प्रसिद्ध हस्तियां जैसे पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और डोनाल्ड ट्रंप का नाम भी शामिल है। राहुल गांधी ने यह भी सवाल उठाया था कि कारोबारी अनिल अंबानी का नाम इन फाइलों में आने के बावजूद उनके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई, और पुरी से पूछा था कि अंबानी को एपस्टीन से किसने मिलवाया।
इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा, "मेरे आईपीआई बॉस को एपस्टीन के बारे में पता था और मैं उनसे केवल कुछ मौकों पर, ठीक-ठीक 3 या अधिकतम 4 बार मिला, वो भी डेलिगेशन के हिस्से के रूप में। हमारी मुलाकातें उनके आरोपों से जुड़े अपराधों से कोई लेना-देना नहीं रखतीं।"
पुरी ने आगे कहा, "मुझे एपस्टीन की गतिविधियों में कोई दिलचस्पी नहीं थी। उनके लिए मैं 'सही व्यक्ति' नहीं था... एपस्टीन ने मुझे दोमुंहा कहा था। राहुल को ईमेल पढ़ने चाहिए।"
पुरी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए जोर दिया कि उनकी मुलाकातें पूरी तरह प्रोफेशनल और शांति से जुड़े प्रयासों के संदर्भ में थीं, न कि एपस्टीन के कथित अपराधों से। उन्होंने कहा कि एपस्टीन फाइलों में उनका नाम महज कुछ संदर्भों में आया है, लेकिन कोई गलत गतिविधि से जुड़ा नहीं।
यह विवाद लोकसभा में राहुल गांधी के विस्फोटक भाषण के तुरंत बाद सामने आया, जिसके दौरान सदन में हंगामा हुआ और स्पीकर को हस्तक्षेप करना पड़ा। राजनीतिक हलकों में इसे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नए टकराव के रूप में देखा जा रहा है।
राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार उल्लंघन का प्रस्ताव आएगा
केंद्रीय संसदीय मामलों के मंत्री किरण रिजिजू ने कहा है कि राहुल ने बिना कोई नोटिस दिए मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर गंभीर आरोप लगाया है और यह विशेषाधिकार का गंभीर उल्लंघन है। रिजिजू ने कहा कि हम स्पीकर के पास ज़रूरी नोटिस फाइल करेंगे। उन्होंने कहा, 'लोकसभा में विपक्ष के नेता ने बजट चर्चा में किसी काम का और ठोस योगदान नहीं दिया। वह सिर्फ़ बेबुनियाद आरोप लगा रहे थे। मैंने उनसे कहा था कि जब फाइनेंस मिनिस्टर आज (बुधवार) शाम 5 पीएम बजे बजट पर जवाब दें तो सदन में मौजूद रहें। अपने भाषण के बाद वह तुरंत सदन से बाहर चले गए। नियम यह है कि एक बार जब कोई सदस्य अपना भाषण दे देता है, तो वह अपना भाषण खत्म होने के तुरंत बाद सदन नहीं छोड़ सकता।' हालांकि लोकसभा में पीएम मोदी की मौजूदगी भी कम रही। लेकिन सत्तापक्ष इस पर चुप रहता है।
राहुल गांधी ने जब एपस्टीन फाइल्स का नाम लिया, तभी टोकाटाकी शुरू हो गई। सत्तापक्ष की ओर से राहुल गांधी की ओर से आरोपों की पुष्टि के लिए सबूत मांगे गए। राहुल गांधी ने फौरन एक लिफाफा निकाला, जिसमें उनके आरोपों से जुड़े सबूत थे। सत्तापक्ष ने तुरंत पैंतरा बदला। बीजेपी के सांसद नियमों का हवाला देकर कहा कि यह मामला उठाने से पहले राहुल गांधी ने स्पीकर की अनुमति क्यों नहीं ली।
कौन है जेफरी एपस्टीन
जेफरी एपस्टीन एक अमेरिकी करोड़पति फाइनेंसर था, जिसे नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और ट्रैफिकिंग के आरोप में दोषी ठहराया गया था। उसकी 2019 में जेल में संदिग्ध मौत हो गई। जनवरी 2026 में, अमेरिकी न्याय विभाग ने एपस्टीन जांच से जुड़ी 30 लाख से अधिक पेज की फाइलें, 2,000 वीडियो और 1,80,000 तस्वीरें सार्वजनिक कीं। ये फाइलें एपस्टीन के अमीर और प्रभावशाली लोगों के साथ संबंधों को उजागर करती हैं, जिनमें पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, बिल क्लिंटन, एलन मस्क और अन्य शामिल हैं।
एपस्टीन, आईपीआई, हरदीप पुरी और अनिल अंबानी
अंतर्राष्ट्रीय शांति संस्थान (IPI) वही न्यूयॉर्क स्थित थिंक टैंक है जहां हरदीप पुरी ने भारतीय सुरक्षा बल से रिटायर होने के बाद और भाजपा में शामिल होने से पहले काम किया था। इस संस्था को भी एपस्टीन से फंड मिला था। हालांकि इससे पहले मीडिया रिपोर्ट में आ चुका है कि हरदीप पुरी ने डिजिटल इंडिया को एपस्टीन के सामने पिच किया था। कहा जा रहा है कि उद्योगपति अनिल अंबानी ने ही हरदीप पुरी को एपस्टीन से मिलवाया था। लेकिन हरदीप का कहना है कि वो आईपीआई डेलीगेशन के साथ एपस्टीन से मिले थे। हरदीप यह बात साफ नहीं कर रहे हैं कि अगर वो एपस्टीन से तीन-चार बार मिले तो क्या हर बार आईपीआई प्रतिनिधिमंडल के साथ मिले थे।
अनिल अंबानी, उद्योगपति। मुकेश अंबानी के भाई और गुजरात से संबंध
अनिल अंबानी को गोरी महिला की पेशकशः ब्लूमबर्ग
अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने यौन अपराधी एपस्टीन के जो दस्तावेज जारी किए हैं, उसमें अनिल अंबानी से जुड़े सनसनीकेज खुलासे सामने आए हैं। इन दस्तावेजों में एप्सटीन और अनिल अंबानी के बीच की 2017 से 2019 तक की बातचीत सामने आई है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें कारोबार, वैश्विक मामलों और महिलाओं को लेकर चर्चा हुई। 9 मार्च 2017 की बातचीत में अनिल ने एपस्टीन से पूछा कि क्या सुझाव है? इस पर एपस्टीन ने लिखा- मुलाकात ‘मजेदार’ बनाने के लिए ‘लंबी स्वीडिश गोरी सुनहरे बालों वाली महिला’ बेहतर होगी। इसके बाद अंबानी ने जवाब दिया, ‘इसे तुरंत अरेंज करो।’ एप्सटीन ने फिर जवाब में लिखा कि किसी और से भी अगर आप चुपचाप मिलना चाहते हैं तो मुझे कभी भी बता सकते हैं ।
2017 में एपस्टीन ने अनिल अंबानी से महिलाओं के बारे में उनकी पसंद पूछी। अंबानी ने बॉलीवुड/हॉलीवुड से जुड़े अपने लिंक का भी जिक्र किया। एपस्टीन ने पूछा “क्या कोई अभिनेत्री या मॉडल आपकी पसंद वाली है? उम्मीद है मेरिल स्ट्रीप नहीं। मैं मदद नहीं कर पाऊँगा।” अंबानी ने जवाब दिया कि “बेहतर स्वाद मेरे दोस्त। हमारी अगली फिल्म स्कारलेट जोहानसन के साथ है। इस पर एपस्टीन ने कहा “मुझे खुशी है कि आप जवान गोरी महिलाओं को पसंद करते हैं।” चैट से ये भी सामने आया है कि एपस्टीन लगातार अपने नेटवर्क के लोगों के नाम का इस्तेमाल करता रहा।
ये बातचीत उस समय की है, जब एप्सटीन को पहले ही 2008 में नाबालिगों से जुड़े यौन आपराध के मामले में सजा मिल चुकी थी। इसके बावजूद एप्सटीन दुनिया के कई प्रभावशाली और ताकतवर लोगों के संपर्क में बना हुआ था। रिकॉर्ड बताते हैं कि दोनों के बीच पेरिस और न्यूयॉर्क में मिलने की योजना बनीं। मई 2019 में अनिल अंबानी के न्यूयॉर्क दौरे के वक्त एपस्टीन ने उन्हें मैनहैटन में अपने घर बुलाया।
दूसरे ईमेल्स में भी ये खुलासा हुआ है कि अंबानी और एपस्टीन के बीच अंतरराष्ट्रीय यात्राओं, बिजनेस मीटिंग्स और वैश्विक मंचों पर होने वाले कार्यक्रमों को लेकर बातचीत हुई थी। इनमें पेरिस, न्यूयॉर्क और वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के कार्यक्रमों में मुलाकातों का जिक्र है। इसके अलावा, जनवरी 2018 में डावोस, स्विट्जरलैंड में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में डोनाल्ड ट्रंप पर हुई प्रतिक्रियाओं के बारे में भी बातचीत हुई।
अंबानी के अलावा भी कई भारतीय और भारतीय मूल के सेलिब्रिटी एपस्टीन के संपर्क में थे। इनमें फिल्मकार मीरा नायर, डायरेक्टर अनुराग कश्यप, अभिनेत्री नंदिता दास शामिल हैं। हालांकि ये लोग एपस्टीन के एक फिल्मी इवेंट में शामिल थे। इसके अलावा इनका और कोई संपर्क नहीं पाया गया। अबलबत्ता वेलनेस गुरु दीपक चोपड़ा और बिल गेट्स को लेकर तमाम आरोप सामने आए। जिनमें यौन शोषण का शिकार हुई महिलाओं ने दीपक चोपड़ा और बिल गेट्स का नाम लिया। एपस्टीन फाइल्स में पीएम मोदी का जिक्र भी अनिल अंबानी के संदर्भ में आया है। हालांकि, फाइल में नाम होना किसी अपराध का सबूत नहीं है। लेकिन ये एपस्टीन के साथ संबंधों को ज़रूर उजागर करता है ।
अनिल अंबानी और मोदी सरकार के रिश्ते
अनिल अंबानी और मोदी सरकार के बीच संबंध काफी शानदार रहे हैं। 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद अनिल अंबानी की रिलायंस ग्रुप (Reliance Anil Dhirubhai Ambani Group) को कई क्षेत्रों में फायदा पहुंचाने के आरोप विपक्षी दलों ने लगाए। सबसे प्रमुख विवाद राफेल डील से जुड़ा था, जहां फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद में अनिल अंबानी की कंपनी को ऑफसेट पार्टनर बनाया गया। विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी HAL को दरकिनार कर अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाया, जबकि उनकी कंपनी का डिफेंस सेक्टर में कोई पूर्व अनुभव नहीं था। पूर्व फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने भी कहा था कि भारतीय सरकार ने अनिल अंबानी को चुनने का फैसला किया था, न कि दसॉल्ट ने। हालांकि, सरकार और अंबानी ने इन आरोपों को खारिज किया और इसे क्रोनी कैपिटलिज्म का हिस्सा बताया गया।
2017-2019 के दौरान अनिल अंबानी ने अमेरिकी राजनीतिक हलकों में पहुंच बनाने के लिए जेफरी एपस्टीन जैसे विवादास्पद व्यक्ति से संपर्क बनाए रखा। जारी दस्तावेजों से पता चलता है कि अंबानी ने "दिल्ली की लीडरशिप" (जिसे मोदी सरकार के रूप में देखा जाता है) की ओर से ट्रंप प्रशासन के जेरेड कुश्नर और स्टीव बैनन से मुलाकात की मांग की थी, ताकि मोदी की अमेरिका यात्रा की तैयारी हो सके। यह दर्शाता है कि अंबानी खुद को मोदी सरकार के लिए एक अनौपचारिक बैकचैनल के रूप में पेश कर रहे थे, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें इसका अधिकार था या नहीं। 2019 में मोदी की दोबारा जीत के दिन अंबानी ने एपस्टीन से मुलाकात की, जिसके बाद एपस्टीन ने बैनन को मोदी के "प्रतिनिधि" से बातचीत की जानकारी दी। ये खुलासे अंबानी की मोदी सरकार से निकटता को और मजबूत करते हैं, लेकिन साथ ही सवाल भी उठाते हैं।
हाल के वर्षों में अनिल अंबानी की कंपनियां भारी कर्ज में डूबी हैं, और ED, CBI जैसी एजेंसियों की जांच का सामना कर रही हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि पहले की निकटता के बावजूद अब संबंधों में तनाव दिख रहा है, जैसे कि ईडी रेड्स और कानूनी कार्रवाई। कुल मिलाकर, अनिल अंबानी का मोदी सरकार से रिश्ता शुरुआत में लाभकारी और राजनीतिक रूप से करीबी रहा, लेकिन राफेल विवाद, एपस्टीन फाइल्स और वित्तीय संकट ने इसे विवादास्पद बना दिया है। खबरें तो यहां तक हैं कि एपस्टीन की सलाह पर ही अनिल अंबानी ने खुद को दिवालिया घोषित किया था, ताकि आसानी से लोन मिल सके।