भारतीय युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब को दिल्ली पुलिस ने 'शर्टलेस विरोध प्रदर्शन' मामले में गिरफ्तार कर लिया है। यह प्रदर्शन पिछले सप्ताह 20 फरवरी को दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान किया गया था।पुलिस ने बताया कि चिब को तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन में लगभग 15 घंटे की पूछताछ के बाद मंगलवार (24 फरवरी 2026) को गिरफ्तार किया गया। यह प्रदर्शन पीएम मोदी के खिलाफ था। युवक कांग्रेस का आरोप है कि मोदी ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील कर किसानों, व्यापारियों, आम लोगों के हित अमेरिका को बेच दिए हैं। इस प्रदर्शन से सरकार इतना नाराज़ है कि उसने प्रदर्शनकारियों पर सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया। इस प्रदर्शन से सरकार की साख को धक्का लगा है।
पुलिस ने आरोप लगाया कि पूछताछ के दौरान वे सहयोग नहीं कर रहे थे और जांच को गुमराह करने की कोशिश की गई। जिसके बाद पुलिस ने उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत होने का दावा करते हुए गिरफ्तारी की कार्रवाई की। अब उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा।
घटना के अनुसार, भारतीय युवा कांग्रेस (आईवाईसी) के कुछ कार्यकर्ताओं ने एआई इम्पैक्ट समिट के एक्सपो हॉल में प्रवेश किया था। उन्होंने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराकर क्यूआर कोड के माध्यम से वैध तरीके से प्रवेश प्राप्त किया और सामान्य कपड़ों में (स्वेटर और जैकेट पहनकर) अंदर गए। दोपहर करीब 12:30 बजे उन्होंने स्वेटर उतारकर शर्टलेस होकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया, नारे लगाए और अपने टी-शर्ट पर राजनीतिक संदेश लिखे हुए थे, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे शामिल थे।
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प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें तुरंत बाहर निकाल दिया था। पुलिस के अनुसार, इस घटना में कुल 11 लोग शामिल थे, जिनमें से अब तक 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इससे पहले चार अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका था। यह मामला राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है, क्योंकि युवा कांग्रेस ने इसे सरकार की नीतियों के खिलाफ अपना विरोध जताने का तरीका बताया है, जबकि पुलिस ने इसे सार्वजनिक स्थान पर अशोभनीय व्यवहार और व्यवधान पैदा करने के रूप में देखा है।

प्रदर्शनकारियों ने शर्ट पर क्या नारे लिखे थे

20 फरवरी 2026 को आयोजित शर्टलेस विरोध प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने टी-शर्ट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लिखे हुए थे, जैसे 'पीएम इज कम्प्रोमाइज्ड'। ट्रैप डील आदि। उन्होंने वैध क्यूआर कोड के माध्यम से प्रवेश प्राप्त किया था। दिल्ली पुलिस ने इस घटना को सार्वजनिक स्थान पर व्यवधान और अशोभनीय व्यवहार मानते हुए कार्रवाई की, जिसके परिणामस्वरूप आईवाईसी अध्यक्ष उदय भानु चिब सहित कुल 8 लोगों की गिरफ्तारी हुई। सरकार की ओर से इसे अंतरराष्ट्रीय इवेंट में भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली हरकत बताया गया है, क्योंकि समिट में वैश्विक प्रतिनिधि उपस्थित थे।


भाजपा ने इस प्रदर्शन को 'राष्ट्रविरोधी' और 'देश की छवि को कलंकित करने वाली' हरकत करार दिया है। उसने दावा करते हुए कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बेइज्जती हुई है। भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने इसे 'राष्ट्रीय शर्म' कहा, जबकि सुधांशु त्रिवेदी ने इसे 'देशद्रोह के समान' बताया। पार्टी का तर्क है कि ऐसे प्रदर्शन से वैश्विक निवेश और छवि प्रभावित होती है, खासकर जब समिट एआई जैसे महत्वपूर्ण विषय पर केंद्रित था। प्रधानमंत्री मोदी ने भी इसे सुनियोजित साजिश बताया। भाजपा ने राहुल गांधी से माफी की मांग की है।

राहुल गांधी का स्टैंड

विपक्षी नेता राहुल गांधी ने इस प्रदर्शन को पूरी तरह जायज ठहराया है, इसे लोकतंत्र का मूलभूत हिस्सा बताते हुए। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन डेमोक्रेसी की नींव हैं और प्रधानमंत्री मोदी इससे 'डर' क्यों रहे हैं। गांधी ने गिरफ्तार कार्यकर्ताओं का समर्थन किया, दावा करते हुए कि यह राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए था। आईवाईसी ने इसे 'शांतिपूर्ण' प्रदर्शन बताया, जो सरकारी नीतियों के खिलाफ था। कांग्रेस नेताओं ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला माना।

दुनियाभर में ऐसे प्रदर्शन हो रहे हैं

दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स के दौरान ग्रीनपीस जैसे संगठनों ने कई ऐसे प्रदर्शन किए हैं। उदाहरणस्वरूप, 2025 में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डावोस) में ग्रीनपीस कार्यकर्ताओं ने सुपर-रिच पर टैक्स की मांग करते हुए विरोध किया, जिसमें हेलिपोर्ट ब्लॉक करना शामिल था। इसी तरह, 2023 में यूरोपीय बिजनेस एविएशन कन्वेंशन में प्राइवेट जेट्स के खिलाफ प्रदर्शन हुआ, और 2013 में आर्कटिक ऑयल रिग पर विरोध के दौरान 'आर्कटिक 30' कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में रिहा कर दिया गया। ओलंपिक्स और COP जैसे इवेंट्स में भी ऐसे प्रदर्शन सामान्य हैं, जो वैश्विक ध्यान आकर्षित करते हैं।


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भारत में अभिव्यक्ति की आज़ादी है

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी गई है, जो विरोध प्रदर्शन को शामिल करती है। इस घटना में प्रदर्शन को दबाने को कुछ लोग लोकतंत्र पर हमला मानते हैं, जबकि अन्य इसे वैध कार्रवाई बताते हैं क्योंकि यह एक सुरक्षित इवेंट में व्यवधान था। वैश्विक उदाहरणों से तुलना करें तो, कई देशों में ऐसे प्रदर्शनों पर गिरफ्तारियां होती हैं, लेकिन वे राष्ट्रविरोधी नहीं माने जाते जब तक वे हिंसक न हों। भारत में यह डिबेट जारी है कि क्या ऐसे कृत्य अभिव्यक्ति की सीमा में आते हैं या राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध। यूथ कांग्रेस के शर्टलेस प्रदर्शन में भी किसी तरह की हिंसा नहीं हुई।