विदेश मंत्रालय (MEA) ने पिछले महीने माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स की भारत यात्रा के दौरान वाणिज्य मंत्रालय को उनके साथ 'मंत्रिस्तरीय बैठक' न करने की कड़ी सलाह दी थी। यह कदम गेट्स और सजायाफ्ता यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के बीच संबंधों को लेकर वैश्विक स्तर पर हो रही नई जांच और विवादों के बीच उठाया गया। एपस्टीन फाइल्स को लेकर मोदी सरकार के मंत्री हरदीप पुरी और उद्योगपति अनिल अंबानी विवादों में हैं।

क्या था पूरा मामला?

वाणिज्य मंत्रालय ने उद्योग निकाय फिक्की (FICCI) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम “Curtain Raiser of FICCI @100” के संबंध में विदेश मंत्रालय से राय मांगी थी। यह कार्यक्रम 19 फरवरी को तय था, जिस दिन राजधानी में ग्लोबल एआई समिट (Global AI Summit) भी शुरू हो रहा था।
विदेश मंत्रालय के अमेरिका (AMS) विभाग ने वाणिज्य मंत्रालय को सूचित किया: "विदेश मंत्रालय राजनीतिक नज़रिए से इस स्तर पर माननीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री (HCIM) की गेट्स के साथ मंत्रिस्तरीय बैठक या किसी कार्यक्रम में उनकी संयुक्त भागीदारी की सिफारिश नहीं करता है।"
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यह सलाह 'सक्षम प्राधिकारी' (मंत्री एस जयशंकर) के अनुमोदन के बाद जारी की गई थी, जिसके परिणामस्वरूप फिक्की के उस कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया।

ऐन वक्त पर गेट्स ने वापस लिया नाम

बिल गेट्स 16 फरवरी को भारत पहुंचे थे और उन्होंने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उप-मुख्यमंत्री पवन कल्याण से मुलाकात की थी। उन्हें 19 फरवरी को एआई समिट में मुख्य भाषण देना था, लेकिन कार्यक्रम से कुछ घंटे पहले ही उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया। गेट्स फाउंडेशन ने बयान जारी कर कहा कि यह निर्णय इसलिए लिया गया ताकि एआई समिट की मुख्य प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित रहे। उनकी जगह अफ्रीका और भारत कार्यालय के अध्यक्ष अंकुर वोरा ने प्रतिनिधित्व किया।

एपस्टीन फाइल्स और भारतीय कनेक्शन

हाल ही में अमेरिका द्वारा जारी की गई 'एपस्टीन फाइल्स' में कुछ अन्य भारतीय नामों का भी जिक्र आया था: अनिल अंबानी: फाइल्स में उनके और एपस्टीन के बीच ईमेल लेन-देन का उल्लेख है। फाइल्स में केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी के राजनयिक कार्यकाल के दौरान के ईमेल हैं, हालांकि उन्होंने किसी भी गलत काम से साफ इनकार किया है और कहा है कि बातचीत केवल निवेश और भारत की आर्थिक वृद्धि पर केंद्रित थी।

भारत में गेट्स फाउंडेशन का काम

विवादों के बावजूद, गेट्स फाउंडेशन ने भारत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। 2003 से भारत में सक्रिय यह संस्था स्वास्थ्य, मातृ एवं शिशु देखभाल, टीकाकरण, परिवार नियोजन और स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में केंद्र और राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम कर रही है।

जेफरी एपस्टीन मामला क्या है

जेफरी एपस्टीन एक अमेरिकी निवेशक और अरबपति था, जिस पर दशकों तक नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण और मानव तस्करी (Sex Trafficking) करने का आरोप था। एपस्टीन ने दुनिया के सबसे शक्तिशाली राजनेताओं, वैज्ञानिकों, और व्यापारियों (जैसे प्रिंस एंड्रयू, बिल क्लिंटन, और बिल गेट्स) के साथ करीबी संबंध बनाए थे। 2008 में उसे पहली बार फ्लोरिडा में दोषी ठहराया गया था, लेकिन उसे बहुत हल्की सजा मिली। 2019 में उसे फिर से गिरफ्तार किया गया, जिसके कुछ समय बाद न्यूयॉर्क की एक जेल में उसकी रहस्यमयी परिस्थितियों में मृत्यु हो गई (जिसे आत्महत्या घोषित किया गया)। हाल ही में अदालत के दस्तावेजों के सार्वजनिक होने से उन लोगों के नाम सामने आए जो एपस्टीन के द्वीपों या कार्यक्रमों में शामिल थे। इसने वैश्विक स्तर पर 'पावरफुल' लोगों की जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है।
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एपस्टीन मामला सीधे तौर पर भारत-अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) को प्रभावित नहीं करता, लेकिन यह 'साख और प्रतिष्ठा' (Reputation Management) का मामला बन गया है। भारत अब पश्चिम की उन हस्तियों के साथ सार्वजनिक मंच साझा करने में अधिक चयनात्मक (Selective) हो गया है जो कानूनी या नैतिक विवादों में घिरे हैं। हालांकि कई देशों में एपस्टीन से जुड़े नेताओं के इस्तीफे हुए लेकिन भारत में केंद्रीय हरदीप पुरी और उद्योगपति अनिल अंबानी ने मात्र आरोपों का खंडन करके अपनी कुर्सियों पर जमे हुए हैं।