ईरान युद्ध 28वें दिन में पहुंच गया है। लेकिन भारत में लॉकडाउन की अफवाहों ने ज़ोर पकड़ लिया है। भारत सरकार को शुक्रवार 27 मार्च को घोषणा करनी पड़ी कि लॉकडाउन की अफवाहें झूठी हैं। लेकिन सरकार को पेट्रोल-डीज़ल पर एक्साइज ड्यूटी घटाकर हालात संभालना पड़ा।
प्रधानमंत्री मोदी संसद में कोरोना जैसा संकट बताकर चलते बने लेकिन उसके बाद देश में और सरकार में पैनिक फैल गया। लोग एलपीजी और पेट्रोल-डीज़ल के लिए टूट पड़े। अब सरकार के मंत्री हालात संभालने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि सरकार ने शुक्रवार को पेट्रोल-डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी घटाकर भी हालाक संभालने की कोशिश की। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार 27 मार्च को यह स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार ऐसे प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रही है। वर्तमान वैश्विक संकट के बीच सरकार ने लोगों से शांत रहने की अपील की और कहा कि इस समय अफवाहें फैलाना “गैरज़िम्मेदाराना और हानिकारक” है।
लॉकडाउन की व्यापक अटकलों पर मंत्री का यह बयान पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कटौती की घोषणा के तुरंत बाद आया। पुरी ने X पर एक पोस्ट में कहा: ”भारत में लॉकडाउन की अफवाहें पूरी तरह झूठी हैं। मैं इसे स्पष्ट रूप से कह रहा हूँ कि सरकार द्वारा कोई ऐसे प्रस्ताव पर विचार नहीं किया जा रहा है।”
उन्होंने कहा कि वैश्विक स्थिति लगातार बदल रही है और “हम ऊर्जा, सप्लाई चेन तथा आवश्यक वस्तुओं पर रीयल-टाइम आधार पर नजर रख रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार सभी आवश्यक कदम उठा रही है ताकि नागरिकों को ईंधन, ऊर्जा और अन्य महत्वपूर्ण आपूर्ति बिना रुकावट उपलब्ध रहे। हम उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। भारत ने वैश्विक अनिश्चितताओं के सामने हमेशा लचीलापन दिखाया है और हम समय पर, सक्रिय तथा समन्वित तरीके से कार्य करते रहेंगे।”
लॉकडाउन अफवाहें पीएम मोदी के भाषण के बाद
2020 में कोविड-19 महामारी घोषित होने के बाद भारत में देशव्यापी लॉकडाउन लगा था। फिर से इसी तरह के लॉकडाउन की अटकलें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसद में हाल के भाषण के बाद उठीं, जिसमें उन्होंने पश्चिम एशिया (ईरान-अमेरिका युद्ध) के संकट का जिक्र किया। पीएम मोदी के भाषण में लॉकडाउन की संभावना का संकेत छिपा था। इससे सोशल मीडिया पर “क्या भारत में लॉकडाउन वापस आ रहा है?” और “भारत लॉकडाउन न्यूज” जैसे सर्च ट्रेंड करने लगे।
स्टालिन ने इसीलिए आलोचना कीः एमके स्टालिन ने पश्चिम एशिया संकट को लेकर जनता से की जाने वाली तैयारियों के बारे में प्रधानमंत्री मोदी की अपील को खुले तौर पर चुनौती देते हुए पूछा कि तैयार रहने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है या जनता की? उन्होंने केंद्र पर शुरुआती चेतावनियों को नजरअंदाज करने और कार्रवाई करने में विफल रहने का आरोप लगाया और तमिलनाडु द्वारा अपनाए गए स्वतंत्र राहत उपायों, जैसे कि एलपीजी के विकल्प और किसानों के लिए बाजार तक पहुंच, का उदाहरण दिया। स्टालिन की टिप्पणियों में तैयारियों को सरकार की एक प्रमुख जिम्मेदारी बताया गया है जिसे "जनता पर नहीं छोड़ा जा सकता।"
ममता बनर्जी ने लॉकडाउन की आशंका जताईः पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने देश में संभावित लॉकडाउन की आशंका व्यक्त की और कहा कि इससे उन्हें या उनकी पार्टी को राज्य में विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ लड़ने से कोई रोक नहीं पाएगा। ममता ने कहा- "वे लॉकडाउन लगा सकते हैं। वे लोगों को घरों में बंद रखेंगे। मैंने 2021 में लॉकडाउन की स्थिति में चुनाव लड़ा था। मैं किसी भी स्थिति में चुनाव लड़ सकती हूं।" ममता ने कहा कि “मैंने इस बात का कड़ा विरोध किया है कि लोगों को एलपीजी सिलेंडर बुकिंग के 35 दिन बाद मिलेगा। अब वे कह रहे हैं कि यह अवधि 25 दिन है। मुझे उन पर ज़रा भी भरोसा नहीं है। अगर किसी के पास खाना पकाने की गैस खत्म हो जाए तो वह 25 दिन क्या करेगा? लोगों को खाना पकाने और आने-जाने के पुराने तरीकों का सहारा लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के सत्ता में आने से पहले एक घरेलू सिलेंडर की कीमत 400 रुपये थी। आज यह 1100 रुपये है। पेट्रोल की कीमतें बढ़ गई हैं। अलर्ट जारी कर दिया गया है। क्या वे एक और लॉकडाउन की योजना बना रहे हैं? क्या भाजपा लोगों को उनके घरों में बंद करना चाहती है? 2021 में, जब कोविड-19 के कारण लॉकडाउन हुआ था, तब हमने पूरी ताकत से लड़ाई लड़ी थी। अगर हम उस स्थिति में लड़ सकते हैं, तो हम किसी भी स्थिति का सामना कर सकते हैं।”
मोदी के जुमले और हकीकत
हालाँकि, प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कोविड-19 महामारी का जिक्र केवल यह बताने के लिए किया कि भारत ने वैश्विक संकट से कैसे निपटा। उन्होंने लोगों से “तैयार और एकजुट” रहने की अपील की, जैसा कोविड के दौरान हुआ था। उन्होंने “लॉकडाउन” शब्द का जिक्र नहीं किया। लेकिन यह भ्रम एलपीजी आपूर्ति की चिंताओं और पेट्रोल पंप पर लंबी लाइन के कारण भी फैला। सरकार खुद पैनिक में नज़र आ रही है। अगर संकट नहीं है तो फिर एलपीजी बुकिंग की अवधि क्यों बढ़ाई गई। क्यों तेल कंपनियों ने अपने पोर्टल पर गैस बुकिंग का सिस्टम बदला। क्यों सरकार ने धमकी दी कि लोग अगर पीएनजी गैस की तरफ शिफ्ट नहीं होते हैं तो उनकी एलपीजी सप्लाई बंद कर दी जाएगी। कुल मिलाकर एलपीजी संकट ने लॉकडाउन की धारणा को बढ़ाया। अगर सबकुछ सामान्य है तो जनता को यह महसूस होना चाहिए। लेकिन अगर जनता से प्रधानमंत्री संकट में तैयार रहने को कहेंगे तो उसका क्या मतलब निकलेगा।
पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती
ईंधन कीमतों में तेजी की आशंका के बीच सरकार ने शुक्रवार को घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी ₹10 प्रति लीटर प्रत्येक कम कर दी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि डीजल पर ₹21.5 प्रति लीटर और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर ₹29.5 प्रति लीटर का निर्यात शुल्क लगाया गया है ताकि इनकी पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे। सीतारमण ने X पर लिखा: “यह उपभोक्ताओं को कीमतों में बढ़ोतरी से सुरक्षा प्रदान करेगा। प्रधानमंत्री ने हमेशा सुनिश्चित किया है कि नागरिक आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और लागत की अनिश्चितताओं से सुरक्षित रहें।”