दिल्ली में हुए युवक कांग्रेस के शर्टलेस प्रदर्शन पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब को गिरफ्तार किया है। इस पर उनकी मां रजनीबाला ने जबरदस्त बयान दिया है और कहा है कि देश के हालात को देखते हुए ये प्रदर्शन सही है।
युवक के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु छिब और उनकी मां
इंडियन यूथ कांग्रेस (आईवाईसी) के अध्यक्ष उदय भानु चिब की गिरफ्तारी पर उनकी मां रजनी बाला ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वे अपने बेटे पर गर्व करती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह गिरफ्तारी राजनीतिक दबाव का नतीजा है और युवाओं की आवाज को दबाने की कोशिश है। रजनी बाला ने अपने बेटे के संघर्ष को गांधी और भगत सिंह के रास्ते से जोड़ते हुए युवाओं से अपील की कि वे देश के लिए भगत सिंह बनें। इस घटना से एक बार फिर दिल्ली पुलिस पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने के आरोप लगे हैं।
रजनी बाला ने पीटीआई और एएनआई से बातचीत में कहा, "मैं अपने बेटे पर गर्व करती हूं। हमने सही रास्ता चुना है और सही काम करेंगे...आखिर में सच्चाई की हमेशा जीत होती है। मुझे कोई पछतावा नहीं है। वे मेरे बेटे को जेल में कितने भी समय रखें, कोई फर्क नहीं पड़ता..."
हम गांधी के रास्ते पर हैं, जरूरत पड़ी तो भगत सिंह बन सकते हैं
उन्होंने बताया कि उनके बेटे ने कहा था, "हम गांधी के रास्ते पर चलते हैं और जरूरत पड़ने पर भगत सिंह भी बन सकते हैं, और मुझे उन पर गर्व है। आज हमें भगत सिंह की जरूरत है, और मैं सभी युवाओं से अपील करती हूं कि वे भगत सिंह बनें और अपने देश के बारे में सोचें। जो लोग विरोध कर रहे थे, उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है...वे देश के लोगों के लिए, देश के किसानों के लिए, देश के युवाओं के लिए, जो बेरोजगार हैं, जिनके पास कोई काम नहीं है, और जो किसान हैं, उनके लिए विरोध कर रहे थे। मोदीजी ने ट्रंप के साथ कोई सौदा किया है, अज्ञात दबाव में...जब कॉमनवेल्थ गेम्स हुए थे, तो दुनिया भर से इतने प्रतिनिधि और एथलीट आए थे, तब बीजेपी ने कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान विरोध किया था...जब गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने चीन के रोबोट को अपना बताकर शिखर सम्मेलन के पहले दिन पेश किया, दावा किया कि यह उनकी इनोवेशन है, तब हम दुनिया के सामने शर्मिंदा नहीं हुए...मैं अपने बेटे पर गर्व करती हूं। हमने सही रास्ता चुना है और सही काम करेंगे...आखिर में सच्चाई की हमेशा जीत होती है। मुझे कोई पछतावा नहीं है। वे मेरे बेटे को जेल में कितने भी समय रखें, कोई फर्क नहीं पड़ता। यहां तक कि जब भगत सिंह शहीद हुए थे, तब ये लोग उनके साथ नहीं थे। जो आज सत्ता में हैं, वे उनके खिलाफ थे..."
राहुल गांधी ने कहा- मुझे अपने साथियों पर गर्व है
उदय भानु चिब की गिरफ्तारी के बाद नेता विपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर कहा- शांतिपूर्ण विरोध हमारी ऐतिहासिक धरोहर है। यह हमारे खून में है और हर भारतीय का लोकतांत्रिक अधिकार है। मुझे युवा कांग्रेस के अपने बब्बर शेर साथियों पर गर्व है, जिन्होंने ‘COMPROMISED PM’ के खिलाफ निडर होकर देश के हित में आवाज़ उठाई है। अमेरिका के साथ हुए Trade Deal में देश के हितों से समझौता किया गया है। यह समझौता हमारे किसानों और टेक्सटाइल उद्योग को नुकसान पहुंचाएगा तथा हमारे डेटा को अमेरिका के हाथों में सौंप देगा।
राहुल गांधी ने कहा कि इस सच्चाई को देश के सामने रखने के लिए युवा कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब और IYC के अन्य साथियों की गिरफ्तारी तानाशाही प्रवृत्ति और कायरता का प्रमाण है। कांग्रेस पार्टी और मैं अपने बब्बर शेर साथियों के साथ मज़बूती से खड़े हैं। सत्ता को सच का आईना दिखाना अपराध नहीं, देशभक्ति है। डरो मत - सच और संविधान हमारे साथ हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने गिरफ्तारी की निन्दा की
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने यूथ कांग्रेस अध्यक्ष उदयभानु चिब और बाकी युवकों की ऐसी गिरफ्तारी की निंदा की है। खरगे ने कहा- आज युवा नौकरी के लिए परेशान हैं और देश का माहौल इतना खराब हो गया है, जिसकी वजह से युवा गुस्से में हैं। मैं चाहता था कि PM मोदी देश के लिए कुछ अच्छा काम करेंगे, लेकिन उन्होंने देश को बर्बाद कर दिया। नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के आगे सिर झुकाकर उनकी सारी शर्तें मान लीं, जिससे पूरा देश शर्मिंदा है। यहां तक कि नरेंद्र मोदी ने किसानों के हितों के साथ भी समझौता कर दिया। वे देश को गुलामी में झोंक रहे हैं।
मोदी कायर हैंः खरगे
खरगे ने बयान में कहा कि हमारे युवा साथियों ने एक प्रोटेस्ट किया, जिसके बाद नरेंद्र मोदी कांग्रेस पार्टी को टारगेट कर, हमें डराने की कोशिश कर रहे हैं। मगर कांग्रेस के लोग कायर नहीं हैं। असल में PM मोदी खुद कायर हैं। वे संसद में आकर अपना और अपनी नीतियों का बचाव करने से डरते हैं। देश में लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए हम हर तरह का त्याग करेंगे और देश को गिरवी रखने वाले लोगों के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ेंगे।
यह गिरफ्तारी किसानों, युवाओं और बेरोजगारों के मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में हुई है। उदय भानु चिब को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया है, जिसे विपक्षी दल राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा बता रहे हैं। रजनी बाला ने ऐतिहासिक उदाहरणों का जिक्र करते हुए कहा कि सत्ता में बैठे लोग हमेशा क्रांतिकारियों के खिलाफ रहे हैं, जैसे भगत सिंह के समय में। साथ ही, उन्होंने बीजेपी के विरोध प्रदर्शनों और गलगोटिया यूनिवर्सिटी की घटना का उल्लेख कर दोहरे मापदंड पर सवाल उठाया।
मोदी सरकार कर रही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दमन
युवक कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब की गिरफ्तारी से मोदी सरकार पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन) को दबाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत नागरिकों को अपनी राय व्यक्त करने का मौलिक अधिकार है, लेकिन हाल के वर्षों में विरोध प्रदर्शनों पर सरकार की कार्रवाई ने इस अधिकार को चुनौती दी है।
दिल्ली पुलिस, जो केंद्र सरकार के अधीन आती है, अक्सर विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर सख्ती बरतती है। चिब की गिरफ्तारी किसानों और युवाओं के मुद्दों पर शांतिपूर्ण विरोध से जुड़ी है, लेकिन पुलिस ने इसे 'अपराध' बताकर हिरासत में लिया। वहीं, रजनी बाला ने सही कहा कि बीजेपी ने कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान विरोध किया था, लेकिन तब कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। यह दोहरा मापदंड पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है और सुझाव देता है कि कार्रवाई राजनीतिक दबाव में हो रही है।
रजनी बाला के इस बयान में दम है कि प्रदर्शनकारी कोई अपराध नहीं कर रहे थे, बल्कि वे बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं और युवाओं के भविष्य के लिए आवाज उठा रहे थे। मोदी सरकार की यह प्रवृत्ति कि विरोध को 'राष्ट्रीय सुरक्षा' या 'व्यवस्था भंग' का बहाना बनाकर दबाया जाए, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीधे प्रभावित करती है। हाल के किसान आंदोलनों में भी पुलिस ने बैरिकेड्स, आंसू गैस और गिरफ्तारियों का इस्तेमाल किया, जो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा आलोचना का विषय रहा है। यह लोकतंत्र में असहमति की जगह को संकुचित करता है।
युवक कांग्रेस अध्यक्ष की मां का बयान युवाओं को देशभक्ति के लिए प्रेरित करने वाला है। रजनी बाला का भगत सिंह का जिक्र याद दिलाता है कि स्वतंत्रता संग्राम में भी ब्रिटिश पुलिस ने ऐसी ही कार्रवाई की थी। आज की दिल्ली पुलिस, जो मोदी सरकार के नियंत्रण में है, विपक्षी आवाजों को 'राष्ट्र-विरोधी' करार देकर दबाती है, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है। गलगोटिया यूनिवर्सिटी की घटना का जिक्र करके उन्होंने दिखाया कि सरकारी गलतियां अनदेखी की जाती हैं, जबकि विरोध पर सख्ती बरती जाती है।
कुल मिलाकर, मोदी सरकार की यह कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने का एक और उदाहरण है, जो राजनीतिक हितों से प्रेरित लगती है। रजनी बाला का बयान न केवल एक मां की भावनाओं को दर्शाता है, बल्कि युवा पीढ़ी को प्रेरित करता है कि वे सच के लिए लड़ें। सच्चाई की जीत की उम्मीद के साथ, यह मामला न्यायिक जांच की मांग करता है ताकि लोकतंत्र मजबूत रहे।