सिंधु जल समझौते (Indus Waters Treaty - IWT) को लेकर भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और विश्वसनीय तरीके से बंद नहीं करता, तब तक सिंधु जल समझौता 'स्थगित' (Abeyance) ही रहेगा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा कि इस मुद्दे पर भारत का रुख हमेशा से 'अपरिवर्तनीय' (Consistent) रहा है। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान द्वारा लगातार सीमा पार आतंकवाद को दिए जा रहे समर्थन के विरोध में सिंधु जल समझौता स्थगित रहेगा। पाकिस्तान को आतंकवाद के लिए अपना समर्थन प्रामाणिक और अपरिवर्तनीय रूप से त्यागना होगा।"

कब स्थगित हुआ था सिंधु जल समझौता

भारत सरकार ने पिछले साल (2025 में) पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद इस ऐतिहासिक समझौते को स्थगित करने का फैसला किया था। इस हमले में 26 नागरिकों की मौत हो गई थी, जिसके बाद भारत ने 'ऑपरेशन सिंधु' के तहत जवाबी कार्रवाई की थी। भारत का स्पष्ट रुख है कि "खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।" हालांकि इधर गैर सरकारी चैनलों के ज़रिए भारत-पाकिस्तान के बीच संवाद की खबरें भी आ रही हैं। विपक्ष ने आरोप लगाया कि हाल ही में आरएसएस से जुड़े राम माधव ने कोलंबों में एक ब्रिटिश थिंक टैंक के कार्यक्रम में पाकिस्तानी दल से मुलाकात की थी। लेकिन राम माधव ने इसका खंडन किया था।
ताज़ा ख़बरें

सिंधु जल समझौते पर भारत का स्टैंड

भारत सरकार के अनुसार, जब तक यह समझौता स्थगित है, तब तक भारत इसके तहत अपनी किसी भी बाध्यता को मानने के लिए बाध्य नहीं है। भारत ने यह भी साफ किया है कि किसी भी मध्यस्थता अदालत (Court of Arbitration) को भारत के संप्रभु अधिकारों की समीक्षा करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

पाकिस्तान की छटपटाहट: हाल ही में पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक डार और जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने इस्लामाबाद में सिंधु जल समझौते पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया था। पाकिस्तान ने आरोप लगाया कि भारत पानी को एक "रणनीतिक हथियार" (Weaponisation of water) के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। पाकिस्तान ने यह भी दावा किया कि भारत आतंकवाद के बहाने इस समझौते को रोक रहा है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया। भारत ने स्पष्ट किया है कि समस्या आतंकवाद है, जिसे पाकिस्तान को पूरी तरह बंद करना ही होगा। इसके अलावा, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी सरकार के इस फैसले का समर्थन करते हुए इसे आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई का एक अहम हिस्सा बताया है।

क्या है सिंधु जल समझौता?

यह समझौता 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था। इसके तहत पूर्वी नदियों (ब्यास, रावी और सतलुज) के पानी पर भारत का और पश्चिमी नदियों (सिंधु, चेनाब और झेलम) के पानी पर पाकिस्तान का मुख्य अधिकार तय किया गया था। इसके तहत पूर्वी नदियाँ (बीस, रावी और सतलुज) भारत को मिली थीं। पश्चिमी नदियाँ (सिंधु, चेनाब और झेलम) पाकिस्तान को मिली थीं। 
भारत को पश्चिमी नदियों पर सीमित सिंचाई और गैर-उपभोक्ता उपयोग (जैसे बिजली उत्पादन) की कुछ छूट है।
हाल ही में दोनों देशों के 117 लोगों ने भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत करने और मेलजोल बढ़ाने की अपील की थी। अपील करने वालों में शामिल थे: जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, मणिशंकर अय्यर, मनोज झा, पूर्व रॉ प्रमुख ए.एस. दुलत, पाकिस्तान के पूर्व मंत्री खुर्शीद अहमद कसूरी, जहांगीर काजी। लेकिन भारत ने अपनी स्थिति दोहराते हुए कहा कि आतंकवाद और बातचीत साथ नहीं चल सकते।